इटरनल लाइट के लॉन्च के मौके पर कई जानी-मानी हस्तियां एक साथ आईं और उन्होंने दलाई लामा के असाधारण जीवन, उनकी विरासत और दुनिया पर उनके स्थायी प्रभाव पर चर्चा की.


  • वेस्टलैंड बुक्स ने नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में ‘इटरनल लाइट: द लाइफ एंड लिगेसी ऑफ द 14th दलाई लामा’ किताब को आधिकारिक तौर पर लॉन्च किया. यह किताब मशहूर पत्रकार और जीवनी लेखक डॉ. अरविंद यादव द्वारा लिखी गई है और इसमें 14वें दलाई लामा की जीवनी पर व्यापक रिसर्च की गई है.
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  • इस लॉन्च इवेंट में परम पावन दलाई लामा के असाधारण जीवन और उनकी कभी न मिटने वाली विरासत का जश्न मनाया गया. इसमें तिब्बत में उनके शुरुआती दिनों से लेकर दुनिया के सबसे सम्मानित आध्यात्मिक नेताओं में से एक और करुणा, शांति व अहिंसा की वैश्विक आवाज बनने तक के उनके सफर को दिखाया गया.
  • कार्यक्रम में ये लोग रहे मौजूद
  • शाम की शुरुआत ‘गेशे चोपा तेनजिन ल्हाड्रोन’ के नेतृत्व में ‘दीर्घायु प्रार्थना’ (Long-Life Prayer) से हुई. इसके बाद पद्म श्री प्रोफेसर नवांग समतेन, गेस्ट ऑफ ऑनर पवन के. वर्मा और डॉ. अरविंद यादव ने अपने विचार रखे. इस किताब को मशहूर दार्शनिक, राजनेता, लेखक और पूर्व केंद्रीय मंत्री पद्म विभूषण डॉ. करण सिंह की मौजूदगी में लॉन्च किया गया, जिन्होंने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए भाषण भी दिया.
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  • इंसानी जज्बे की अटूट ताकत
  • खुद दलाई लामा का आशीर्वाद पाने वाली किताब ‘इटरनल लाइट’ (Eternal Light) उम्मीद, विनम्रता, करुणा और इंसानी जज्बे की अटूट ताकत का एक दिल को छू लेने वाला सबूत है. 1935 में पूर्वी तिब्बत के एक दूर-दराज गांव में जन्मे ल्हामो थोंडुप को दो साल की उम्र में ही 13वें दलाई लामा का अवतार माना गया था. मठ में पढ़ाई-लिखाई की शांत दुनिया से लेकर वैश्विक राजनीति की उथल-पुथल तक, उनका जीवन असाधारण चुनौतियों से भरा रहा है, जिनका सामना उन्होंने अद्भुत साहस, समझदारी और मजबूती के साथ किया.
  • अपने हाथों में ली तिब्बत की राजनीतिक सत्ता
  • 1950 में चीन के हमले के बाद, सिर्फ़ 16 साल की उम्र में दलाई लामा ने तिब्बत की पूरी राजनीतिक सत्ता अपने हाथों में ले ली. 1959 में तिब्बत पर कम्युनिस्ट चीन के कब्जे के खिलाफ ल्हासा में हुए नाकाम नागरिक विद्रोह के बाद, 24 साल की उम्र में उन्होंने भारत में राजनीतिक शरण ली. उत्तरी भारत के धर्मशाला में बसने के बाद, उन्होंने तिब्बत की निर्वासित सरकार बनाई और तिब्बती समुदाय को फिर से खड़ा किया. साथ ही, उन्होंने तिब्बती बौद्ध धर्म की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और दार्शनिक विरासत को बचाने के लिए अथक प्रयास किए.
  • दलाई लामा का प्रभाव
  • फिर भी, दलाई लामा का प्रभाव तिब्बत से कहीं आगे तक फैला हुआ है. 1989 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित, वे करुणा, अहिंसा और बातचीत के वैश्विक प्रतीक बन गए हैं. उनका यह संदेश—’दुनिया में शांति आंतरिक शांति से ही आ सकती है. शांति का मतलब सिर्फ हिंसा का न होना नहीं है. यह मानवीय करुणा का प्रकटीकरण है’ ने अलग-अलग संस्कृतियों, धर्मों और महाद्वीपों के लाखों लोगों को प्रेरित किया है. दशकों की लगातार वकालत के जरिए, उन्होंने तिब्बत और वहां के लोगों की दुर्दशा को दुनिया की नजर में भी लाया है.
