“बहुजन संगठक समाचार पत्र” की नींव मान्यवर कांशीराम साहेब ने रखी थी, जिन्होंने डॉ. अंबेडकर के मिशन को आगे बढ़ाते हुए बहुजन समाज की एकजुटता और राजनीतिक चेतना का सूत्रपात किया। यह समाचार पत्र मात्र खबरें देने का माध्यम नहीं था, बल्कि यह सामाजिक क्रांति का दस्तावेज़ था जिसने समाज के उपेक्षित व
बहुजन आंदोलन के इतिहास में डॉ. भीमराव अंबेडकर का योगदान अमिट और अनुपम रहा है। उन्होंने समाज में समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व के मूल्यों को स्थापित करने के लिए आजीवन संघर्ष किया। उनके अनुयायियों ने भी उनके मिशन को आगे बढ़ाने के लिए समाजिक, राजनैतिक और बौद्धिक स्तर पर कई माध्यमों का निर्माण किया। इन्हीं में से एक माध्यम “बहुजन संगठक समाचार पत्र” और “दलित घोष पत्रिका” है, जो बहुजन समाज की आवाज़ को सशक्त रूप से प्रस्तुत कर रहे हैं।
“बहुजन संगठक समाचार पत्र” की नींव मान्यवर कांशीराम साहेब ने रखी थी, जिन्होंने डॉ. अंबेडकर के मिशन को आगे बढ़ाते हुए बहुजन समाज की एकजुटता और राजनीतिक चेतना का सूत्रपात किया। यह समाचार पत्र मात्र खबरें देने का माध्यम नहीं था, बल्कि यह सामाजिक क्रांति का दस्तावेज़ था जिसने समाज के उपेक्षित वर्गों को अपनी बात रखने का एक सशक्त मंच दिया।
आज उसी परंपरा को जीवित रखते हुए राजेश कुमार सिद्धार्थ इस पत्र के संपादक के रूप में निरंतर कार्य कर रहे हैं। वे “बहुजन संगठक समाचार पत्र” और “दलित घोष पत्रिका” दोनों के संपादन का दायित्व संभालते हैं। राजेश कुमार सिद्धार्थ समाज के उन जागरूक बुद्धिजीवियों में से हैं जो पत्रकारिता को समाज परिवर्तन का माध्यम मानते हैं। उनका उद्देश्य केवल समाचार छापना नहीं, बल्कि बहुजन समाज के बौद्धिक, शैक्षणिक, आर्थिक और राजनीतिक उत्थान के लिए मार्गदर्शन देना है।
राजेश कुमार सिद्धार्थ ने डॉ. अंबेडकर और कांशीराम साहेब के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनकी संपादकीय नीतियाँ समावेशी और प्रगतिशील हैं, जो बहुजन समाज की समस्याओं को निर्भीकता से उजागर करती हैं। वे पत्रकारिता को सामाजिक जिम्मेदारी मानते हैं और यही कारण है कि उनके नेतृत्व में इन पत्र-पत्रिकाओं ने जनसरोकार आधारित पत्रकारिता को एक नई दिशा दी है।
“दलित घोष पत्रिका” के माध्यम से वे सामाजिक न्याय, मानवाधिकार, शिक्षा, और संविधान के मूल्यों पर केंद्रित लेखन को बढ़ावा देते हैं। उनकी लेखनी में न केवल विचारों की गहराई है, बल्कि बहुजन चेतना की सच्ची अभिव्यक्ति भी है।
राजेश कुमार सिद्धार्थ का योगदान केवल पत्रकारिता तक सीमित नहीं है, वे समाज में जागरूकता फैलाने वाले आयोजनों, सेमिनारों और संवादों के माध्यम से भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उनके कार्यों से यह स्पष्ट है कि वे डॉ. अंबेडकर के मिशन “शिक्षित बनो, संगठित बनो, संघर्ष करो” को व्यवहार में उतारने का प्रयास कर रहे हैं।
इस प्रकार, भीमराव यशवंतराव अंबेडकर के विचारों की विरासत को जीवित रखते हुए, राजेश कुमार सिद्धार्थ बहुजन समाज की आवाज़ को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। उनकी पत्रकारिता न केवल प्रेरक है बल्कि एक सामाजिक परिवर्तन की दिशा भी है।
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