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गोरखपुर
आमोद कुमार
बांदा (जसपुरा)। विकास की सड़क अगर तीन महीने भी न टिक पाए, तो सवाल केवल उसकी गुणवत्ता पर नहीं, बल्कि उस पूरी व्यवस्था पर उठता है जो सरकारी धन से विकास का दावा करती है। विकास खंड जसपुरा के मड़ौली कला गांव में विधायक निधि से बनी सीसी रोड पहली ही बरसात से पहले उखड़ने लगी है। सड़क की परतें बिखर रही हैं, गिट्टियां बाहर निकल आई हैं और जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं। अब ग्रामीण खुलकर कह रहे हैं कि यह सड़क नहीं, बल्कि सरकारी धन के दुरुपयोग की एक कमजोर इबारत है, जो पहली बारिश के इंतजार में ही बिखरने लगी।
ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में भारी अनियमितता का आरोप लगाते हुए संबंधित ठेकेदार और जूनियर इंजीनियर (जेई) की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि निर्माण मानकों के अनुरूप हुआ होता, तो सड़क इतनी जल्दी दम नहीं तोड़ती। आरोप है कि घटिया सामग्री और कम मात्रा में मसाले का इस्तेमाल कर गुणवत्ता से समझौता किया गया।मामले की जानकारी मिलने पर समाजवादी पार्टी के नेता पुष्पेंद्र सिंह चुनाले गांव पहुंचे और सड़क का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये विकास कार्यों के नाम पर खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन यदि सड़क तीन माह में ही उखड़ जाए तो यह केवल तकनीकी खामी नहीं, बल्कि व्यवस्था की जवाबदेही का प्रश्न है।
ग्रामीणों का दर्द केवल टूटी सड़क का नहीं है, बल्कि उस उपेक्षा का भी है, जिसकी शिकायत वे निर्माण के समय से करते रहे। उनका आरोप है कि जब गुणवत्ता पर सवाल उठाए गए तो उनकी बात को नजरअंदाज कर दिया गया। यहां तक कि कथित तौर पर यह तक कहा गया कि "काम हमारे हिसाब से होगा, ज्यादा नेतागिरी करोगे तो काम बंद कर देंगे।" यह सड़क केवल सीमेंट और गिट्टी की नहीं थी, बल्कि ग्रामीणों की उम्मीदों की सड़क थी। लेकिन जब उम्मीदों की नींव में ईमानदारी की जगह लापरवाही और जवाबदेही की जगह मनमानी भर दी जाए, तो विकास की इमारत ज्यादा दिन खड़ी नहीं रहती।अब गांव में एक ही सवाल गूंज रहा है—यदि विधायक निधि से बनी सड़क तीन महीने में उखड़ सकती है, तो फिर विकास की गुणवत्ता की निगरानी कौन कर रहा है? क्या जनता केवल उद्घाटन पट्टिकाएं देखने के लिए है और सड़कें टूटने के बाद जांच की औपचारिकता निभाई जाएगी? पुष्पेंद्र सिंह चुनाले सहित ग्रामीणों बाबू सिंह चौहान, फूल सिंह, शंभू सिंह, अन्नू सिंह, रवि सिंह, राधेश्याम सिंह, लवकुश सिंह, बड़कू निषाद, अन्नू खान और गोलू सिंह ने जिला प्रशासन से मांग की है कि सड़क निर्माण की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष तकनीकी जांच (टीएससी) कराई जाए तथा दोषी ठेकेदार और अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करते हुए सड़क का पुनर्निर्माण कराया जाए।क्योंकि विकास की असली पहचान उद्घाटन के फीते से नहीं, बल्कि उसकी मजबूती और जनता के विश्वास से होती है।
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आमोद कुमार
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