ठेका कंपनी के श्रमिक बोले– न्याय मांगने गए थे, बेइज्जती और जेल की धमकी मिली


  1. बारा, प्रयागराज। यमुनानगर क्षेत्र के बारा तहसील अंतर्गत लोहगरा राष्ट्रीय ताप विद्युत परियोजना में कार्यरत एमएस क्लासिक सिग्नल कंपनी के श्रमिक जब अपनी वाजिब मांगों को लेकर रेल भवन पहुंचे, तो वहां हालात बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हो गए। श्रमिकों का कहना है कि वे पद के अनुसार वेतन न मिलने और फरवरी माह में प्रति कर्मचारी अतिरिक्त पंद्रह सौ रुपये की वेतन कटौती को लेकर परियोजना प्रबंधन से बात करने गए थे, लेकिन उन्हें समाधान के बजाय अपमान और धमकी का सामना करना पड़ा। श्रमिकों के अनुसार, वे परियोजना की सहायक विद्युत उत्पादन कंपनी के रेल भवन प्रभारी ज्ञान प्रकाश कुशवाहा से मिलने पहुंचे थे। आरोप है कि जैसे ही श्रमिकों ने वेतन विसंगति और कटौती पर सवाल उठाया, तो अधिकारी ने उनकी बात सुनने के बजाय अभद्र व्यवहार किया। श्रमिकों का कहना है कि अधिकारी ने अपमानजनक और मानहानिकारक शब्दों का प्रयोग करते हुए कहा कि “तुम लोग इसी लायक हो, कुछ नहीं बढ़ेगा और कटा हुआ पैसा भी नहीं मिलेगा।” इस कथन से श्रमिकों में भारी आक्रोश फैल गया। यहीं नहीं, श्रमिकों ने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारी ने उन्हें डराने की नीयत से पुलिस और सुरक्षा बल बुलाने की धमकी दी। कहा गया कि यदि वे दोबारा अपनी मांगों को लेकर आए, तो सुरक्षा कर्मियों से उठवाकर उनके खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज कराकर जेल भिजवा दिया जाएगा। श्रमिकों का कहना है कि इस तरह की धमकी न केवल अमानवीय है, बल्कि कानून का खुला उल्लंघन भी है। रेल भवन के प्रभारी होने के बावजूद अधिकारी द्वारा जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए इसे ठेकेदार का मामला बताना श्रमिकों को और आहत कर गया। श्रमिकों का कहना है कि वे न्याय की उम्मीद लेकर गए थे, न कि अपमान सहने। श्रमिकों ने बताया कि यह समस्या केवल वर्तमान वेतन कटौती तक सीमित नहीं है, बल्कि बीते पांच वर्षों से लगातार उनके अधिकारों का हनन किया जा रहा है। उनका आरोप है कि उन्हें पद के अनुसार वेतन नहीं दिया जाता। अब तक उन्हें नियुक्ति पत्र या प्रस्ताव पत्र भी नहीं दिया गया है। मेडिकल परीक्षण का बहाना बनाकर कई श्रमिकों को अयोग्य घोषित कर कंपनी से बाहर कर दिया गया। उन्हें न तो उपदान का लाभ मिला और न ही कर्मचारी राज्य बीमा योजना का लाभ दिया गया।इसके साथ ही वर्ष दो हजार बीस से दो हजार चौबीस तक का बोनस,अर्जित अवकाश, आकस्मिक अवकाश, राष्ट्रीय अवकाश और अतिरिक्त कार्य का भुगतान भी अब तक लंबित है। श्रमिकों का कहना है कि श्रम कानून और कारखाना अधिनियम के तहत मजदूरों को मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। प्रत्येक कर्मचारी को स्वस्थ और सुरक्षित जीवन जीने का अधिकार है, लेकिन यहां इस अधिकार को लगातार कुचला जा रहा है। श्रमिकों ने आरोप लगाया कि बोनस भुगतान अधिनियम, वेतन भुगतान अधिनियम, न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, औद्योगिक विवाद अधिनियम और कारखाना अधिनियम का सीधा उल्लंघन किया जा रहा है। मांग करने पर धमकी देना और झूठे मुकदमे में फंसाने की चेतावनी देना कानून के खिलाफ है। गौरतलब है कि यह मामला बारा विद्युत परियोजना शंकरगढ़ प्रयागराज की सह ठेका कंपनी एमएस क्लासिक सिग्नल से जुड़ा है, जो रेलवे ट्रैक रखरखाव और संकेत एवं दूरसंचार विभाग में कार्य कर रही है। श्रमिकों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि उन्हें उनका हक और सम्मान मिल सके।

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