चरित्र शंका को लेकर अजय और पत्नी लता के बीच विवाद इतना बढ़ गया था कि पति ने घासलेट डालकर पत्नी को आग लगा दी थी। घटना में लता लगभग 50 से 60 परसेंट जल गई थी। इलाज


''वर्ष 2011 में मेरी अजय खरे से हिन्दू रीति-रिवाज के अनुसार शादी हुई थी। मेरा और अजय का एक बेटा और एक बेटी है। शादी के बाद अजय ने 2-3 साल तक मुझे अच्छे से रखा। उसके बाद मारपीट करने लगा। प्रताड़ना के बारे में मैंने मायके वालों को बताया। इसके बाद मेरे भाई धर्मेंद्र और पिता रामलाल ने अजय को समझाने की कोशिश की। पति मेरे चरित्र पर शंका करता था। घटना वाले दिन 7 जुलाई 2018 को पति अजय फिर चरित्र शंका की बात करते हुए मुझसे झगड़ा करने लगा। इस दौरान अजय ने मेरे शरीर पर घासलेट डालकर आग लगा दी। मैं बचाने के लिए चिल्लाई तो आवाज सुनकर सास-ससुर आए और मुझे जलता हुआ देख गुदड़ी से आग बुझाई। घर के लोग मुझे लेकर देपालपुर अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां से मुझे एमवाय अस्पताल इंदौर और फिर निजी अस्पताल ले जाया गया। ये बयान मैं इसी अस्पताल में बिना किसी के दबाव व डर के दे रही हूं।”

ये बयान किसी और का नहीं लता खरे ने निजी अस्पताल में बिना डर और दबाव के मौत से पहले बेटमा थानेदार मनीष माहौर और तहसीलदार राहुल गायकवाड को दिया था। पुलिस ने जब बयान लिए थे तब लगभग घायल थी। हाथों में पटि्टयां बंधी थी। बयान तो दर्ज कर लिया गया था लेकिन उसके हाथ में पटि्टयां बंंधी होने के कारण पुलिस ने लता के दाहिने पैर के अंगूठे का निशान बयान पर लिया था।

दरअसल, चरित्र शंका को लेकर अजय और पत्नी लता के बीच विवाद इतना बढ़ गया था कि पति ने घासलेट डालकर पत्नी को आग लगा दी थी। घटना में लता लगभग 50 से 60 परसेंट जल गई थी। इलाज के लिए सरकारी अस्पताल के बाद प्राइवेट अस्पतालों में भी दाखिल कराया गया लेकिन लता ने इलाज के दौरान 5 दिन बाद 12 जुलाई को दम तोड़ दिया।

पुलिस ने मायके पक्ष की शिकायत पर आरोपी पति के खिलाफ केस दर्ज कर लिया। पहले धारा 307 लगाई गई थी। मौत हो जाने के बाद धारा बढ़ाकर 302 के तहत केस कायम कर लिया गया। इस दौरान मृतिका के परिजनों ने पति अजय के खिलाफ घासलेट डाल कर जलाने का आरोप लगाया था। लेकिन कोर्ट में महिला के पिता, भाई, बहन सब अपने बयान से मुकर गए। आरोपी के भाई ने भी घटना को लेकर अलग ही बयान दिया।

महिला के परिवार वालों ने पहले पुलिस को क्या कहा था और कोर्ट में क्या बयान दिया, आरोपी पति को बचाने के लिए क्या-क्या दलील कोर्ट में दी गई, कैसे उसे उम्र कैद की सजा हुई, केस में महत्वपूर्ण साक्ष्य क्या माना गया, जानिए सब कुछ सिलसिलेवार

जिला एवं सत्र न्यायालय इंदौर।

                                                                     जिला एवं सत्र न्यायालय इंदौर।

पुलिस ने कोर्ट को दी यह जानकारी

पुलिसकर्मी बिहारी सांवले ने कोर्ट को बताया कि घटना के बाद 8 जुलाई को लता के परिजन बेटमा थाने पहुंचे थे। जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची तो यहां कोटवार अर्जुन भी था। आरोपी अजय के भाई संजय के सामने घटनास्थल का निरीक्षण किया। अजय के माता-पिता ने पूछताछ में बताया कि अजय ने चरित्र शंका की बात को लेकर लता को घासलेट डालकर आग लगा दी। उन्होंने अजय के कमरे में जाकर लता को जलते हुए देखा तो घर में रखी गुदड़ी से आग बुझाई। इसके बाद अजय ने जली हुई गुदड़ी और लता की साड़ी को घर से दूर कुएं के अंदर फेंक दिया।

पुलिस ने आगे कहा कि 10 जुलाई को आरोपी पति अजय के खिलाफ धारा 307 के तहत केस दर्ज किया गया। 14 जुलाई को आरोपी अजय को गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी अजय ने पुलिस से बताया था कि घटना के समय वह मौके पर नहीं था। घर से बाहर मजदूरी करने गया था। लेकिन वह मजदूरी करने कहां गया था इस बारे में आरोपी कोई सबूत नहीं पेश कर सका। जब आरोपी से बयान लिया गया था तब उसका 7 साल का बेटा और 5 साल की बेटी भी घर पर मौजूद थी। आरोपी अजय के भाई संजय ने लता के भाई धर्मेंद्र को फोन लगाकर उसके जलने की जानकारी दी थी।

