बांदा


बांदा में जिलाधिकारी अमित आसेरी की अध्यक्षता में आयोजित जल जीवन मिशन की समीक्षा बैठक ने एक बार फिर उस मूल प्रश्न को केंद्र में ला दिया, जिसका उत्तर आज भी ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों परिवार तलाश रहे हैं—क्या पेयजल योजनाएं वास्तव में लोगों तक पानी पहुंचा रही हैं या केवल फाइलों में प्रगति दर्ज हो रही है?
बैठक में मटौंध पेयजल योजना की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने महाप्रबंधक जल संस्थान को जल स्रोत, जल उपलब्धता और वितरण व्यवस्था का विस्तृत खाका तैयार करने के निर्देश दिए। यह निर्देश अपने आप में महत्वपूर्ण है, क्योंकि किसी भी पेयजल योजना की सफलता पाइपलाइन बिछाने से नहीं, बल्कि इस बात से तय होती है कि अंतिम छोर पर बसे व्यक्ति के नल तक नियमित और पर्याप्त पानी पहुंच रहा है या नहीं।जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि पानी कहां से आएगा, कितनी मात्रा में उपलब्ध होगा और किस प्रकार विभिन्न गांवों तक पहुंचाया जाएगा, इसकी समग्र कार्ययोजना तैयार की जाए। यह टिप्पणी इस ओर भी संकेत करती है कि केवल निर्माण कार्य पूरा कर देना पर्याप्त नहीं, बल्कि जल स्रोतों की स्थिरता और वितरण व्यवस्था की व्यवहारिकता भी उतनी ही आवश्यक है।बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित पेयजल योजनाओं के संचालन और रखरखाव की समीक्षा करते हुए यह भी महसूस किया गया कि कई योजनाएं तकनीकी और विद्युत समस्याओं के कारण प्रभावित हैं। जिलाधिकारी ने ऐसे क्षेत्रों की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। क्योंकि जलापूर्ति की सबसे बड़ी विडंबना यही है कि करोड़ों की योजनाएं बिजली, रखरखाव या समन्वय की कमी के कारण अपेक्षित परिणाम नहीं दे पातीं।
जसपुरा पेयजल योजना को प्रथम चरण में जल संस्थान से जल जीवन मिशन को हस्तांतरित करने के निर्देश भी दिए गए। यह कदम जवाबदेही तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि अक्सर विभागीय जिम्मेदारियों के बीच योजनाओं की गति प्रभावित होती है।दरअसल, जल जीवन मिशन का उद्देश्य केवल पाइपलाइन बिछाना नहीं, बल्कि हर घर तक सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है। यदि योजनाओं का संचालन प्रभावी नहीं होगा तो करोड़ों रुपये की लागत से तैयार अधोसंरचना भी लोगों की प्यास नहीं बुझा सकेगी।जिलाधिकारी अमित आसेरी ने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश देते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि पेयजल योजनाओं का मूल्यांकन कागजी प्रगति से नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों के घरों तक पहुंचने वाली जलधारा से होगा। क्योंकि विकास की वास्तविक तस्वीर रिपोर्टों में नहीं, उस नल में दिखाई देती है जिससे आम नागरिक को प्रतिदिन स्वच्छ पानी मिलता है।

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