ब्यूरो चीफ सुजीत कुमार कानपुर की मूक-बधिर बेटी खुशी गुप्ता के जीवन में आज उम्मीद की ऐसी किरण जली, जिसने पूरे परिवार की तकदीर बदल दी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने की उसकी पाँच साल पुरानी इच्छा आखिरकार पूरी हो गई… और उसके साथ ही खुल गए नए अवसरों के दरवाज़े कानपुर की 20 साल की मूक-ब


ब्यूरो चीफ सुजीत कुमार

 

कानपुर की मूक-बधिर बेटी खुशी गुप्ता के जीवन में आज उम्मीद की ऐसी किरण जली, जिसने पूरे परिवार की तकदीर बदल दी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने की उसकी पाँच साल पुरानी इच्छा आखिरकार पूरी हो गई… और उसके साथ ही खुल गए नए अवसरों के दरवाज़े
कानपुर की 20 साल की मूक-बधिर लड़की खुशी गुप्ता… जिसकी ज़िन्दगी संघर्ष से भरी रही… लेकिन जिसके दिल में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए एक अनोखा स्नेह था।

टीवी पर जब भी योगी आदित्यनाथ को देखती… तुरंत उनकी पेंटिंग बनाने बैठ जाती। पाँच साल में उसने सीएम योगी और प्रधानमंत्री मोदी की दर्जनों तस्वीरें बनाई।

और इन्हीं भावनाओं ने उसे 22 नवंबर को अचानक कानपुर से लखनऊ पहुँचा दिया। बिना बताए घर से निकली खुशी लोक भवन तक तो पहुँच गई… पर मुख्यमंत्री से न मिल पाने का दर्द उसे बाहर ही बैठा रोता छोड़ गया।

VO:
हजरतगंज पुलिस ने उसे संभाला। हाथ से लिखे एक पर्चे में उसने सिर्फ इतना लिखा—
“मुख्यमंत्री से मिलने आई हूँ… मिले बिना नहीं जाऊँगी…”

खबर मीडिया में आई… मामला मुख्यमंत्री तक पहुँचा… और मंगलवार रात परिवार को कॉल आया—
“मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुशी को अपने आवास पर बुलाया है…”

VO:
और फिर बुधवार की सुबह… वह पल आ ही गया।
खुशी अपनी पेंटिंग लेकर सीएम आवास पहुँची… और मुख्यमंत्री ने उसे स्नेहपूर्वक अपने पास बुलाया। पेंटिंग देख उनके चेहरे पर मुस्कान आ गई।


VO:
मुख्यमंत्री ने खुशी की शिक्षा और कौशल विकास की पूरी जिम्मेदारी उठाई।
✔ कानपुर के मूक-बधिर कॉलेज में एडमिशन
✔ पढ़ाई के लिए मोबाइल और टैबलेट
✔ कान के इलाज की त्वरित व्यवस्था
✔ और संघर्ष कर रहे परिवार को आवास दिलाने का आश्वासन

यह वो मदद थी जिसकी इस परिवार को लंबे समय से तलाश थी।

कानपुर की ग्वालटोली अहिराना में किराए के छोटे से कमरे में रहने वाली खुशी के परिवार के लिए ये किसी चमत्कार से कम नहीं।

पिता कल्लू गुप्ता, जिनकी आठ महीने पहले मेट्रो में नौकरी चली गई… अब ई-रिक्शा चलाकर गुजारा कर रहे हैं। माँ गीता घरों में काम करती हैं।
ऐसे में खुशी की यह मुलाकात पूरे परिवार में नई ऊर्जा भर गई।

VO:
खुशी ने यह साबित कर दिया कि भावनाएँ किसी भाषा की मोहताज नहीं।
उसका निश्छल प्रेम ही उसे मुख्यमंत्री के दरवाज़े तक ले गया… और आज उसकी ज़िन्दगी बदल चुकी है।


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Anchor OUT:

खुशी की कहानी सिर्फ एक मुलाकात की कहानी नहीं… बल्कि विश्वास, जज़्बे और सच्ची भावनाओं की कहानी है।
मुख्यमंत्री योगी द्वारा दिया गया सहारा इस परिवार के लिए नई उम्मीद बन गया है।

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