क्षेत्र के सबसे पौराणिक और आस्था केंद्र माने जाने वाले रोहनिया स्थित गौरी-


क्षेत्र के सबसे पौराणिक और आस्था केंद्र माने जाने वाले रोहनिया स्थित गौरी-शंकरन शिव मंदिर से बीती रात करीब 5 क्विंटल वज़न के विशाल घंटों की चोरी होने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। सदियों पुराना यह मंदिर न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि स्थानीय लोगों की आस्था और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक भी है। मंदिर के गर्भगृह के बाहर स्थापित ये घंटे वर्षों से यहां की पहचान थे, लेकिन बीते 24 घंटों में अज्ञात चोर इन्हें आसानी से उखाड़कर ले जाने में सफल रहे। सुबह जब पुजारी और श्रद्धालु मंदिर पहुंचे तो घटना का खुलासा हुआ मामले की सूचना पुलिस को दी गई, जिसके बाद ऊँचाहार कोतवाली पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी। फॉरेंसिक टीम भी बुलाई गई है, जिसने साक्ष्य जुटाए हैं। लेकिन चोरी की गंभीरता और मंदिर की पौराणिक प्रतिष्ठा को देखते हुए जनता पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाने लगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इतने बड़े और भारी घंटों को चोरी करना साधारण बात नहीं, इसके लिए वाहन, समय और पूर्व-नियोजन की आवश्यकता होती है, फिर भी चोरों का कोई सुराग न मिलना पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। इस घटना के बाद लोगों में नाराज़गी और अधिक बढ़ गई है क्योंकि ऊँचाहार क्षेत्र में पिछले कुछ महीनों में कई बड़ी चोरियाँ हुईं, लेकिन उनमें से एक भी मामले का प्रभावी खुलासा नहीं हो पाया। चाहे गोकना स्थित राधा कृष्ण की अष्टधातु की मूर्ति हो या एनटीपीसी गेट नंबर 2 पर हुई चोरी, हर बार पुलिस की जांच ठंडे बस्ते में चली गई और चोर पुलिस की पकड़ से बाहर ही रहे। इन मामलों में लगातार विफलता ने पुलिस की छवि को गंभीर रूप से प्रभावित किया है अब इस नई चोरी ने न केवल पुलिस के लिए चुनौती खड़ी कर दी है बल्कि श्रद्धालुओं के लिए गहरा सदमा भी पैदा किया है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि अगर मंदिर भी सुरक्षित नहीं, तो आम जनता कैसे सुरक्षित रहेगी? लगातार होने वाली वारदातों ने इलाके की सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। मंदिर के बड़े और भारी घंटों को चोरी करना आसान काम नहीं। पुलिस को शुरुआती जांच में अनुमान है कि चोरों ने रात में मंदिर के पीछे की झाड़ियों की तरफ से प्रवेश किया होगा। घंटों को उखाड़ने के लिए भारी औजार, वाहन और चार–पांच लोगों की आवश्यकता पड़ती है। सवाल यह भी है कि इतनी बड़ी गतिविधि के दौरान किसी ने आवाज़ क्यों नहीं सुनी? क्या चोर इलाके से परिचित थे? क्या किसी ने उन्हें मदद की? क्या मौके पर कोई लुकआउट था? इस तरह के कई प्रश्न जांच का हिस्सा हैं, परंतु अब तक कोई पुख्ता सुराग सामने नहीं आया है। स्थानीय निवासियों और मंदिर समिति के सदस्यों का कहना है कि यह सिर्फ चोरी नहीं, बल्कि धार्मिक भावना पर सीधा प्रहार है। ग्रामीणों ने पुलिस की ढीली कार्रवाई पर भी नाराजगी जताई। कई लोगों ने कहा कि ऊँचाहार क्षेत्र में गश्त बढ़ाने की लगातार मांग की जा रही थी, लेकिन पुलिस ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। रात में कई इलाकों में पुलिस की उपस्थिति बिल्कुल नगण्य रहती है, जिसका फायदा अपराधी उठा रहे हैं। लोगों का कहना है कि अगर पुलिस की 24 घंटे सक्रिय पेट्रोलिंग और सीसीटीवी चेकिंग व्यवस्था होती तो चोरों के लिए इतनी बड़ी चोरी को अंजाम देना संभव नहीं होता। "जब मंदिर तक असुरक्षित है, तो बाकी जगहों की सुरक्षा तो भगवान भरोसे ही है" — यह बयान स्थानीय नागरिकों की पीड़ा को दर्शाता है। घटना के बाद प्रशासन हरकत में आया है। पुलिस अधिकारियों ने कहा है कि यह मामला अत्यंत गंभीर है और जल्द ही चोरों को गिरफ्तार किया जाएगा। आसपास की सड़कों पर लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं तथा संदिग्ध वाहनों की तलाश की जा रही है। पुलिस का दावा है कि टीमों को आसपास के जिलों में भी अलर्ट कर दिया गया है। लेकिन जनता का भरोसा तभी मजबूत होगा जब पुलिस इन चोरियों का खुलासा कर वास्तविक कार्रवाई करेगी। लोगों का कहना है कि सिर्फ आश्वासन से नहीं, परिणाम से विश्वास बनता है। गौरी-शंकरन मंदिर पीढ़ियों से लोगों की आस्था और भक्ति का प्रमुख स्थल रहा है। यहां हर सोमवार और शिवरात्रि पर हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे मंदिर में चोरी होना न केवल धार्मिक अपमान है, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था की एक बड़ी चूक भी है। श्रद्धालुओं ने प्रशासन से मंदिरों की सुरक्षा बढ़ाने, सीसीटीवी लगाने और रात में पुलिस पहरेदारी मजबूत करने की मांग की है। 5 क्विंटल घंटों की चोरी कोई साधारण वारदात नहीं। इस मामले ने ऊँचाहार पुलिस की दक्षता और प्रतिबद्धता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाया है। जनता अब पुलिस की जांच पर निगाहें टिकाए बैठी है और यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि—क्या पुलिस इस चोरी का खुलासा कर चोरों को पकड़ पाएगी
या यह मामला भी पहले की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा? अभी पूरा क्षेत्र सदमे, आक्रोश और इंतजार की स्थिति में है।

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