बांदा। लगातार बारिश और बाढ़ ने खेतों से लेकर बस्तियों तक मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कहीं जलभराव रास्तों को रोक रहा है तो कहीं कीचड़ और दूषित पानी लोगों की परेशानी बढ़ा रहा है। ऐसे हालात में राहत और बचाव की व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन ने विभागों की जवाबदेही तय करते हुए निगरानी तेज करने के निर्देश दिए हैं।बाढ़ एवं अतिवृष्टि से उत्पन्न परिस्थितियों, जलभराव तथा प्रभावित क्षेत्रों में राहत-बचाव की स्थिति की समीक्षा के लिए रविवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में जिलाधिकारी अमित आसेरी की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमें जनहानि, पशुहानि, मकान और फसल क्षति से लेकर जलभराव, स्वच्छता, विद्युत आपूर्ति, सड़कों, स्वास्थ्य सेवाओं और पशुओं के टीकाकरण तक की विभागवार समीक्षा की गई।
खेतों में नुकसान का आंकलन कागज पर नहीं, क्षेत्रवार हो
अतिवृष्टि से प्रभावित फसलों की जानकारी लेते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि फिलहाल तिल, उड़द और मूंग की फसलों को नुकसान की स्थिति सामने आई है। उन्होंने क्षेत्रवार सर्वे कराकर क्षति का विस्तृत विवरण तैयार करने के निर्देश दिए। साथ ही स्पष्ट किया कि सर्वे में पात्र किसानों का नाम छूटना नहीं चाहिए और कोई भी प्रभावित पात्र किसान मुआवजे से वंचित न रहे।
यह निर्देश इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आपदा के बाद राहत की वास्तविक कसौटी सरकारी आंकड़े नहीं, बल्कि खेत तक पहुंचने वाली सहायता होती है।जलभराव की वजह खोजने के साथ चोक प्वाइंट होंगे चिन्हित
सभी उप जिलाधिकारियों को अपनी-अपनी तहसीलों में बड़े गांवों और जलभराव से प्रभावित क्षेत्रों की सूची तैयार करने को कहा गया है। नालों पर अतिक्रमण और जलभराव के दूसरे कारणों को चिन्हित करते हुए चोक प्वाइंट्स की सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।यानी समस्या सामने आने के बाद पानी निकालने तक सीमित रहने के बजाय उसके कारणों की पहचान पर भी जोर दिया गया है।पीए सिस्टम से लगातार पहुंचेगी जरूरी सूचना
संवेदनशील और प्रभावित क्षेत्रों में स्थापित सभी पब्लिक एड्रेस सिस्टम सक्रिय रखने के निर्देश दिए गए हैं। इनके माध्यम से लोगों को मौसम, सावधानियों और जरूरी प्रशासनिक सूचनाओं से लगातार अवगत कराने को कहा गया है। जिलाधिकारी ने पीए सिस्टम वाले स्थानों पर निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश भी विद्युत विभाग को दिए।
इसके साथ ही विद्युत पोल और अन्य विद्युत व्यवस्थाओं को हुई क्षति का सर्वे कराकर तत्काल मरम्मत कराने को कहा गया है।गड्ढों और क्षतिग्रस्त सड़कों पर भी नजर
बारिश ने जहां जलभराव की समस्या बढ़ाई है, वहीं कई सड़कों की हालत भी प्रभावित हुई है। लोक निर्माण विभाग को अतिवृष्टि से क्षतिग्रस्त और गड्ढायुक्त सड़कों का चिन्हांकन कर पैचवर्क एवं आवश्यक मरम्मत शीघ्र कराने के निर्देश दिए गए। उप जिलाधिकारियों से भी अपनी-अपनी तहसीलों की खराब सड़कों की सूची उपलब्ध कराने को कहा गया है।अस्पतालों में डॉक्टरों की उपलब्धता पर जोर
मुख्य चिकित्सा अधिकारी को सभी सीएचसी और पीएचसी में चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं लगातार उपलब्ध रखने के साथ पोस्टमार्टम की कार्रवाई समय से पूरी कराने को भी कहा गया।
जलभराव वाले क्षेत्रों में जिन हैंडपंपों के ऊपर पानी आ गया है, उनके पानी का पेयजल के रूप में इस्तेमाल न करने के लिए लोगों को जागरूक करने तथा जरूरत के अनुसार वैकल्पिक पेयजल की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए गए हैं।गौशालाओं पर विशेष निगरानी, स्थलीय निरीक्षण के आदेश
बारिश के बीच गौशालाओं की स्थिति को लेकर भी प्रशासन ने निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। पशुपालन विभाग को सभी गौशालाओं में पशुओं का प्राथमिकता के आधार पर टीकाकरण कराने को कहा गया है। कीचड़ और जलभराव से प्रभावित गौशालाओं की सूची तैयार कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए।जिलाधिकारी ने सभी उप जिलाधिकारियों और जिला विकास अधिकारी को लेखपालों एवं ग्राम पंचायत सचिवों के माध्यम से गौशालाओं का स्थलीय निरीक्षण कराने और वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट शीघ्र उपलब्ध कराने को कहा।राहत की असली परीक्षा प्रभावित क्षेत्रों में होगी
जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जलभराव, स्वच्छता, विद्युत, चिकित्सा, पशु चिकित्सा सहित आवश्यक सेवाओं की लगातार निगरानी करने और जरूरत पड़ते ही तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।उन्होंने कहा कि अतिवृष्टि और बाढ़ की स्थिति को देखते हुए सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ पूरी तत्परता से काम करें तथा प्रभावित लोगों को समय से आवश्यक सहायता और सुविधाएं उपलब्ध कराएं।बैठक में आपदा प्रभारी/अपर जिलाधिकारी न्यायिक माया शंकर यादव सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

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