*_✍????वाराणसी : प्रतिबंधित कॉन्ट्रैक्टर फर्जी तरीके से सक्रिय। अधिकारियों की चुप्पी पर उठे सवाल, बरेका में ठेकेदारी घोटाला..._*
बनारस लोकोमोटिव वर्क्स (ब०रे०का०) में ठेकेदारी कार्यों को लेकर बड़ा घोटाला सामने आया है। जिन ठेकेदारों को संदेहास्पद गतिविधियों और स्क्रैप चोरी के आरोपों में प्रतिबंधित किया जा चुका था, वे एक बार फिर अधिकारियों की आंखों में धूल झोंककर ठेकेदारी कार्य में सक्रिय पाए गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, प्रतिबंधित ठेकेदार कौशल सिंह पुत्र सत्यनारायण सिंह की दो फर्में - मेसर्स सत्यनारायण सिंह कॉन्ट्रेक्टर और मेसर्स कौशल किशोर सिंह कॉन्ट्रेक्टर पहले ही बरेका से ब्लैकलिस्ट की जा चुकी थीं। इसके बावजूद, संबंधित ठेकेदार ने गुपचुप तरीके से मेसर्स सिद्रा ट्रेडर्स की पावर ऑफ अटॉर्नी लेकर ठेकेदारी कार्य करना शुरू कर दिया। यह रेलवे के नियमों का सीधा उल्लंघन है, क्योंकि रेलवे प्रावधानों के अनुसार जिस फर्म या व्यक्ति को प्रतिबंधित किया जाता है, उसे पूरे भारत में रेलवे से संबंधित किसी भी ठेकेदारी कार्य में भाग लेने की अनुमति नहीं होती।
ठेकेदार कौशल सिंह पर पहले भी गंभीर आरोप लग चुके हैं। बरेका में स्क्रैप चोरी के मामलों में उसका नाम सामने आया था। वहीं, उसका सहयोगी भूपेंद्र पाल 22 मार्च 2016 को मंडुवाडी रेलवे स्टेशन से शिवगंगा एक्सप्रेस के जरिए 33 बोरियों में लाखों का रेलवे सामान पार्सल के माध्यम से भेजने की कोशिश करते हुए RPF टीम द्वारा रंगे हाथ पकड़ा गया था।
ठेकेदार कौशल सिंह पर पहले भी गंभीर आरोप लग चुके हैं। बरेका में स्क्रैप चोरी के मामलों में उसका नाम सामने आया था। वहीं, उसका सहयोगी भूपेंद्र पाल 22 मार्च 2016 को मंडुवाडी रेलवे स्टेशन से शिवगंगा एक्सप्रेस के जरिए 33 बोरियों में लाखों का रेलवे सामान पार्सल के माध्यम से भेजने की कोशिश करते हुए RPF टीम द्वारा रंगे हाथ पकड़ा गया था।
ठेकेदार कौशल सिंह पर पहले भी गंभीर आरोप लग चुके हैं। ब०रे०का० में स्क्रैप चोरी के मामलों में उसका नाम सामने आया था। वहीं उसका सहयोगी भूपेंद्र पाल 22 मार्च 2016 को मंडुवाडी रेलवे स्टेशन से शिवगंगा एक्सप्रेस के जरिए 33 बोरियों में लाखों का रेलवे सामान पार्सल के माध्यम से भेजने की कोशिश करते हुए R.P.F. टीम द्वारा रंगे हाथ पकड़ा गया था।
इतने बड़े खुलासे के बाद भी अधिकारियों की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। यह मामला न केवल रेलवे के नियमों की धज्जियां उड़ाने का है, बल्कि अंदरूनी मिलीभगत की ओर भी इशारा करता है। सूत्रों का कहना है कि पिछले चार से पांच सालों में इन प्रतिबंधित ठेकेदारों ने अधिकारियों को गुमराह कर ठेकेदारी कार्यों में अपनी पकड़ फिर से मजबूत कर ली है।
नवीनतम न्यूज़ अपडेट्स के लिए
Facebook,
Instagram,
Twitter
पर हमें फॉलो करें और लेटेस्ट वीडियोज़ के लिए हमारे
YouTube
चैनल को भी सब्सक्राइब करें।
Leave a Comment: