कानपुर - ब्यूरो चीफ सुजीत कुमार
कानपुर के महाराजपुर थाने में गिट्टी–मौरंग कारोबारी से वसूली के मामले में सात पुलिसकर्मियों को क्लीन चिट तो मिल गई, लेकिन एक-दूसरे को फंसाने के चक्कर में सभी खुद कार्रवाई की जद में आ गए हैं।,,एसीपी कैंट आकांक्षा पांडे की जांच में सातों पुलिसकर्मियों को एक-दूसरे के खिलाफ वीडियो वायरल करने का दोषी पाया गया है। सभी को नोटिस देकर जवाब तलब किया गया है, जिसके बाद विभागीय कार्रवाई होगी।,,
यह था मामला
सरसौल निवासी शीलू यादव गिट्टी–मौरंग कारोबारी हैं।,,उनका आरोप है कि 18 सितंबर को सरसौल चौकी के पास खेत जाते समय दो अंडर-ट्रेनी दरोगाओं ने उन्हें रोक लिया। ,,दोनों ने जुआ खेलने और अवैध खनन के आरोप में चौकी ले जाकर जेल भेजने की धमकी दी और 2 लाख रुपये की मांग की। सौदा 50 हजार रुपये पर तय हुआ, जिसमें शीलू ने 26 हजार रुपये दे दिए।,,
इसके बाद शीलू ने वीडियो वायरल कर आरोप लगाया था कि पुलिसकर्मी रोज घर आकर 24 हजार रुपये और मांग रहे थे। उन्होंने यह भी कहा था कि वह मानसिक तनाव में हैं और पेट्रोल डालकर खुदकुशी कर लेंगे।,,
मामला चर्चा में आने के बाद डीसीपी पूर्वी सत्यजीत गुप्ता ने जांच एसीपी कैंट को सौंपी थी। प्रारंभिक जांच में सात पुलिसकर्मियों—दरोगा प्रदीप कुमार, आशीष, विष्णु कुमार, रवि शंकर, शैलेंद्र सिंह और सिपाही बंटी कुमार व सुल्तान सिंह—की भूमिका संदिग्ध पाई गई थी। इसके बाद 25 सितंबर को सभी को लाइन हाजिर कर दिया गया था।,,
अब एसीपी कैंट ने विस्तृत जांच रिपोर्ट डीसीपी पूर्वी को सौंप दी है।,, रिपोर्ट में सभी सात पुलिसकर्मियों को कदाचार और एक-दूसरे के खिलाफ वीडियो वायरल करने का दोषी ठहराया गया है। सभी को नोटिस भेजकर जवाब मांगा गया है। कुछ ने जवाब दे दिया है, जबकि कुछ का जवाब अभी लंबित है। इसके बाद विभागीय कार्रवाई तय होगी।,,
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