शुक्रवार को कोर्ट में कानपुर हिंसा में 7 आरोपियों की 21 जमानत पर सुनवाई शुरू हुई।


3 जून को कानपुर हिंसा के मास्टरमाइंड हयात जफर हाशमी, पूर्व सपा नेता निजाम कुरैशी समेत अन्य सात लोगों की जमानत अर्जी शुक्रवार को खारिज हो गई। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश जीतेंद्र कुमार द्विवेदी ने पर्याप्त आधार न होने के चलते हयात समेत अन्य लोगों की जमानत अर्जी निरस्त कर दी।

बचाव पक्ष ने कहा हयात ने नहीं की कोई घटना
शुक्रवार को कोर्ट में कानपुर हिंसा में 7 आरोपियों की 21 जमानत पर सुनवाई शुरू हुई। उपद्रव के मास्टर माइंड और मौलाना मोहम्मद अली जौहर फैंस एसोसिएशन का राष्ट्रीय अध्यक्ष हयात जफर हाशमी की ओर से जमानत पर तर्क दिए गए कि बंदी की शांतिपूर्वक घोषणा की थी। पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर एक दिन पहले घोषणा वापस ले ली थी। जिसके संबंध में पुलिस के अधिकारियों को वाट्सएप और फोन पर जानकारी दी थी।

पुलिस ने पूरी घटना का सूत्रधार बताया
हयात के अधिवक्ता की ओर से कॉल डिटेल और लोकेशन की जांच करने का तर्क दिया गया। यह भी कहा कि इससे पहले कभी कोई आरोप नहीं रहा। तर्क दिया कि 43 करोड़ की फंडिंग बताई जा रही है जबकि पंजाब नेशनल बैंक में एक खाता है जिसमें तीन हजार रुपये बैलेंस हैं। इस पर विशेष लोक अभियोजन पंकज त्रिपाठी ने कहा कि पूरी घटना का सूत्रधार हयात है। यह घटना पूर्व नियोजित थी जिसके साक्ष्य पुलिस को मिले हैं।

हयात ने प्रशासन, पुलिस को धोखे में रखा
अभियोजन पक्ष ने कोर्ट में पक्षा रखा कि हयात ने अपने साथियों के साथ 10 दिन पहले से बंदी की तैयारी शुरू कर दी थी। पर्चे बांटकर और पोस्टर लगाकर इसकी सूचना वर्ग विशेष के हजारों लोगों के बीच पहुंचायी गई जिसमें तीन जून को बंद का आवाहन था। प्रशासन को धोखे में रखकर बंदी का आवाहन वापस लिया गया।

साजिश रचते हुए सुनियोजित तरीके से दंगा कराया जिसमें दस लोग घायल हुए, शांति व्यवस्था छिन्न भिन्न हो गई। सपा के पूर्व नेता निजाम को भी इस घटना का सूत्रधार अभियोजन ने बताया। इन्हीं तर्कों के आधार पर अन्य लोगों की जमानत अर्जी निरस्त करने की मांग की गई थी।

इनकी जमानत हुई निरस्त
-हयात जफर हाशमी निवासी प्रेमनगर चमनगंज
-निजाम कुरैशी निवासी नई सड़क
-राहिल निवासी नई सड़क
-मो. हसीब निवासी चमनगंज
-मो. मेहताब निवासी कोपरगंज बांसमंडी
-गुलाम गौस निवासी बेकनगंज
-मोअज्जम शरीफ निवासी पेचबाग हलीम कंपाउंड

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