गोंडा। ठंड से मुश्किल बढ़ गई है। तापमान में गिरावट से शरीर में खून की नसें सिकुड़ रही हैं। संकरी नसों में रक्त के प्रवाह के लिए हृदय को अधिक जोर लगाना पड़ रहा है, जिससे बीपी बढ़ रहा है। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध बाबू ईश्वर शरण चिकित्सालय में सिरदर्द, दिल की धड़कन बढ़ने, घबराहट और सांस फूलने ज


गोंडा। ठंड से मुश्किल बढ़ गई है। तापमान में गिरावट से शरीर में खून की नसें सिकुड़ रही हैं। संकरी नसों में रक्त के प्रवाह के लिए हृदय को अधिक जोर लगाना पड़ रहा है, जिससे बीपी बढ़ रहा है। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध बाबू ईश्वर शरण चिकित्सालय में सिरदर्द, दिल की धड़कन बढ़ने, घबराहट और सांस फूलने जैसे लक्षणों वाले मरीज उपचार को पहुंच रहे हैं। मेडिकल कॉलेज सहित अस्पतालों की ओपीडी में सामान्य दिनों की तुलना में बीपी के मरीज बढ़ गए हैं। दो दिनों में सांस व हृदयाघात से तीन भर्ती मरीजों की मौत हो गई है। मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के सहायक आचार्य डॉ. एजाज अहमद ने बताया कि सामान्य दिनों की तुलना में इस समय ब्लड प्रेशर की समस्या बढ़ गई है, जो पहले से बीपी के मरीज हैं। वह इस मौसम में विशेष सावधानी बरतें।हर दिन बीपी चेक करते रहे। दवाएं समय से लें। ठंड में जिस तरह से प्लास्टिक की नली सिकुड़ जाती है ठीक वैसे ही शरीर के अंदर खून की नसों में सिकुड़न हो जाती है। जिससे रक्त प्रवाह के लिए दिल को अधिक जोर लगाना पड़ता है और बीपी बढ़ जाता है। बीपी बढ़ने से दिल, दिमाग, गुर्दे और फेफड़े सभी प्रभावित होते हैं। हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक के मामले इन दिनों इसी वजह से बढ़ रहे हैं।

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