संवाददाता क्षत्रपाल मौर्य यूपी अब तक न्यूज़ चैनल *। *उन्नाव में अनाथ बच्चों ने वीडियो वायरल कर सीएम लगाई गुहार कोरोना काल में बीघापुर तहसील में चालक रहे पिता की
कलेक्ट्रेट के बाबू पर पिता की पेंशन रोकने का लगाया गंभीर आरोप.
2024 में केजरीवाल जीरो या हीरो
2024 में केजरीवाल जीरो या हीरो
क्रोनोलॉजी समझे मनीष सिसोदिया उप मुख्यमंत्री दिल्ली प्रदेश, सरकारी स्कूलों के कायाकल्प को प्रस्तुत एक प्रतिबद्ध और कर्मठ शिक्षावीर को महिमामंडित करती न्यूयॉर्क टाइम्स में 19अगस्त को एक ख़बर प्रकाशित हुई। करनदीप सिंह ने कक्षा 12 के छात्र प्रदीप पासवान के अनुभवों या कहिये साक्षात्कार को ख़बर की लीड स्टोरी बनाई है। प्रदीप कहता है पहले मैं हफ्तों स्कूल से गायब रहता हमारे स्कूल में टीन की छत होती थी जो तवे की तरह गर्म हो जाती। दीवारें जर्जर थी, शौचालय बदबूदार और पीने के पानी की जगह पर सापों का कब्ज़ा रहता। अब हम सुबह 7बजने का बेसब्री से इन्तजार करते हैं ताकि स्कूल के मज़बूत और खूबसूरत कमरे, साफ़ सुथरे शौचालय और फिल्टर्ड जल का उपयोग कर अपने सपनों को उड़ान देने के लिए शांतिप्रिय पठन पाठन के माहौल में अध्ययनरत हो सके। मेरी तमन्ना है कि मैं एक आईएएस अफसर बनूं।
कितनी बेहतरीन ख़बर है हर साधारण व्यक्ति के सीधे दिल में उतर जायेगी। संवाददाता के मनोभाव को समझने की आवश्यकता है। साक्षात्कार के लिए चिन्हित किया प्रदीप पासवान को यानि एक एससी लड़के को, ताकि केजरीवाल को दलित छात्रों के नायक के रूप में प्रस्तुत किया जा सके। प्रदीप के बयान में स्कूल के रख रखाव का चित्रण तो किया ही गया विशेष तौर से यह सन्देश भी दिया गया कि केजरीवाल और सिसोदिया के नायकत्व में ही दलित बच्चे हौसले के साथ अपने सपनों की उड़ान भर सकते हैं। केजरीवाल को भान है कि जब लोग मिष्ठान वितरण से मधुमेह रोगी होकर धरती का भार कम कर सकते हैं तब उन्हें गरल क्यों दिया जाय!
यह ख़बर 19अगस्त को न्यूयॉर्क टाइम्स अमेरिका में छपी, इसी ख़बर को यूएई के खलीज टाईम्स ने भी जगह दे दी। यहीं से बवाल मचना शुरू हो गया। मनीष सिसोदिया के आवास पर सीबीआई ने 20 अगस्त को छापा मारा। 21अगस्त को लुकआउट नोटिस भी जारी कर दिया। आम जन मानस के मनस पटल पर एक बात उभर रही होगी कि मोदी ने सीबीआई और ईडी को अपना टॉमी बना लिया है। वह विपक्ष के पावरफुल नेताओं को तंग करने के लिए उन पर भौंकने के लिए अपनी सुविधानुसार अपने पालतू को छोड़ देते हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स में भारत की किसी ख़बर को जगह मिले हर भारतीय के लिए गौरव की बात है। ख़बर की डेंसिटी उसी तरह इतनी अधिक थी, जिस तरह जंगल में फैली आग की लपटें पलक झपकते ही पूरे जंगल को अपनी आगोश में भींच लेती है उसी तरह इस ख़बर ने भी पूरे देश में सनसनी फैला दी।
यदि 20 अगस्त को सीबीआई मनीष सिसोदिया के घर पर छापा न मारती तब न्यूयॉर्क टाइम्स की ख़बर इतनी वायरल नही होती। यानि सब कुछ फिक्स्ड है मेरे दोस्त। मोदी और केजरी दोनो की गैंग एक दूसरे की चढ्ढी उतारने का अभिनय न्यूयॉर्क टाइम्स की ख़बर को लेकर ही कर रहे हैं। 2024 लोकसभा चुनाव में नीतीश कुमार की एंट्री की संभावना ने जहां पुराने कई समीकरणों को ध्वस्त किया वहीं कई नए गठजोड़ को अंजाम की भी संभावना प्रबल कर दी है। मोदी को बेहतर ज्ञात है कि जब राजज्ञा से जन्में पिछड़े का मुकाबला मां के गर्भ से जन्में पिछड़े से होगा तब तास के पत्ते से समुद्र किनारे बना उनका आलीशान महल भरभरा कर बिखर जायेगा। फिक्स्ड मैच शुरू है, केजरीवाल को मोदी रोकना चाहते हैं इसलिए उनके राईट और लेफ्ट हैंड को धीरे धीरे उनसे अलग किया जा रहा है। कभी सत्येन्द्र जैन तो कभी सिसोदिया पर टॉमी का आक्रमण हो रहा है। यही मुद्दे उठा रही है न केजरीवाल की गैंग? दिल्ली प्रदेश के विधान सभा चुनाव 2015 में 70 सीटों में से 67 सीट और 2020 में 63सीट जीतने वाली एएपी का 2014 और 2019 में हुए दोनों लोकसभा चुनावों में सुफड़ा साफ़ हो जाता है क्यों? दाल में कुछ तो काला है। 2014 में पंजाब से लोकसभा की चार सीट जीतने वाली एएपी 2019 में 1सीट पर सिमट जाती है।
