प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंत्रियों के साथ हुई बातचीत में राज्य सरकारों से तालमेल पर जोर दिया. उन्होंने सभी को नियमित बैठकें करने और क्षेत्रवार सम्मेलन करने के लिए कहा.


  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैबिनेट मंत्रियों के साथ हुई समीक्षा बैठक में केंद्र-राज्य समन्वय बढ़ाने के निर्देश दिए. पीएम मोदी ने मंत्रियों से केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय और सहयोग मजबूत करने को कहा. इस समीक्षा बैठक में कैबिनेट मंत्रियों को राज्य सरकारों के साथ बेहतर तालमेल और सहयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए. प्रधानमंत्री ने नियमित अंतराल पर केंद्र और राज्यों के बीच बैठकें करने की भी बात कही.
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  • पीएम ने मंत्रियों से कहा कि वे अपने-अपने विभागों से जुड़े राज्य के समकक्ष मंत्रियों के साथ क्षेत्रवार या सेक्टर-बैठकें आयोजित करें. जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने हाल ही में राज्य के जल संसाधन मंत्रियों की तीन दिवसीय बैठक आयोजित की थी जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने भी संबोधित किया था. प्रधानमंत्री ने अब अन्य मंत्रालयों को भी इसी मॉडल को अपनाने के निर्देश दिए हैं. इसका मकसद अलग-अलग सेक्टर में केंद्र और राज्यों के बीच तालमेल के लिए एक ज्यादा व्यवस्थित सिस्टम बनाना है.
  • कौन सा मंत्रालय कर सकता है अगले सम्मेलन का आयोजन?
  • सूत्रों के मुताबिक, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ऐसा अगला सम्मेलन आयोजित कर सकती है. इसके बाद पर्यावरण मंत्रालय भी इसी तरह की बैठक आयोजित करने पर विचार कर रहा है. ऐसा बैठकों का फोकस केंद्र-राज्य साझेदारी को मजबूत करने पर है, ताकि सरकारी योजनाओं और विकास कार्यक्रमों का बेहतर और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके.
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  • दो दिन की हुई थी विभागीय बैठक
  • हाल ही में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने 1-2 सितंबर को नई दिल्ली में राज्यों के जल संसाधन मंत्रियों के साथ दो दिन की विभागीय बैठक की. इस बैठक में जल से जुड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स, जल स्रोतों की स्थिरता, ‘जल संचय जन भागीदारी’ और ‘जल जीवन मिशन 2.0’ को लागू करने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई. बैठक के आखिरी सत्र में राज्यों के मंत्रियों ने पीएम मोदी से भी बातचीत की. इस बातचीत में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन भी शामिल थे.
  • क्या होगा फायदा?
  • इस नए मॉडल से केंद्रीय मंत्रियों को राज्य के मंत्रियों से सीधे बात करने का मौका मिलेगा. वे मंजूरी में देरी, पैसे की कमी, जमीन न मिलना, विभागों के बीच तालमेल न होना और काम लागू करने में अंतर जैसी समस्याओं पर खुलकर चर्चा कर सकेंगे. साथ ही, राज्य सरकारें अपने अच्छे तरीके और अनुभव भी साझा कर सकेंगी, जिन्हें दूसरे राज्यों में भी अपनाया जा सकेगा.

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