सीतापुर। दीपावली का त्योहार स्थानीय कारीगरों और कुम्हार परिवारों के लिए विशेष महत्व रखता है। इस अवसर पर मिट्टी से बने दीयों की मांग बढ़ जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में कुम्हार परिवार कई दिनों पहले से ही दीपक तैयार करने में जुट जाते हैं।
मिट्टी तैयार करने, चाक पर दीये बनाने, उन्हें सुखाने और भट्ठी में पकाने के बाद रंगाई और सजावट का काम किया जाता है। इन सभी प्रक्रियाओं में परिवार के कई सदस्य सहयोग करते हैं। त्योहार के दौरान होने वाली बिक्री से कारीगरों को अतिरिक्त आमदनी प्राप्त होती है।
सामाजिक संगठनों और नागरिकों से अपील की जा रही है कि वे स्थानीय कुम्हारों से मिट्टी के दीपक खरीदें। इससे पारंपरिक कला को संरक्षण मिलेगा और छोटे कारीगरों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मदद मिलेगी।
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