थाना दुबौलिया पुलिस द्वारा 05 वारंटी को गिरफ्तार कर आवश्यक कार्यवाही पूर्ण कर मा0 न्यायालय रवाना किया गया ।
वारण्टी का विवरण
आमोद कुमार
आमोद कुमार
बांदा के बबेरू तहसील क्षेत्र में ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के निर्वाचन का शांतिपूर्ण और निर्विरोध संपन्न होना संगठनात्मक एकता का सकारात्मक संकेत माना जा सकता है। कमासिन ब्लॉक सभागार में मंडल अध्यक्ष यूनुस खान, प्रदेश कार्यकारिणी के पर्यवेक्षक राकेश सिंह कछवाह तथा जिला अध्यक्ष आलोक निगम की उपस्थिति में संपन्न हुई निर्वाचन प्रक्रिया में कमासिन कस्बा के दैनिक आज संवाददाता नंदकिशोर वर्मा को बबेरू तहसील अध्यक्ष चुना गया। यह चुनाव ऐसे समय हुआ जब पूर्व तहसील अध्यक्ष संदीप पटेल के बाद यह पद छह माह से रिक्त था और प्रभारी अध्यक्ष अरुण कुमार मिश्रा संगठन की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
निर्विरोध निर्वाचन केवल एक औपचारिक सफलता नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि संगठन के भीतर संवाद और सहमति की परंपरा अभी भी कायम है। पत्रकार संगठनों में अक्सर गुटबाजी और वर्चस्व की राजनीति देखने को मिलती है, ऐसे में सर्वसम्मति से नेतृत्व का चयन संगठन की परिपक्वता को दर्शाता है।हालांकि किसी भी पद पर निर्वाचित होना जितना महत्वपूर्ण है, उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण उस पद की जिम्मेदारियों का निर्वहन करना होता है। पत्रकारिता केवल खबरों का संकलन नहीं, बल्कि समाज, सत्ता और जनता के बीच जवाबदेही का सेतु है। इसलिए नवनिर्वाचित तहसील अध्यक्ष नंदकिशोर वर्मा के सामने सबसे बड़ी चुनौती पत्रकारों की समस्याओं को मजबूती से उठाने, संगठन को सक्रिय बनाए रखने और निष्पक्ष पत्रकारिता की परंपरा को मजबूत करने की होगी।
इस अवसर पर रामकिशोर यादव, भवानीदीन यादव, विनोद श्रीवास्तव, प्रमोद मिश्रा, राधेश्याम गुप्ता, पुष्पेंद्र सिंह, अजय शर्मा, रामकृपाल यादव, शांतनु शुक्ला, अरविंद मिश्रा, मिथिलेश कुमार, पंकज कुमार, धर्मेंद्र मिश्रा और पल्लवी गौतम सहित अनेक पत्रकारों ने नवनिर्वाचित अध्यक्ष को बधाई देते हुए संगठन हित में प्रभावी कार्य करने की अपेक्षा जताई।
अपने संबोधन में नंदकिशोर वर्मा ने सभी पत्रकार साथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पत्रकारिता का मूल उद्देश्य जनता की समस्याओं को शासन-प्रशासन तक पहुंचाना और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की गरिमा को बनाए रखना है। उन्होंने निष्पक्ष, निर्भीक और जनपक्षधर पत्रकारिता के लिए सामूहिक रूप से कार्य करने का आह्वान किया।निर्वाचन प्रक्रिया संपन्न हो चुकी है और बधाइयों का दौर भी जारी है, लेकिन अब असली परीक्षा शुरू होती है। ग्रामीण पत्रकारिता आज संसाधनों की कमी, बढ़ते दबावों और बदलते मीडिया परिदृश्य की चुनौतियों से जूझ रही है। ऐसे में संगठन का नया नेतृत्व तभी सफल माना जाएगा जब वह पत्रकारों की आवाज को मजबूती देने के साथ-साथ गांव, किसान, मजदूर और आमजन के मुद्दों को भी प्रभावी ढंग से उठाने में अपनी भूमिका निभाए। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की मजबूती पदों से नहीं, बल्कि उसके प्रतिनिधियों की प्रतिबद्धता और कार्यशैली से तय होती है। यही इस नए नेतृत्व की सबसे बड़ी कसौटी होगी।
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