संतराज यादव -
बाल विकास विभाग, गोरखपुर एवं प्रोग्रेसिव फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को जंगल कौड़िया विकास खंड के ग्राम लक्ष्मीपुर , सरहरी ,बुधेली, भंभौर,एवं बिस्तौली में मातृ एवं शिशु पोषण जागरूकता पर आधारित नुक्कड़ नाटकों का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन बाल विकाश परियोजना अधिकारी रुक्मणि पांडे ने किया।उन्होंने कहा कि हमें कुपोषित बच्चों के खान पान पर विशेष ध्यान रखना होगा।हमें कुपोषित बच्चों का घर पर ही प्रबंधन करना है।बच्चों को खाने में कम से कम ४ खाद्यसमूह शामिल होने चाहिए।बच्चों को दूध दूध से बने पदार्थ अवश्य देने चाहिए।उन्होंने प्रोग्रेसिव फाउंडेशन के पहल की सराहना किया।कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण समुदाय को मातृ पोषण, नवजात एवं शिशु देखभाल, स्तनपान, पूरक आहार, सीएमएएम (CMAM) कार्यक्रम तथा संभव अभियान के प्रति जागरूक करना था।
“सही पोषण – स्वस्थ बचपन” शीर्षक से प्रस्तुत किए गए नुक्कड़ नाटक में कलाकारों ने गीत, संवाद, अभिनय एवं व्यंग्य के माध्यम से पोषण और स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण संदेशों को सहज एवं प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। कार्यक्रम ने ग्रामीणों को न केवल मनोरंजन प्रदान किया, बल्कि उन्हें मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होने के लिए प्रेरित भी किया।
नाटक के माध्यम से गर्भवती महिलाओं की समुचित देखभाल, संतुलित एवं अतिरिक्त भोजन, पर्याप्त विश्राम, नियमित प्रसवपूर्व जांच, आयरन एवं कैल्शियम की गोलियों का सेवन, एमसीपी कार्ड का महत्व तथा संस्थागत एवं सुरक्षित प्रसव पर विशेष बल दिया गया।
नवजात शिशु की देखभाल के अंतर्गत जन्म के तुरंत बाद माँ का पहला गाढ़ा पीला दूध (कोलोस्ट्रम) पिलाने, शहद, घुट्टी अथवा पानी न देने तथा जन्म से छह माह तक केवल माँ का दूध ही शिशु के लिए सर्वोत्तम आहार होने का संदेश दिया गया। छह माह पूर्ण होने के बाद माँ के दूध के साथ खिचड़ी, दाल, दलिया, मौसमी फल एवं अन्य पौष्टिक पूरक आहार शुरू करने तथा बच्चे को अलग कटोरी एवं चम्मच से प्यारपूर्वक भोजन कराने की आदत विकसित करने पर भी जोर दिया गया।
नाटक में कुपोषण की पहचान एवं प्रबंधन पर विस्तार से जानकारी दी गई। बच्चों का नियमित वजन एवं लंबाई मापन, भूख की जांच, गंभीर कुपोषित बच्चों का पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) में निःशुल्क उपचार, घर पर पौष्टिक भोजन तथा नियमित फॉलो-अप के महत्व को भी प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। साथ ही समय पर टीकाकरण, बच्चों के मानसिक विकास हेतु उनसे संवाद, खेल एवं स्नेहपूर्ण वातावरण की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला गया।
नाटक के समापन पर कलाकारों ने सामूहिक रूप से संदेश दिया—
“सही पोषण, देश रोशन — स्वस्थ माँ और स्वस्थ बचपन, यही हमारा संकल्प।”
इस अवसर पर सीडीपीओ , रुक्मणी पांडे आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पुष्पा दुबे, सिद्धेश्वरी त्रिपाठी, सुश्री कौशल्या देवी, सुधा देवी एवं अन्य आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता, अशुतोष मिश्रा (प्रोग्रेसिव फाउंडेशन) तथा अशोक पांडेय सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं ग्रामीण उपस्थित रहे।
स्थानीय ग्रामीणों ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के जन-जागरूकता कार्यक्रमों से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण एवं सरकारी योजनाओं की जानकारी सरल, रोचक एवं प्रभावी ढंग से प्राप्त होती है, जिससे व्यवहार परिवर्तन को बढ़ावा मिलता है।
बाल विकास परियोजना अधिकारी रुक्मणी पांडे ने बताया कि निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार यह जागरूकता अभियान 16 से 17 जुलाई, तक जंगल कौड़िया एवं पिपराइच विकास खंड के चयनित ग्रामों में निरंतर आयोजित किया जाएगा, ताकि अधिकाधिक परिवारों तक "सही पोषण – देश रोशन" का संदेश पहुँचाया जा सके। इस अभियान के माध्यम से शासन द्वारा चलाए जा रहे संभव अभियान के संदेश गर्भावस्था से लेकर बाल्यावस्था तक पोषण घर घर तक पहुंचाया जाएगा।
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