आमोद कुमार



आमोद कुमार

बांदा। शहर की स्वच्छता केवल सफाई कर्मचारियों के भरोसे नहीं छोड़ी जा सकती। कूड़े के सही निस्तारण की पहली जिम्मेदारी यदि कहीं है तो वह घर की दहलीज पर है। जब नागरिक अपने स्तर पर कूड़े को अलग करना और उसका उचित निस्तारण शुरू करेंगे, तभी स्वच्छ शहर की तस्वीर धरातल पर बदलेगी। इसी उद्देश्य से स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 एवं स्वच्छता जागरूकता अभियान के तहत स्वराज कॉलोनी में महिलाओं के लिए स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
नगर पालिका परिषद की ओर से एस.डी. सेवा संस्थान के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में महिलाओं को घरों से निकलने वाले गीले और सूखे कूड़े को स्रोत स्तर पर ही अलग-अलग रखने के लिए प्रेरित किया गया। बताया गया कि कूड़े का प्रारंभिक स्तर पर पृथक्करण होने से उसके निस्तारण और पुनर्चक्रण की प्रक्रिया आसान होती है तथा सफाई व्यवस्था अधिक प्रभावी बनती है।कार्यक्रम में सिंगल यूज प्लास्टिक के बहिष्कार पर विशेष जोर दिया गया। महिलाओं से प्लास्टिक की थैलियों और अन्य एकल-उपयोग वाली प्लास्टिक वस्तुओं के स्थान पर कपड़े के थैले तथा पर्यावरण अनुकूल विकल्प अपनाने की अपील की गई। कहा गया कि कुछ क्षणों की सुविधा के लिए इस्तेमाल होने वाली प्लास्टिक लंबे समय तक पर्यावरण के लिए चुनौती बनी रहती है। ऐसे में इसका इस्तेमाल कम करना केवल प्रशासन की नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।महिलाओं को सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा न फेंकने, निर्धारित कूड़ेदान का इस्तेमाल करने तथा घर के साथ आसपास के क्षेत्र को भी स्वच्छ रखने के लिए प्रेरित किया गया। उनसे कहा गया कि वे स्वयं स्वच्छता के नियमों का पालन करने के साथ परिवार और पड़ोस के लोगों को भी जागरूक करें।
कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि स्वच्छता किसी अभियान या सर्वेक्षण तक सीमित रहने वाली गतिविधि नहीं, बल्कि दैनिक जीवन की आदत बननी चाहिए। नागरिक जब अपने कूड़े की जिम्मेदारी स्वयं स्वीकार करेंगे, तभी सफाई व्यवस्था का वास्तविक असर दिखाई देगा और स्वच्छ शहर का लक्ष्य सार्थक होगा।इस दौरान महिलाओं ने घरों और आसपास स्वच्छता बनाए रखने, कूड़े का उचित निस्तारण करने तथा पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाने का संकल्प लिया।कार्यक्रम का उद्देश्य ‘स्वच्छ बांदा-सुंदर बांदा’ अभियान में नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने के साथ स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति ऐसी स्थायी जागरूकता विकसित करना रहा, जो किसी अभियान की समाप्ति के साथ खत्म न हो, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की आदतों में दिखाई दे।यदि इसे और तेज, व्यंग्यात्मक और सवाल उठाने वाली स्थानीय रिपोर्टिंग शैली में चाहिए, तो उसका संस्करण भी बनाया जा सकता है।

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