बिहार विधानसभा चुनाव 2025 : रक्सौल विधानसभा में जोरदार मतदान, मतदाताओं में जबरदस्त उत्साह बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे और अंतिम चरण के तहत रक्सौल विधानसभा क्षेत्र में आज मतदान जारी है। सुबह से ही बूथों पर मतदाताओं की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी क्षेत्रों


बिहार विधानसभा चुनाव 2025 : रक्सौल विधानसभा में जोरदार मतदान, मतदाताओं में जबरदस्त उत्साह

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे और अंतिम चरण के तहत रक्सौल विधानसभा क्षेत्र में आज मतदान जारी है। सुबह से ही बूथों पर मतदाताओं की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी क्षेत्रों तक लोगों में लोकतंत्र के इस पर्व को लेकर जबरदस्त उत्साह है। महिलाएं, बुजुर्ग और युवा सभी अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए उमड़ पड़े हैं।

रक्सौल विधानसभा की पहचान सीमावर्ती इलाकों में सबसे अधिक राजनीतिक रूप से सक्रिय क्षेत्र के रूप में होती है। नेपाल की सीमा से सटे इस क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चुनाव आयोग ने विशेष सतर्कता बरती है। मतदान केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है और हर बूथ पर पुलिस बल गश्त कर रहे हैं।

प्रमुख उम्मीदवारों के बीच कांटे की टक्कर

इस बार रक्सौल सीट पर मुकाबला बहुकोणीय हो गया है। प्रमुख प्रत्याशी हैं —

प्रमोद कुमार सिन्हा (भाजपा) – दो बार विधायक रह चुके प्रमोद सिन्हा विकास और सड़क संपर्क को अपना मुख्य चुनावी मुद्दा बनाए हुए हैं। उन्होंने कहा है कि यदि जनता एक बार फिर उन्हें मौका देती है तो रक्सौल को व्यापारिक हब के रूप में विकसित किया जाएगा।

श्याम विबहारी प्रसाद (कांग्रेस) – कांग्रेस प्रत्याशी बेरोजगारी, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली को प्रमुख मुद्दा बना रहे हैं। वे स्थानीय अस्पतालों की स्थिति सुधारने और युवाओं के लिए रोजगार सृजन का वादा कर रहे हैं।

कपिलदेव प्रसाद (जन सुराज पार्टी) – जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी कपिलदेव प्रसाद इस बार तीसरा मोर्चा बनकर उभरे हैं। वे खुद को जनता के बीच से निकला उम्मीदवार बताते हुए पारदर्शी प्रशासन और भ्रष्टाचार-मुक्त शासन की बात कर रहे हैं।

धुरेंद्र कुमार (निर्दलीय) – समाजसेवी पृष्ठभूमि से आने वाले धुरेंद्र कुमार ग्रामीण विकास और किसानों की समस्याओं पर जोर दे रहे हैं।

मो. कलीम (निर्दलीय) – अल्पसंख्यक समुदाय में लोकप्रिय मो. कलीम शिक्षा और रोजगार के सवाल को केंद्र में रखकर चुनाव लड़ रहे हैं।

मतदान केंद्रों पर उत्साह और व्यवस्था

सुबह सात बजे जैसे ही मतदान शुरू हुआ, लोगों की भीड़ बूथों की ओर बढ़ने लगी। कई बूथों पर महिलाओं की लंबी कतारें देखी गईं। पहली बार वोट डालने वाले युवाओं में उत्साह चरम पर है। प्रशासन ने दिव्यांग मतदाताओं के लिए व्हीलचेयर और विशेष सहायकों की व्यवस्था की है।

सुरक्षा और निगरानी

सीमा क्षेत्र में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी से बचने के लिए एसएसबी और स्थानीय पुलिस के संयुक्त दल गश्त कर रहे हैं। संवेदनशील और अति संवेदनशील बूथों की पहचान की गई है, जहां अतिरिक्त बल तैनात है।

स्थानीय मुद्दे

रक्सौल के मतदाता मुख्य रूप से सड़क, जलजमाव, व्यापार, स्वास्थ्य सेवाओं की कमी और बेरोजगारी को लेकर चिंतित हैं। स्थानीय व्यापारी चाहते हैं कि रक्सौल को एक “मॉडल बॉर्डर सिटी” के रूप में विकसित किया जाए। वहीं किसानों की मांग है कि सिंचाई और कृषि उपज के लिए मंडियों की व्यवस्था हो।

मतदान प्रतिशत और रुझान

सुबह 9 बजे तक लगभग 18 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था, जो दोपहर तक बढ़कर 42 प्रतिशत के आसपास पहुंच गया। उम्मीद है कि शाम तक यह आंकड़ा 60 प्रतिशत से अधिक हो जाएगा।

जनता की आवाज

स्थानीय मतदाता राकेश सिंह कहते हैं, “हम विकास चाहते हैं, केवल वादों से काम नहीं चलेगा।” वहीं कॉलेज छात्रा नेहा का कहना है, “रोजगार और शिक्षा हमारी प्राथमिकता है, जो इन मुद्दों पर काम करेगा, हम उसी को वोट देंगे।”

निष्कर्ष

रक्सौल विधानसभा में इस बार मुकाबला दिलचस्प है। भाजपा, कांग्रेस और जन सुराज पार्टी के बीच सीधी लड़ाई मानी जा रही है, लेकिन निर्दलीय प्रत्याशी भी वोट बैंक में सेंध लगा सकते हैं। मतदान का रुझान बताता है कि जनता बदलाव चाहती है, और यह परिवर्तन किस दिशा में जाएगा, इसका फैसला आने वाले परिणाम तय करेंगे।

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