ओढगी तरहार की ज़मीनी सच्चाई: महिला प्रधान सिर्फ नाम की, कामकाज किसी और के हाथ
गौशाला निरीक्षण पर उठे गंभीर सवाल, काग़ज़ी दावों और ज़मीनी हालात में बड़ा अंतर
प्रयागराज। यमुनानगर क्षेत्र के बारा तहसील अंतर्गत शंकरगढ़ एनएसके इंटरमीडिएट कॉलेज लाइन पर
शंकरगढ़, प्रयागराज। यमुनानगर क्षेत्र के बारा तहसील अंतर्गत शंकरगढ़ एनएसके इंटरमीडिएट कॉलेज लाइन पर स्थित एक स्कूल के क्लासरूम का वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है। वायरल वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि छात्राएं क्लासरूम के अंदर फुहार और अश्लील भोजपुरी गानों पर रील बनाती नजर आ रही हैं। जहां एक ओर विद्यालय को शिक्षा का मंदिर कहा जाता है, वहीं दूसरी ओर उसी मंदिर के गर्भगृह—यानी क्लासरूम—में मोबाइल कैमरे के सामने छात्राओं का इस तरह का कंटेंट बनाना कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। सवाल यह नहीं है कि रील बनी, सवाल यह है कि रील कहां और किसकी निगरानी में बनी? वीडियो में न तो किसी शिक्षक की उपस्थिति दिखती है और न ही किसी जिम्मेदार की रोक- टोक। इससे यह संदेह और गहराता है कि क्या विद्यालय प्रबंधन की जानकारी में यह सब चल रहा था,या फिर जानबूझकर आंखें मूंद ली गईं? सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्लासरूम में मोबाइल फोन कैसे पहुंचे, किसने अनुमति दी और किसके संरक्षण में यह हरकत अंजाम दी गई? इस पूरे मामले में विद्यालय के प्रधानाचार्य, प्रबंधन समिति, संबंधित शिक्षकगण, साथ ही जिला विद्यालय निरीक्षक DIOS, बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) और जिला प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। यदि यह वीडियो विद्यालय समय के दौरान का है, तो यह सीधे-सीधे शैक्षणिक अनुशासन का उल्लंघन है। वायरल वीडियो ने न केवल अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है, बल्कि पूरे शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लगा दिया है। क्या स्कूलों में पढ़ाई से ज्यादा अब रील कल्चर को बढ़ावा दिया जा रहा है? क्या यह सब किसी के इशारे पर हुआ, या फिर सिस्टम की लापरवाही का नतीजा है? फिलहाल, मामले को लेकर कोतवाली पुलिस, साइबर सेल और शिक्षा विभाग की चुप्पी भी कई संदेहों को जन्म दे रही है। अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस वायरल वीडियो को गंभीरता से लेकर दोषियों पर कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दफन कर दिया जाएगा। शिक्षा जैसे पवित्र क्षेत्र में इस तरह की अश्लील गतिविधियां न सिर्फ शर्मनाक हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ी के भविष्य के साथ भी सीधा खिलवाड़ हैं। विद्यालय प्रबंधन को अब जवाब देना ही होगा।
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गौशाला निरीक्षण पर उठे गंभीर सवाल, काग़ज़ी दावों और ज़मीनी हालात में बड़ा अंतर
महमूदाबाद (सीतापुर)। मौलाना आजाद इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमैनिटीज साइंस एण्ड टेक्नोलॉजी के असिस्टेंट प्रोफेसर एवं अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष डाॅ. कौशलेन्द्र प्रताप मिश्र ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग
नकेल कसने के लिए पुलिस और प्रशासन लगातार सख्त
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