प्रदेश के 74 जनपदों में जाएंगे संविधान रथ लखनऊ से 75 संविधान रथ यात्राओं का शुभारंभ लखनऊ, 28 जनवरी 2026। विगत वर्षों की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस वर्ष भी गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर डॉ० आंबेडकर संवैधानिक महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश कुमार सिद्धार्थ के नेतृत्व में सामाजिक संगठन राष


प्रदेश के 74 जनपदों में जाएंगे संविधान रथ लखनऊ से 75 संविधान रथ यात्राओं का शुभारंभ

लखनऊ, 28 जनवरी 2026। विगत वर्षों की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस वर्ष भी गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर डॉ० आंबेडकर संवैधानिक महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश कुमार सिद्धार्थ के नेतृत्व में सामाजिक संगठन राष्ट्रीय भागीदारी आंदोलन एवं सेवा स्तंभ द्वारा भव्य संविधान यात्रा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर डॉ० आंबेडकर भवन, विधानसभा के सामने से प्रदेश के 74 जनपदों के लिए 75 संविधान रथों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।

संविधान रथ यात्राओं का शुभारंभ मा० लोकपाल लखनऊ डॉ० आर० आर० जैसवार एवं मा० पी०सी० कुरील द्वारा संयुक्त रूप से तिरंगा झंडा दिखाकर किया गया। इस अवसर पर पूरा वातावरण संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय के नारों से गूंज उठा। रथों पर भारत के संविधान की प्रस्तावना, बाबा साहब डॉ० भीमराव आंबेडकर के विचार, मौलिक अधिकार, कर्तव्य और सामाजिक समरसता से जुड़े संदेश अंकित थे, जो आम जनमानस को संविधान के मूल भाव से जोड़ने का कार्य करेंगे।

संविधान रथ यात्रा संयोजक मंडल के संयोजक श्री रामचन्द्र पटेल ने जानकारी देते हुए बताया कि 26 जनवरी 1950 को आज़ाद भारत में संविधान लागू हुआ था। संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि भारत की आत्मा है, जो देश के प्रत्येक नागरिक को समानता, स्वतंत्रता, बंधुत्व और न्याय की गारंटी देता है। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है कि संविधान के प्रति आम नागरिकों में व्यापक जागरूकता बढ़े, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में, जहां अब भी संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों की पूरी जानकारी नहीं पहुंच पाई है। इसी उद्देश्य से प्रदेश के प्रत्येक जिले में एक-एक संविधान रथ भेजा जा रहा है, जो गांव-गांव भ्रमण कर संविधान का संदेश जन-जन तक पहुंचाएगा।

डॉ० आंबेडकर संवैधानिक महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश कुमार सिद्धार्थ ने अपने संबोधन में कहा कि भारत का संविधान दुनिया का सबसे समावेशी और लोकतांत्रिक संविधान है। यह संविधान देश के करोड़ों वंचित, शोषित, पिछड़े, अल्पसंख्यक और महिलाओं के अधिकारों का सुरक्षा कवच है। बाबा साहब डॉ० भीमराव आंबेडकर ने संविधान के माध्यम से ऐसे भारत की परिकल्पना की, जहां व्यक्ति की पहचान उसके जन्म से नहीं, बल्कि उसके कर्म, योग्यता और मानवता से हो।

राजेश कुमार सिद्धार्थ ने कहा कि संविधान केवल पुस्तकों या न्यायालयों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि यह आम नागरिक के दैनिक जीवन का हिस्सा बने। जब तक आम आदमी अपने संवैधानिक अधिकारों और कर्तव्यों को नहीं समझेगा, तब तक सच्चे लोकतंत्र की स्थापना संभव नहीं है। उन्होंने युवाओं से विशेष रूप से आह्वान किया कि वे संविधान को पढ़ें, समझें और उसकी रक्षा के लिए आगे आएं, क्योंकि युवा ही देश के भविष्य के निर्माता हैं।

मा० पी०सी० कुरील ने कहा कि संविधान रथ यात्रा केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक वैचारिक आंदोलन है। आज समाज में व्याप्त असमानता, अन्याय, हिंसा और नफरत को समाप्त करने का एकमात्र मार्ग संविधान

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