- BRICS Summit Delhi 2026: ईरान, सऊदी अरब और UAE ब्रिक्स के मंच पर उस वक्त उपस्थित हो रहे हैं, जिस वक्त अमेरिका और ईरान में जंग चल रही है. अरब में अब ईरान जंग का विस्तार होता जा रहा है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, बाब-अल-मंदेब और लाल सागर से होते हुए युद्ध की आग अब यमन और सऊदी अरब तक पहुंच गई है. सऊदी अरब हूती पर हमला कर रहा है. अमेरिका सऊदी अरब की मदद कर रहा है. वहीं भड़का हूती सऊदी अरब के शहरों को दहला रहा है.
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- ऐसे तनाव भरे माहौल में अरब के तीन देश ब्रिक्स के मंच पर एक साथ आए हैं. तो सवाल यही है कि क्या ब्रिक्स के मंच से ईरान अमेरिका युद्ध का समाधान निकलेगा? क्या ब्रिक्स के दबाव से पश्चिमी देश ईरान पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंध हटाने पर मजबूर होंगे?
- कई सालों से आर्थिक प्रतिबंध
- ईरान कई सालों से आर्थिक प्रतिबंधों का सामना कर रहा है. हाल के महीनों में ये दबाव और भी खतरनाक हो गए हैं. ये स्थिति ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजराइल के सैन्य आक्रामकता की वजह से पैदा हुई है. ऐसे में ब्रिक्स अरब में शांति स्थापित करने का मंच साबित हो सकता है, इस बात की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता.
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- आर्थिक विकास की राह पर चलने का निर्णय
- भारत, रूस और चीन की पहल से बारूदी आग शांत हो सकती है. अमेरिका हो, ईरान हो या फिर दूसरे अरब देश, वो एक बार फिर से युद्ध रोककर आर्थिक विकास की राह पर चलने का निर्णय ले सकते हैं. ब्रिक्स के मंच से ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने बताया कि युद्ध की वजह से दुनिया कितनी बड़ी मुश्किलों का सामना कर रही है.
- पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को नुकसान
- ईरान युद्ध की वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, बाब अल-मंदेब और लाल सागर बंद है. इस वजह से अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार बुरी तरह से प्रभावित है, खासकर तेल व्यापार. चूंकि तेल की सप्लाई बाधित है. इसलिए कच्चे तेल की कीमत हर बीतते दिन के साथ बढ़ती ही जा रही है, जिससे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंच रहा है. इस युद्ध से पूरा विश्व परेशान है.
- सिर्फ ईरान को नहीं भुगतना पड़ेगा युद्ध का खामियाजा
- ईरान के राष्ट्रपति ने इसी तरफ इशारा करते हुए कहा कि अगर किसी को लगता है कि युद्ध का खामियाजा सिर्फ ईरान को भुगतना पड़ेगा तो ऐसा नहीं है. इसका परिणाम पूरी दुनिया भुगतेगी. आर्थिक सुरक्षा को राष्ट्रीय और क्षेत्रीय सुरक्षा से अलग नहीं किया जा सकता है. जब भी किसी देश के आर्थिक सिस्टम पर सैन्य और राजनीतिक दबाव पड़ता है, तो इसका असर उस देश की सीमा से बाहर भी पड़ता है. ये क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्थिरता को भी बुरी तरह से प्रभावित कर सकता है.
- मसूद पेजेश्कियान ने जो कुछ कहा वही सच है. ईरान युद्ध की वजह से दुनिया मंदी की तरफ बढ़ रही है. कमोबेश हर देश परेशान हैं. ऐसे में इस बात की संभावना अवश्य है कि आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान बातचीत के जरिए युद्ध को रोकने पर सहमत हो जाएं.
- अरब देशों के रिश्ते एक दूसरे से खराब
- सवाल यही है कि जिन तीन अरब देशों के रिश्ते एक दूसरे से खराब हैं, उनकी तरफ से ब्रिक्स सम्मेलन में कौन-कौन शामिल हो रहा है, अब इसे भी समझना जरूरी है. ईरान की तरफ से वहां के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल हो रहे हैं. सऊदी अरब की तरफ से वहां के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान अल सऊद सिरकत कर रहे हैं. तो संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE की तरफ से अबू धाबी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन जायद हिस्सा ले रहे हैं. ये तीनों न सिर्फ एक साथ मंच साझा करेंगे बल्कि माना जा रहा है कि एक दूसरे से मुलाकात और बात भी कर सकते हैं.
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