चिराग पासवान के कार्यक्रम में प्रयागराज और कौशांबी समेत आसपास के जिलों से एलजेपी (रामविलास) के 15 हजार से अधिक कार्यकर्ताओं के जुटने का दावा किया गया है. कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 11 बजे से होगी.


  • उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027को लेकर लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की तैयारियां तेज हो गई हैं. इसको लेकर एलजेपी अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान रविवार को प्रयागराज पहुंचेंगे. चिराग पासवान परेड मैदान से यूपी में चुनावी अभियान की शुरुआत करेंगे. वह शाम 4 बजे यूथ बोले तो कार्यक्रम में युवाओं से सीधा संवाद करेंगे.
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  • जानकारी के मुताबिक कार्यक्रम में चिराग पासवान युवाओं के सवालों का जवाब भी देंगे. बता दें कि एनडीए में शामिल एलजेपी (रामविलास) यूपी में सियासी जमीन तलाश रही है. LJP ने युवाओं को केंद्र में रखकर 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी का दावा किया है.
  • 15 हजार कार्यकर्ताओं के जुटने का दावा
  • बता दें कि कार्यक्रम में प्रयागराज और कौशांबी समेत आसपास के जिलों से 15 हजार से अधिक कार्यकर्ताओं के जुटने का दावा किया गया है. कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 11 बजे से होगी, चिराग पासवान शाम 4 बजे मंच पर पहुंचेंगे. पार्टी के यूपी प्रभारी और जमुई सांसद अरुण भारती समेत कई विधायक और बिहार सरकार के मंत्री भी कार्यक्रम में रहेंगे.
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  • जनता की शंकाओं को दूर करे चुनाव आयोग
  • बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेद संबंधी मीडिया रिपोर्ट के बाद केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि आयोग को जनता के मन में उत्पन्न हुईं शंकाओं को दूर करना चाहिए. चिराग पासवान ने बातचीत में यह भी स्पष्ट किया कि वह सरकार का हिस्सा होने के नाते किसी संवैधानिक संस्था का बचाव नहीं करना चाहते और विपक्षी नेताओं, विशेषकर राहुल गांधी के आरोपों को वह अधिक महत्व नहीं देते.
  • हाजीपुर से सांसद चिराग पासवान ने कहा, मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि सरकार का हिस्सा होने के नाते मेरा उद्देश्य किसी संवैधानिक संस्था का बचाव करना नहीं है. विपक्ष हमेशा अपने राजनीतिक हित के अनुरूप ही रुख अपनाएगा, इसलिए उसके आरोपों को लेकर मैं बहुत चिंतित नहीं हूं.
  • राहुल गांधी के बयानों का जवाब देने की जरूरत नहीं
  • हालांकि उन्होंने कहा, अगर जनता का चुनावी व्यवस्था से भरोसा उठने लगे, तो यह लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं होगा. इसलिए मेरा मानना है कि निर्वाचन आयोग को और अधिक मजबूती से अपना स्पष्टीकरण सामने रखना चाहिए. उसे राहुल गांधी और उनके साथियों के बयानों का जवाब देने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन जनता के मन में जो शंकाएं उत्पन्न हुई हैं, उन्हें दूर करना चाहिए.

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