आरोपी को बचाने के लिए पुलिस पर प्रशंसा और पुरस्कार का लगा आरोप

कोर्ट में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि लता की मृत्यु 12 जुलाई 2018 को हुई थी। इससे पहले ही पुलिसकर्मी बिहारी सांवले ने आरोपी को हत्या का दोषी मानकर कार्रवाई की है। इससे यह पता चलता है कि आरोपी के खिलाफ विद्वेषपूर्ण कार्रवाई करने की पुलिस की पहले से मंशा थी। बिहारी सांवले ने प्रशंसा और पदोन्नति के लिए लता की मौत के पहले कथन में आरोपी के नाम का उल्लेख नहीं होने पर भी उसे फंसाने के लिए बाद में जांच कथन तैयार करवाया है। पुलिस ने केस दर्ज हुए बिना किस आधार पर घटनास्थल पर जाकर कार्रवाई की, इसका स्पष्टीकरण नहीं दिया है। लेकिन कोर्ट ने तर्क को सारहीन होने से स्वीकार योग्य नहीं माना।

लता के पिता, भाई-बहन कोर्ट में मुकर गए, आरोपी के भाई ने दिया ये बयान

बचाव पक्ष ने कोर्ट को बताया कि अपने मुख्य परीक्षण में आरोपी अजय के भाई संजय ने कहा कि लता चूल्हे में खाना बना रही थी। इस दौरान अचानक आग लगी थी। लता के भाई धर्मेंद्र ने भी कोर्ट में कहा है कि लता ने उसे एमवाय अस्पताल में बताया था कि जब वह खाना बना रही थी, तब उसके ऊपर चिमनी गिर गई थी, जिससे वह जल गई थी। इसी प्रकार लता की बहन निर्मला, रेखा और पिता रामलाल ने भी कोर्ट को बताया कि लता ने उन्हें बताया था कि जब वह खाना बना रही थी तब चिमनी उसके ऊपर गिर गई थी।

लेकिन बचाव पक्ष के इस तर्क की काट में कोर्ट में कहा गया कि आरोपी अजय के भाई संजय ने चूल्हे पर खाना बनाते समय जल जाने की बात कही है। लता के परिजन उसके ऊपर चिमनी गिरने से जलने की बात कह रहे हैं। दोनों के बयानों में एकरूपता नहीं है। घटना स्थल से कोई चिमनी भी जब्त नहीं हुई है।

अपर लोक अभियोजक शिवनाथसिंह मावई ।

                                                              अपर लोक अभियोजक शिवनाथसिंह मावई ।

आरोपी को सजा दिलाने के लिए रखे गए ये तर्क

कोर्ट को यह भी बताया गया कि पुलिस ने मौके से 5 लीटर की केरोसिन की केन, माचिस की तिली, माचिस की डब्बी, सादी मिट्‌टी, केरोसिन युक्त मिट्‌टी को जब्त किया था। मिट्‌टी में केरोसिन के अवशेष होना पाए गए थे। लता अगर चूल्हे में तेल गिरने से जली होती तो घटना स्थल की मिट्‌टी पर केरोसिन नहीं फैला हुआ पाया जाता। इससे एकमात्र यही निष्कर्ष निकलता है कि उसे घासलेट डालकर जलाया गया है।

बचाव पक्ष ने अंतिम तर्क के तौर पर कोर्ट में कहा कि गवाह संजय ने उसके बयान के दौरान ये भी बताया था कि उसकी बुआ के लड़के महेश ने एमवाय अस्पताल में मोबाइल से रिकॉर्डिंग की थी। इस दौरान लता ने खाना बनाने के दौरान जलने की जानकारी दी थी। ये रिकॉर्डिंग संजय के पास होने की जानकारी भी दी गई। इसके बाद भी पुलिस ने रिकॉर्डिंग जब्त कर पेश नहीं किया। क्योंकि ऐसी कोई रिकॉर्डिंग आरोपी के परिजनों के पास नहीं थी। उन्हें रिकॉर्डिंग पेश करने के लिए किसी ने रोका भी नहीं था।

बाद में आरोपी को न्यूनतम दंड देने की गुहार कोर्ट से लगाई गई लेकिन अपर लोक अभियोजक ने अधिकतम दंड से दंडित करने का निवेदन किया। इस पर अपर सत्र न्यायाधीश देपालपुर जिला इंदौर निलेश यादव ने आरोपी अजय खरे को आजीवन कारावास और एक हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया। प्रकरण में पैरवी अपर लोक अभियोजक शिवनाथ सिंह मावई द्वारा की गई।

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Rajesh Kumar Siddharth

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राजेश कुमार सिद्धार्थ अबतक मीडिया ग्रुप के संपादक-इन-चीफ हैं, जिन्हें 25 वर्षों से अधिक का पत्रकारिता जगत में अनुभव प्राप्त है, और जो अपनी कुशल नेतृत्व क्षमता से अबतक मीडिया ग्रुप

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