अब तक न्याय_पीलीभीत_देवेशयादव*


पीलीभीत__जिला पीलीभीत से बुधवार को  ओंकारेश्वर के लिए कावड यात्रा शुरू हुई। कावड यात्रा में पीलीभीत,माधोटांडा, जमुनिया खास से 55 कांवड़िया सामिल हुए।  भगवान शिव भक्तों को भाजपा जिलाध्यक्ष संजीव प्रताप सिंह ने बाबा के जयकारों के साथ विदाई दी थी/
प्राणधन श्री राधावल्लभ लाल जु की अन्नत कृपा से सदगुरुदेव सरकार श्री श्री मोहन जी महाराज की परम कृपा से हर वर्ष की भाती जनपद पीलीभीत _उत्तर प्रदेश एवं इंदौर (मध्य प्रदेश)के काबरथी बम पवित्र श्रावण मास में श्री आध ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर  जी मां नर्मदा(खेड़ीघाट) से उज्जैन बाबा महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग  पर  किया जलाभिषेक/
आध ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर  जी मां नर्मदा(खेड़ीघाट) से 01/08/2025 से पद यात्रा का शुभारंभ हुई थी,दिनांक 07/08/2025 को  उज्जैन बाबा महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग  पर सभी भक्तजनों ने जलाभिषेक किया /
सभी भक्त जन/
महादेव मंदिर में भगवान भोलेनाथ बाबा की पूजा अर्चना कर  कावड़िए ओंकारेश्वर के लिए रवाना हुए थे/
   श्री राधा मनमोहन सेवा ट्रस्ट की पैदल कावड़ यात्रा को बड़ी संख्या में  शामिल शहरवासियों  ने बिदा किया/
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग उज्जैन में स्थित है__
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की कथा शिव पुराण में है। कथा के अनुसार, प्राचीन काल में उज्जैन में चंद्रसेन नामक एक राजा राज्य करते थे, जो भगवान शिव के परम भक्त थे। उनके एक मित्र मणिभद्र ने उन्हें एक चिंतामणि दी, जिससे राजा का यश-वैभव बढ़ने लगा। इस मणि को पाने के लिए अन्य राजाओं ने चंद्रसेन पर आक्रमण कर दिया। चंद्रसेन भागकर महाकाल वन में चले गए और शिव की शरण में लीन हो गए। 
वहां, एक विधवा गोपी अपने पुत्र के साथ आई। बालक शिव की भक्ति में लीन हो गया और माता की पुकार भी नहीं सुन रहा था। क्रोधित होकर माता ने उसे पीटना शुरू कर दिया। तभी भगवान शिव प्रकट हुए और वहां एक सुंदर मंदिर और ज्योतिर्लिंग की स्थापना हुई, जिसे महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के नाम से जाना जाता है। 
एक अन्य कथा के अनुसार, दूषण नामक एक राक्षस ने ब्रह्मा से वरदान प्राप्त कर बहुत शक्तिशाली हो गया था। उसने तपस्वियों को परेशान करना शुरू कर दिया। तपस्वियों ने भगवान शिव से प्रार्थना की। शिव ने दूषण को मार डाला और महाकाल के रूप में वहां निवास किया।

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