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केंद्रीय विद्यालयों में करने का निर्देश दिया है
कटान को रोकने के लिए ठोकर बनाया गया है
बाढ़ की विभीषिका झेलता रहा है सिद्धार्थ नगर
भारत नेपाल सीमा पर स्थित सिद्धार्थनगर जिला हर वर्ष बाढ़ की विभीषिका झेलता है। नेपाल से आने वाली छोटी बड़ी नदियां और नाले पहाड़ों पर होने वाली बारिश की वजह से पूरी तरह उफान पर हो जाते हैं। इन छोटी बड़ी नदियों से जिले में बाढ़ से भारी तबाही होती है। बाढ़ की इस विभीषिका से बचाव के लिए जिला प्रशासन हर वर्ष करोड़ों रुपए खर्च करता है। लेकिन जमीनी स्तर पर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की हालत जस की तस बनी रहती है। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी बांधो के निर्माण और बचाव के लिए बनाए गए ठोकरों पर करोड़ों रुपए खर्च किए गए हैं। इस बार भी प्रशासन बाढ़ की तैयारियों के बड़े-बड़े दावे कर रहा है।
वी /ओ--1--सिद्धार्थनगर जिला उत्तर प्रदेश के पिछड़े जनपदों में से एक भारत नेपाल सीमा पर स्थित तराई जिला है। इस जिले का प्रमुख व्यवसाय कृषि और सबसे बड़ी समस्या बाढ़ है। सिद्धार्थनगर जिले से पांच नदियां राप्ती, बूढ़ी राप्ती, कूड़ा, घोंघी और बाणगंगा गुजरती है। इन नदियों से बाढ़ प्रभावित गांव और हजारों हेक्टेयर फसल के बचाव के लिए बनाए गए बाँधो की मरम्मत के लिए हर साल करोड़ों रुपए खर्च किए जाते हैं। इस वर्ष भी इन पर बचाव और मरम्मत के नाम पर काफी बड़ी रकम खर्च की गई है। राप्ती नदी पर स्थित रीवा नानकार गांव से सटे हो रहे इस कटान को रोकने के लिए ठोकर बनाया गया है। गांव के आसपास नदी के मोड़ पर बने करीब 500 मीटर इस ठोकर पर लाखों रुपए खर्च किए गए हैं। बनाए गए इस अस्थाई ठोकर के निर्माण में कितनी अनियमितता बरती गई है यह आपके सामने हैं। ठोकर के बनाने में लगी मिट्टी से भरी बोरियां अभी से ही फट गई हैं। और उसमें भरी मिट्टी बाहर निकल गई है।ग्रामीणों का आरोप है कि जिस तरह ठोकर बनना चाहिए उन मानकों की अनदेखी करके इन ठोकरों को बनाया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि इस बार भी अगर बाढ़ आती है तो इन ठोकरों से उनके गांव का बचाव होना असंभव है। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी कुछ घर को बाढ़ लील जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि अगर वास्तव में सरकार और जिला प्रशासन यह चाहता है कि उनके गांव के लोगों को बाढ़ की कटान से निजात मिल जाए तो उन्हें अस्थाई ठोकरो की जगह अस्थाई ठोकरो का निर्माण कराना चाहिए। मिट्टी से भरी बोरियों को लगाकर कटान को नहीं रोका जा सकता। ग्रामीणों की मांग है कि सरकार उनके इस समस्या का समाधान जल्द से जल्द करें ।
वी/ओ-2--सिद्धार्थनगर जिले में हो रही बाढ़ पूर्व तैयारियों को लेकर जिला अधिकारी संजीव रंजन ने कहा कि सिद्धार्थनगर जिले में बाढ़ एक बड़ी समस्या है हर वर्ष बाढ़ में कई जगह कटान होने की खबरें आती हैं। उसको संज्ञान में लेकर बाढ़ से बचाव को लेकर काफी कार्य किए गए हैं। इस वर्ष भी करोडो रुपए खर्च कर बांधों की मरम्मत और ठोकरो का निर्माण कराया गया है । इसके अलावा बाढ़ को लेकर जिले में हर तरह की तैयारियां कर ली गई हैं। संबंधित विभागों को संवेदनशील कटाना स्थलों को चिन्हित कर वहां चल रहे कामों को जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश भी दे दिए गए हैं। जिलाधिकारी ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इस वर्ष प्रशासन की मुस्तैदी और तैयारी से हम बाढ़ से होने वाले नुकसान को बहुत कम कर ले जाएंगे। जिलाधिकारी ने कहा कि जिले में 12 बांधों पर कार्य होना था जो पूर्ण हो गए हैं। कई जगहों से कार्य में कमी की शिकायत आ रही है जिसके लिए जांच टीम गठित कर दी गई है अगर काम में किसी भी तरह की कोई कमी पाई जाएगी तो संबंधित के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
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