मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास बनी मस्जिद को लेकर उठे विवाद पर रोहित पवार ने कहा कि उन्हें इस मस्जिद के बारे में जानकारी ही नहीं थी. राहुल पर दिए बयान पर भी प्रतिक्रिया दी.


मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट के टर्मिनल 2 (T2) के पास बनी मस्जिद को लेकर हुए विवाद पर NCP-SP विधायक रोहित पवार ने कहा, “मुझे नहीं पता था कि मुंबई एयरपोर्ट के अंदर कोई मस्जिद है. जो फैसला लिया गया, वो शायद सुरक्षा पक्की करने और हवाई जहाज या आम लोगों को कोई दिक्कत न हो, इसके लिए लिया गया होगा. उन्होंने कहा हमें यह पता लगाना होगा कि ये फैसला किसने और क्यों लिया. हमें ये भी देखना होगा कि मस्जिद एयरपोर्ट के अंदर है या बाहर. चूंकि मुझे इस मामले की पूरी जानकारी नहीं है, इसलिए मैं इस पर अभी कोई टिप्पणी नहीं कर सकता.”

 

लोकसभा में विपक्ष के नेता (LoP) राहुल गांधी के बारे में अपने ही बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा, “ऐसे कई नेता हैं जिनसे मैं कुछ न कुछ सीखता हूं. लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि मैं किसी पार्टी में सिर्फ इसलिए शामिल हो जाऊंगा क्योंकि हमारी राजनीतिक सोच एक जैसी है. वे आज लड़ाई लड़ रहे हैं. उन्होंने कहा, वे देश के विपक्ष के नेता (LoP) के तौर पर जमीन पर उतरकर काम कर रहे हैं. हम भी लड़ना चाहते हैं और लड़ रहे हैं. जो लोग संघर्ष में लगे हैं, उनसे हम निश्चित रूप से प्रेरणा ले सकते हैं.”

 


‘बीजेपी कहीं भी सत्ता में वापस नहीं आएगी’

रोहित पवार ने कहा, “अभी सबसे अहम चर्चा यह है कि 2029 में BJP केंद्र या राज्य, कहीं भी सत्ता में वापस नहीं आएगी. यही चर्चा का विषय है और हम इसी लक्ष्य के लिए काम कर रहे हैं. तकनीकी रूप से, कांग्रेस और हमारी पार्टी अलग-अलग हैं. फिर भी, क्योंकि हमारी विचारधारा एक है, हम साथ मिलकर काम करेंगे.”

क्या है मामला?

मुंबई एयरपोर्ट के टर्मिनल-2 के पास एक मस्जिद जैसा ढांचा बना हुआ है, जिस पर विवाद बढ़ गया है। लोग कह रहे हैं कि यह अवैध है. महाराष्ट्र सरकार की एजेंसी MMRDA ने एयरपोर्ट चलाने वाली कंपनी (MIAL) को पत्र लिखा है। पत्र में कहा गया है कि यह ढांचा बिना अनुमति का है, इसलिए नियमों के अनुसार इसे हटा दिया जाए.

मार्च में, नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार दिल्ली गए। वे विपक्ष के नेता (LoP) राहुल गांधी से मिलकर उन्हें कुछ दस्तावेज़ सौंपना चाहते थे और उस विमान दुर्घटना की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग के लिए समर्थन जुटाना चाहते थे, जिसमें उनके चाचा और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की मौत हो गई थी. यह दुर्घटना एक महीने से कुछ ज्यादा समय पहले हुई थी. दोनों के बीच यह मुलाक़ात एक घंटे से ज़्यादा समय तक चली थी.

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