  • इस दिलचस्प नई जीवनी में, वरिष्ठ पत्रकार अरविंद यादव 14वें दलाई लामा के जीवन का विस्तार से वर्णन करते हैं और उन घटनाओं पर नई रोशनी डालते हैं, जिन्हें अक्सर गलत समझा गया, गलत तरीके से बताया गया या जिनके बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई. परम पावन दलाई लामा के आशीर्वाद से बनी यह किताब ‘इटरनल लाइट’ (Eternal Light) उम्मीद, विनम्रता और मानवीय भावना की अटूट शक्ति का एक प्रेरक प्रमाण है.
  • दलाई लामा का जीवन सिर्फ तिब्बत की कहानी नहीं
  • इस मौके पर ‘इटर्नल लाइट’ (Eternal Light) के लेखक डॉ. अरविंद यादव ने कहा, मैंने ‘इटरनल लाइट’ इसलिए लिखी है क्योंकि परम पावन दलाई लामा का जीवन सिर्फ तिब्बत की कहानी नहीं है, बल्कि करुणा, हिम्मत और इंसानियत का एक सबक है. परम पावन दलाई लामा सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक शक्ति हैं. सच्चाई, करुणा और अहिंसा के जरिए उन्होंने दुनिया को दिखाया है कि अपनी पहचान बनाए रखने के लिए हमेशा लड़ाई की ज़रूरत नहीं होती. कभी-कभी, बस खुद को बनाए रखना ही सबसे बड़ी जीत होती है.
  • पूर्व केंद्रीय मंत्री और पद्म विभूषण डॉ. करण सिंह ने भाषण देते हुए कहा, आज दुनिया में जिस चीज़ की कमी है, वह है करुणा. दलाई लामा का संदेश हमें याद दिलाता है कि करुणा का मतलब है, दूसरों के दर्द, गरीबी और तकलीफ़ को महसूस करना. हमें अपने जीवन में और दुनिया में करुणा और समझ की उस भावना को फिर से जगाना होगा.
  • क्या है वेस्टलैंड बुक्स?
  • वेस्टलैंड बुक्स एक अवॉर्ड-विनिंग भारतीय पब्लिशर है, जिसकी किताबों की लिस्ट में पॉपुलर और लिटरेरी फिक्शन, बिज़नेस, पॉलिटिक्स, बायोग्राफी, स्पिरिचुअलिटी, पॉपुलर साइंस, हेल्थ और सेल्फ-हेल्प जैसे कई विषय शामिल हैं. इसके मुख्य इम्प्रिंट्स में कॉन्टेक्स्ट (अवॉर्ड-विनिंग लिटरेरी फिक्शन और नॉन-फिक्शन), एकादा (समकालीन भारतीय भाषाओं में लेखन और अनुवाद), ट्रैंकेबार (उपमहाद्वीप से नया फिक्शन), वेस्टलैंड स्पोर्ट, वेस्टलैंड बिजनेस, वेस्टलैंड नॉन-फिक्शन और रेड पांडा (बच्चों की किताबें) शामिल हैं.
  • 2023 में, वेस्टलैंड ने ‘इंडी प्रेस’ नाम का एक सेल्फ-पब्लिशिंग इम्प्रिंट लॉन्च किया और 2024 में ‘IF’ पेश किया, जो खास तौर पर स्पेक्युलेटिव फिक्शन के लिए है. वेस्टलैंड, पाठकों तक बेहतरीन ग्राफिक नैरेटिव्स (चित्र-कथाएं) पहुंचाने के लिए ‘प्रतिलिपि कॉमिक्स’ के साथ भी मिलकर काम करता है. हाल ही में, इसने ‘QD’ (क्वीर डायरेक्शन्स) लॉन्च किया है, जो फिक्शन, नॉन-फिक्शन और कविता के जरिए LGBTQIA+ आवाजों को बढ़ावा देने वाला एक इम्प्रिंट है.

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