*200 गुम मोबाइल बरामद,*
*साइबर क्राइम थाना को 25 हजार का इनाम*
*CEIR ने खोले गुम मोबाइलों के राज,*
*45 लाख के फोन स्वामियों को लौटाए;*
*जौनपुर पुलिस अब तक बरामद कर चुकी 1941 मोबाइल*
*जौनपुर।* गुम मोबाइल की तलाश में परेशान लोगों के लिए जौनपुर पुलिस ने बड़ी राहत दी है। साइबर क्राइम थाना/सेल और विभिन्न थानों की साइबर सेल टीम ने CEIR पोर्टल की मदद से 200 गुमशुदा मोबाइल बरामद कर उनके वास्तविक स्वामियों को सौंप दिए। बरामद मोबाइलों की बाजार कीमत करीब 45 लाख रुपये बताई गई है। इस अभियान के साथ जौनपुर पुलिस अब तक 1941 गुम मोबाइल बरामद कर चुकी है, जिनकी कुल कीमत करीब 3 करोड़ 90 लाख रुपये है।
लगातार गुम मोबाइल बरामद करने में उल्लेखनीय भूमिका निभाने वाली साइबर क्राइम थाना टीम के कार्य की पुलिस अधीक्षक ने सराहना की। टीम को 25 हजार रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की गई है। पुलिस की इस कार्रवाई से मोबाइल गुम होने के बाद उन्हें वापस पाने की उम्मीद भी मजबूत हुई है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कुँवर अनुपम सिंह के निर्देश पर अपर पुलिस अधीक्षक नगर आयुष श्रीवास्तव के निर्देशन तथा सहायक पुलिस अधीक्षक/क्षेत्राधिकारी नगर गोल्डी गुप्ता के पर्यवेक्षण में अभियान चलाया गया। साइबर क्राइम थाना प्रभारी निरीक्षक दिनेश कुमार सिंह के नेतृत्व में टीम ने CEIR पोर्टल पर दर्ज शिकायतों के आधार पर मोबाइलों को ट्रेस किया।
पुलिस के मुताबिक मोबाइल जौनपुर के अलावा आजमगढ़, वाराणसी, सुल्तानपुर, प्रयागराज, लखनऊ, कानपुर, बलिया, प्रतापगढ़ और भदोही से बरामद किए गए। वहीं कुछ मोबाइल दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र, झारखंड, बिहार और राजस्थान से भी बरामद हुए। बरामद मोबाइलों में वनप्लस, वीवो, रेडमी, ओप्पो, रियलमी, टेक्नो, पोको, नोकिया और सैमसंग समेत कई प्रमुख कंपनियों के फोन शामिल हैं।
*मोबाइल हाथ में आते ही खिल उठे चेहरे*
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कुँवर अनुपम सिंह ने बरामद मोबाइल उनके वास्तविक स्वामियों को सुपुर्द किए। लंबे इंतजार के बाद मोबाइल वापस मिलने पर लोगों के चेहरे खुशी से खिल उठे। मोबाइल स्वामियों ने जौनपुर पुलिस की कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए पुलिस टीम का आभार जताया।
पुलिस ने अपील की कि मोबाइल गुम होते ही पहले थाने में गुमशुदगी दर्ज कराएं और इसके बाद CEIR पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 पर शिकायत करें अथवा cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराएं। जरूरत पड़ने पर नजदीकी थाने की साइबर हेल्पडेस्क से भी संपर्क किया जा सकता है।
पुलिस ने नागरिकों को संदिग्ध मैसेज, लिंक और QR कोड से सावधान रहने की सलाह दी है। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर रिमोट एक्सेस एप इंस्टॉल न करें और बैंकिंग अथवा व्यक्तिगत जानकारी किसी से साझा न करें। पुलिस ने स्पष्ट किया कि पैसे प्राप्त करने के लिए कभी भी UPI PIN या MPIN डालने की जरूरत नहीं होती।
जौनपुर पुलिस का संदेश साफ है—साइबर अपराध से बचाव का सबसे बड़ा हथियार जागरूकता और सतर्कता है।
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