फतेहपुर में अचानक पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव: मृतक लेखपाल सुधीर कुमार के परिवार से भावुक मुलाकात, प्रशासन पर सख्त निशाना
क्या सरकार समयसीमा बढ़ाएगी?
क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी?
लव सिंह यादव/अब तक न्याय
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के बिंदकी कोतवाली क्षेत्र के खजुआ कस्बे में आज शाम एक ऐसी घटना घटी, जिसने पूरे प्रदेश की राजनीति को हिला दिया। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का अचानक दौरा, बिना किसी पूर्व घोषणा के, मृतक लेखपाल सुधीर कुमार कोरी के घर पर पहुंचा। सुधीर की मौत SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) अभियान के कथित दबाव में आत्महत्या से हुई थी। यह घटना न केवल राजस्व विभाग के कर्मचारियों के बीच आक्रोश का प्रतीक बनी, बल्कि विपक्ष की राजनीतिक रणनीति को भी नई गति दे दी।अखिलेश यादव का यह दौरा मात्र 30 मिनट का था, लेकिन इसके प्रभाव लंबे समय तक चर्चा में रहेंगे। उन्होंने परिवार को न केवल भावुक समर्थन दिया, बल्कि तत्काल 2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता का चेक सौंपा। साथ ही, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग उठाई और लोकसभा में इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाने का ऐलान किया।
घटना का पूरा विवरण: दबाव, धमकी और एक युवा की टूटी जिंदगीसुधीर कुमार कोरी (उम्र 28 वर्ष) फतेहपुर के बिंदकी तहसील में लेखपाल के पद पर तैनात थे। वे SIR अभियान में जुटे हुए थे, जो मतदाता सूची के विशेष संशोधन का हिस्सा है। इस अभियान के तहत उत्तर प्रदेश में करीब 3 करोड़ वोटरों की जांच हो रही है, और समयसीमा की किल्लत ने कर्मचारियों पर भारी दबाव डाल दिया। सुधीर की शादी 29 नवंबर को तय थी मात्र एक दिन बाकी था। लेकिन, छुट्टी की मांग पर उन्हें कथित रूप से कानूनगो संजय कुमार ने घर जाकर धमकाया।
परिवार के अनुसार, संजय ने कहा, "काम नहीं करोगे तो नौकरी खत्म हो जाएगी।" इस दबाव में सुधीर ने 26 नवंबर की रात घर में फांसी लगा ली।परिवार की जुबानी: सुधीर की मां (राधा देवी) ने रोते हुए बताया, "बेटा शादी की तैयारियों में व्यस्त था। छुट्टी मांगी तो अधिकारी घर आ धमके। सुधीर ने कहा था, मां, सब ठीक हो जाएगा। लेकिन रात को वह चला गया।" बहन (प्रियंका) ने कहा, "भाई की शादी होनी थी, लेकिन नौकरी बची, भाई चला गया।"
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आत्महत्या की पुष्टि हुई, लेकिन परिवार अब न्याय की लड़ाई लड़ रहा है।यह मौत अकेली नहीं है। SIR अभियान के दबाव में उत्तर प्रदेश में अब तक 5 से अधिक मौतें हो चुकी हैं गोंडा, लखनऊ, बरेली और फतेहपुर समेत। लेखपाल संघ ने आज प्रदेशव्यापी धरना दिया, जिसमें RO (रिकॉर्ड ऑफिसर) संजय कुमार पर FIR दर्ज करने, SIR पर रोक लगाने और मृतक परिवार को 1 करोड़ मुआवजे की मांग की गई। धरना तीसरे दिन में प्रवेश कर गया, और कई तहसीलों में राजस्व कार्य ठप हो गया।
अखिलेश यादव का दौरा: भावनाओं का सैलाब और सख्त बयानशाम सवा 7 बजे अचानक फतेहपुर पहुंचे अखिलेश यादव ने सुधीर के घर पर पहुंचकर परिवार को गले लगाया। मां और बहन की आंखों में आंसू देख भावुक हो गए। उन्होंने कहा, "पीड़ित परिवार से मैं मिलने आया था। हम इनके दुख में शामिल हैं। मां ने अपना बेटा खोया है, बहन ने अपना भाई खोया है जिसकी शादी होने जा रही थी। यह मौत नहीं, BJP सरकार की लापरवाही का परिणाम है।"
आर्थिक सहायता और वादा: अखिलेश ने परिवार को 2 लाख रुपये का चेक सौंपा। कहा, "परिवार जो तहरीर देगा, हम उनकी कानूनी मदद करेंगे। सरकारी नौकरी की भी मांग करेंगे।"
प्रशासन पर हमला: स्थानीय अधिकारियों को ललकारते हुए बोले, "आप IPS क्यों बनते हैं? संविधान के तहत चलें। आप SDM क्यों बनते हैं? लोगों की सेवा करें।" RO संजय कुमार पर FIR की मांग की, "दोषी अफसरों को बचाने की कोशिश न करें। SDM सहित सभी पर हत्या का मुकदमा दर्ज हो।"
राजनीतिक टिप्पणी: BJP पर तंज कसते हुए कहा, "घुसपैठिए का नारा दिया, घुसपैठियों की बात की लेकिन बिहार में घुसपैठिए कहां मिले?" यह बयान बिहार चुनाव के संदर्भ में था, जहां BJP घुसपैठ के मुद्दे पर सक्रिय है। साथ ही, SIR पर बोले, "यह सर्वे नहीं, अत्याचार है। जल्दबाजी में क्यों SIR करा रही BJP? समय बढ़ाओ, मौतें रुकेंगी।"
अखिलेश ने सभी 1.62 लाख BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) को खुला पत्र लिखा, जिसमें दबाव कम करने की अपील की। उन्होंने लोकसभा में इस मुद्दे को उठाने का वादा किया।
अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया: विपक्ष एकजुट, सत्ताधारी चुप्पीकांग्रेस का साथ: कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने सुधीर के परिवार से मुलाकात की। मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पत्र लिखकर SIR की समयसीमा 3 महीने बढ़ाने की मांग की। कहा, "यह जबरदस्ती थोपा गया SIR है। 5 मौतें हो चुकीं, सरकार और चुनाव आयोग जिम्मेदार।"
लेखपाल संघ: प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, "SDM का नाम FIR में जोड़े बिना कोई काम पर नहीं लौटेगा। यह आत्महत्या नहीं, सिस्टम की हत्या है।"
BJP की चुप्पी: सत्ताधारी दल की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया। हालांकि, सोशल मीडिया पर कुछ BJP समर्थक अखिलेश पर पुराने शासनकाल के अपराधों का हवाला देकर पलटवार कर रहे हैं।
SIR अभियान की पृष्ठभूमि: दबाव का आतंकSIR अभियान 15 नवंबर से शुरू हुआ, जिसकी समयसीमा 27 नवंबर थी। अब इसे बढ़ाने की मांग तेज है। विपक्ष का आरोप है कि BJP विपक्षी वोटरों के नाम काटने की साजिश रच रही है। अखिलेश ने कहा, "SIR के नाम पर राजनीतिक षड्यंत्र हो रहा है।" सपा कार्यकर्ता खुद SIR कराने में जुटे हैं, ताकि प्रक्रिया निष्पक्ष बने।
प्रभाव: राजनीति गर्म, प्रशासन अलर्टअखिलेश के दौरे के बाद फतेहपुर में सुरक्षा बढ़ा दी गई। लेखपालों का धरना जारी है, और मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा पकड़ ली। यह घटना कर्मचारी वर्ग के असंतोष को उजागर कर रही है।
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