कमाल तो यह है कि 2022 में पंजाब के विधान सभा के 117 सीटों में से 92 सीट जीतने वाली एएपी के मु्ख्यमंत्री भगवंत सिंह मान अपनी संगरूर की लोकसभा सीट भी उप चुनाव में नही बचा पाए। लोकसभा में बिग जीरो की उपस्थिति वाली पार्टी का मुखिया 2024 में मोदी को चुनौती देगा इससे बड़ा कोई और दूसरा चुटकुला हो सकता है क्या? मीडिया प्रबंधन में केजरीवाल मोदी के गुरू हैं। दोनों एक ही खेत की ऊपज हैं। दोनों में फ्रैंडली फाईट चल रही है ताकि मोदी को तीसरी बार सत्ता के कक्ष में प्रस्थापित किया जा सके।
2014के लोकसभा चुनाव में केजरीवाल मोदी के मार्ग में रोड़ा बन सकते थे परन्तु दोनों की गलबहियां और आका के इशारे की वजह से रंगमंच के बड़े कलाकार केजरीवाल ने आरएसएस के अंगुलियों का भाव समझ
जूनियर आर्टिस्ट मोदी का मार्ग साफ़ करने के उद्देश्य से ही फरवरी 2014 में मुख्य मंत्री पद से मात्र 49 दिनों में ही हद दर्जे की क्षुद्र मनोवृत्ति का प्रदर्शन कर इस्तीफा दे दिया था। यदि वह सत्ता में बने रहते तो लोग उन्हें गम्भीर नेता स्वीकार कर लेते और लोकसभा में वह 40 सीट के आस पास चुनाव में जीत जाते! इन्होंने अपने को अपरिपक्व साबित कर मोदी का मार्ग सहज किया। कल्पना करें यदि (आप) को 2014 में लोकसभा की 40 सीट मिल जाती तब क्या मोदी ख़ुद के बल पर बहुमत के जादुई आंकड़े को छूकर मज़बूत बन सकते थे?
नितिन गडकरी और शिवराज सिंह चौहान को भाजपा संसदीय बोर्ड से निष्कासित करना और केजरीवाल गैंग से सीबीआई सीबीआई खेलना एक कुटिल चाल है। भारत में जो व्यक्ति पिटता है लोगों की सहानुभति उसकी तरफ़ उमड़ पड़ती है। साज़िश की सूई इशारा कर रही है कि केजरीवाल को मोदी के हथकंडे का पीड़ित दिखाने की कोशिश मोदी के लिए 2024 लोकसभा चुनाव में उत्पन्न हो रहे खतरे को कम करने की रणनीति है। फोर्ड फाउंडेशन और अशोक संस्था (अमेरिकन) हमेशा केजरीवाल की कबीर संस्था पर मेहरबान रही है। 2लाख अमेरिकी डॉलर का अनुदान भी कबीर संस्था को फोर्ड फाउंडेशन ने ही दिया था।
केजरीवाल को रेमन मैग्सेसे पुरस्कार मिलना, दिल्ली में उनके द्वारा स्कूलों का कायाकल्प करने की ख़बर न्यूयॉर्क टाइम्स के प्रथम पृष्ठ पर स्थान बना लेना सब फिल्मी स्टाईल में पहले से ही स्क्रिप्टेड है। एक घटना का उल्लेख अति प्रासंगिक है, 2012 में सीएनएन के एक साक्षात्कार में मशहूर एक्टिविस्ट अरुंधति रॉय ने खुलासा किया था कि कांग्रेस के भ्रष्टाचार के खिलाफ़ चलाया गया आन्दोलन अन्ना हजारे के दिमाग की ऊपज नही थी। केजरीवाल आरएसएस,अडानी, अम्बानी के निर्देशन में इस फिल्म के सीन्स निर्धारित किए गए थे। अन्ना को संत की तरह गन्ना चूसने के लिए स्थापित किया गया था।आन्दोलन के समय अम्बानी, अडानी को पानी पी पीकर अपशब्द कहने वाले केजरीवाल की जिह्वा अब विरोध में क्यों नही लपलपाती? जिह्वा जो बलखाती हुई अडानी, अम्बानी को नागिन सी डसने को व्यग्र थी अब आत्मघात के व्याघात का यूटर्न क्यों ले रही है?
मोदी एंड कंपनी को एहसास है कि 2024 में उन्हें बहुमत नही मिलेगा। मिलीजुली सरकार की स्थिति में नितिन गडकरी सहयोगियों की पसन्द न बन जाए इसलिए उस कांटे को पहले से ही निकाल दिया गया है। यदि कुछ सीटें केजरीवाल को मिल गई तो वह मोदी के स्वाभाविक दोस्त बन सकते हैं। स्मरण रहे जिस दिन देश में वास्तविक लोकतन्त्र के आधार पर चुनाव होने प्रारम्भ हो गए और बहुजन नेतृत्व बहुमत के पास पहुंच बनाने लगा तब भाजपा, कांग्रेस, आप, कम्युनिस्ट सभी इकठ्ठे होकर बहुजन को सत्ता से दूर रखने के लिए कुछ भी करने को सहर्ष तैयार होंगे। 2024 लोकसभा का चुनाव हाईब्रिड और वास्तविक पिछड़े के बीच होगा। देखना है
नेतृत्व का सेहरा सच्चे या झूठे पिछड़े किसके सिर बधेगा? इतिहास गवाह रहा है हमेशा शिखंडियों को आगे रखकर ही अजेय योद्धाओ को वीरगति की शैय्या पर लिटाया गया है।
गौतम राणे सागर
राष्ट्रीय संयोजक,
संविधान संरक्षण मंच।
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