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राकेश त्रिपाठी/अब तक न्याय
मदनपुरा गोसदन में लापरवाही से दो गौवंशों की मौत का आरोप, बजरंग दल का उग्र प्रदर्शन; पुलिस की सख्ती से भड़का विवाद, थाना प्रभारी अंकित सिंह फिर निशाने पर!
मदनपुरा गोसदन में लापरवाही से दो गौवंशों की मौत का आरोप, बजरंग दल का उग्र प्रदर्शन; पुलिस की सख्ती से भड़का विवाद, थाना प्रभारी अंकित सिंह फिर निशाने पर!
महराजगंज के मिठौरा ब्लॉक स्थित मदनपुरा गोसदन में दो गौवंशों की संदिग्ध हालात में मौत ने जिले की व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। इस घटना ने न सिर्फ गोसदन प्रबंधन की पोल खोल दी, बल्कि निचलौल थाना प्रभारी अंकित सिंह की कार्यशैली को लेकर भी तीखी बहस छेड़ दी है।
शनिवार को जैसे ही गौवंशों की मौत की खबर फैली, बजरंग दल के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में गोसदन पहुंच गए और जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। कार्यकर्ताओं ने साफ आरोप लगाया कि गोसदन में लंबे समय से भारी लापरवाही, अव्यवस्था और अनदेखी का आलम है, जिसके चलते लगातार गौवंश दम तोड़ रहे हैं—लेकिन जिम्मेदारों पर कार्रवाई शून्य है।
बजरंग दल का वर्ज़न: “यह हत्या है, लापरवाही नहीं!”
बजरंग दल पदाधिकारियों ने प्रशासन पर सीधा हमला बोलते हुए कहा—
“गौवंशों की मौत कोई हादसा नहीं, यह सीधी-सीधी प्रशासनिक लापरवाही की हत्या है।”
“गोसदन में न चारा सही, न पानी, न इलाज—और ऊपर से जिम्मेदार मौन!”
“जब तक दोषियों पर एफआईआर और सख्त कार्रवाई नहीं होगी, आंदोलन और तेज किया जाएगा।”
कार्यकर्ताओं ने यह भी चेतावनी दी कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो जिलेभर में बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा।
जेसीबी से शव हटाने पर भड़का आक्रोश।
मामला तब और गरमा गया जब मृत गौवंशों को हटाने के लिए जेसीबी मशीन बुलाई गई। बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने इसे “अमानवीय और असंवेदनशील” बताते हुए कड़ा विरोध किया। उनका कहना था कि गौवंशों के शवों के साथ इस तरह का व्यवहार धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला है।
“पुलिस ने पार की हदें?”
विवाद के बीच एक वायरल वीडियो ने पूरे मामले को और विस्फोटक बना दिया। आरोप है कि पुलिस ने एक बजरंग दल कार्यकर्ता को जबरन घसीटते हुए हटाया, वायरल वीडियो के अनुसार बजरंग दल का कार्यकर्ता गंभीर आरोप लगाते हुए अंकित सिंह के ऊपर कहा कि भद्दी भद्दी गालिया और कुछ समय तक अगर पुलिस नहीं छोड़ता तो मेरी सांसे रुक जाती। जिससे उसकी हालत बिगड़ गई और सांस लेने में दिक्कत होने लगी।
इस घटना के बाद मौके पर माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया और पुलिस की कार्यशैली पर सवालों की बौछार शुरू हो गई।
“विवादों के थानेदार” पर फिर उंगली
स्थानीय लोगों और संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि थाना प्रभारी अंकित सिंह पहले भी कई विवादों में घिर चुके हैं। आरोपों में शामिल हैं—
जनता से अभद्र व्यवहार
बंद कमरे में धमकी और गाली-गलौज
स्थानांतरण के बावजूद पद पर जमे रहना
ताजा घटना ने इन आरोपों को फिर हवा दे दी है, जिससे उनकी कार्यशैली को लेकर जनाक्रोश खुलकर सामने आ रहा है।
प्रशासन का पक्ष
गोसदन में तैनात पशु चिकित्साधिकारी डॉ. एस.एन. भट्ट के अनुसार—
दो गौवंशों की मौत की पुष्टि हुई है,एक पशु का इलाज जारी है
45 में से 26 गौवंशों को अन्य गौशाला में शिफ्ट किया गया है
प्रशासन का दावा है कि स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन बड़ा सवाल यही है—अगर सब कुछ नियंत्रण में था, तो लगातार मौतें क्यों हो रही हैं?
मदनपुरा गोसदन में गौवंशों की मौत अब सिर्फ एक प्रशासनिक मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह जनभावनाओं, धार्मिक संवेदनाओं और पुलिस की कार्यप्रणाली का बड़ा मुद्दा बन चुका है। बजरंग दल के उग्र रुख और थाना प्रभारी अंकित सिंह पर लग रहे आरोपों ने मामले को और विस्फोटक बना दिया है।
अब सबकी नजर इस पर टिकी है—क्या होगी ठोस कार्रवाई, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?
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राकेश त्रिपाठी/अब तक न्याय
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फतेहगढ़ (फर्रुखाबाद)।
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