सिधौली/लखनऊ।


डॉ. अंबेडकर संवैधानिक महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश कुमार सिद्धार्थ ने घोषणा की है कि वे हजारों बहुजन समाज के लोगों तथा लगभग 5000 महिलाओं के साथ बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की अस्थि कलश, डॉ. अंबेडकर के हस्तलिखित संविधान की प्रतिकृति, तथागत गौतम बुद्ध एवं पवित्र बोधि वृक्ष को श्रद्धापूर्वक नमन कर "डॉ. अंबेडकर महासभा बचाओ महाआंदोलन" का शुभारंभ करेंगे।
उन्होंने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर केवल एक व्यक्ति नहीं बल्कि सामाजिक न्याय, समानता, बंधुत्व और संवैधानिक मूल्यों के प्रतीक हैं। आज आवश्यकता है कि उनके विचारों, स्मारकों, अस्थि कलशों तथा उनसे जुड़ी ऐतिहासिक धरोहरों की रक्षा के लिए समाज संगठित होकर आगे आए।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि तथागत गौतम बुद्ध ने विश्व को करुणा, अहिंसा और मानवता का संदेश दिया तथा बाबा साहेब ने उन्हीं सिद्धांतों को आधुनिक भारत के संविधान में समाहित कर देश को लोकतांत्रिक दिशा प्रदान की। इसलिए बाबा साहेब की अस्थि कलश, हस्तलिखित संविधान तथा बौद्ध धरोहरों का सम्मान प्रत्येक भारतीय का कर्तव्य है।
महाआंदोलन के दौरान हजारों महिलाएं सामाजिक न्याय, संवैधानिक अधिकारों और बहुजन समाज के सम्मान की रक्षा का संकल्प लेंगी। आंदोलन के माध्यम से यह संदेश दिया जाएगा कि संविधान, लोकतंत्र और महापुरुषों की विरासत पर किसी भी प्रकार का आघात बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि बाबा साहेब डॉ. अंबेडकर, तथागत गौतम बुद्ध और बहुजन महापुरुषों की विरासत की रक्षा, सम्मान और संवैधानिक मूल्यों के संरक्षण के लिए समर्पित है। देश और प्रदेश के कोने-कोने से सामाजिक कार्यकर्ता, महिलाएं, युवा और बुद्धिजीवी इसमें भाग लेकर अपनी एकजुटता प्रदर्शित करेंगे।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने बहुजन समाज, महिलाओं, युवाओं एवं संविधान प्रेमियों से आह्वान किया कि वे अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर इस ऐतिहासिक महाआंदोलन को सफल बनाएं तथा सामाजिक न्याय, समानता और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।
नारा: "बाबा साहेब का सम्मान, संविधान की शान।"
"बुद्ध का संदेश – करुणा, समानता और मानवता।"
"डॉ. अंबेडकर महासभा बचाओ, संविधान बचाओ, लोकतंत्र बचाओ।"

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