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बांदा/तिंदवारी/नई दिल्ली/वर्जीनिया (अमेरिका)।
बांदा/तिंदवारी/नई दिल्ली/वर्जीनिया (अमेरिका)।
बांदा ज़िले के छोटे कस्बे तिंदवारी से निकलकर वैश्विक अंतरिक्ष जगत में पहचान बनाने वाले वैज्ञानिक डॉ. अशोक प्रजापति ने एक बार फिर भारत का नाम रोशन किया है। अमेरिका के वर्जीनिया में आयोजित प्रतिष्ठित NASA 2026 core Flight System (cFS) कॉन्फ्रेंस की अध्यक्षता कर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपना लोहा मनवाया।
तिंदवारी निवासी चुनुबाद प्रजापति के पुत्र डॉ. प्रजापति की यह उपलब्धि पूरे बुंदेलखंड और देश के लिए गर्व का विषय बनी हुई है।दुनिया के 360 वैज्ञानिक हुए शामिल तीन दिवसीय इस कॉन्फ्रेंस में दुनिया भर के लगभग 360 वैज्ञानिक, इंजीनियर और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हुए। 120 से अधिक प्रमुख संस्थानों की भागीदारी ने इस आयोजन को खास बना दिया।
इस मौके पर European Space Agency,स्वीडिश स्पेस एजेंसी, Boeing,Northrop Grumman,
Lockheed Martin
जैसी नामी एयरोस्पेस कंपनियाँ औरUniversity of California, Berkeley,
University of Maryland
जैसे विश्व-स्तरीय विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
अंतरिक्ष यान का “ब्रेन”—cFS पर केंद्रित सम्मेलन
यह वैश्विक आयोजन नासा के core Flight System (cFS) पर आधारित था, जिसे अंतरिक्ष यान का “दिमाग” कहा जाता है। यही तकनीक अंतरिक्ष यान को दिशा देती है, कमांड समझती है और मिशन के दौरान महत्वपूर्ण निर्णय लेने में सहायता करती है।चंद्रमा और मंगल मिशनों में cFS की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है।नासा की वरिष्ठ नेता ने कहा—भविष्य की कुंजी है सुरक्षित सॉफ्टवेयर सम्मेलन में नासा की वरिष्ठ वैज्ञानिक केसी स्वेल्स ने कहा कि भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों की सफलता विश्वसनीय फ्लाइट सॉफ्टवेयर पर निर्भर करेगी।उन्होंने मानवता की चंद्रमा और मंगल यात्रा में cFS सिस्टम को निर्णायक बताया।“स्पेस के सेलिब्रिटी” बने डॉ. प्रजापति कॉन्फ्रेंस के दौरान डॉ. प्रजापति से मिलने के लिए युवाओं और वैज्ञानिकों की भीड़ उमड़ पड़ी।
उनके शोध, नेतृत्व क्षमता और प्रेरक व्यक्तित्व के कारण उन्हें “स्पेस के सेलिब्रिटी” तक कहा जाता है।तिंदवारी से विश्व मंच तक—प्रेरणा की कहानी अपनी उपलब्धि पर बोलते हुए डॉ. प्रजापति ने कहा—“बड़े अंतरिक्ष मिशन उद्योग, विश्वविद्यालय और सरकार के संयुक्त प्रयासों से ही सफल हो सकते हैं।”साधारण परिवार में जन्मे डॉ. प्रजापति ने संघर्षों के बीच अपनी राह बनाई। आज वे मिशन-क्रिटिकल फ्लाइट सॉफ्टवेयर के शीर्ष विशेषज्ञों में गिने जाते हैं।देश का गौरव, युवाओं के लिए प्रेरणाडॉ. प्रजापति की सफलता यह साबित करती है कि
प्रतिभा न शहर देखती है न परिस्थिति—बस मेहनत और सकारात्मक सोच चाहिए।
तिंदवारी का यह बेटा आज अंतरिक्ष जगत के आकाश में भारत का चमकता सितारा बन चुका है।
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