सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हिरासत और गिरफ्तारी के बीच कोई बनावटी अंतर करना संवैधानिक रूप से गलत है. ऐसा करने पर पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान है.


सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी और हिरासत को लेकर बुधवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. 7 पॉइंट्स वाले इस अहम फैसले में कोर्ट ने साफ कर दिया कि 24 घंटे के नियम को तोड़ा नहीं जा सकता. जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने अपने फैसले में कहा कि अगर 24 घंटे के नियम का उल्लंघन होता है, तो आरोपी शख्स को तुरंत रिहा करना होगा. कोर्ट ने इसके साथ ही मजिस्ट्रेट के लिए अहम दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं.

 

    ने कहा कि मजिस्ट्रेट पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर ही फैसला न लें. ऐसे मामलों में हिरासत में रखे गए शख्स का पक्ष भी सुनें और उसके बाद फैसला करें.

24 घंटे वाला नियम क्या है?

सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक अब मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने की 24 घंटे की समय-सीमा हिरासत में लिए जाने के समय से शुरू होगी, न कि औपचारिक गिरफ्तारी से. कोर्ट ने आगे कहा कि हिरासत और गिरफ्तारी के बीच कोई बनावटी अंतर करने की कोशिश संवैधानिक रूप से मान्य नहीं है.

 

कोर्ट ने कहा कि पूछताछ या अन्य किसी भी सवाल को इससे बाहर नहीं रखा जा सकता है. कोर्ट ने साफ किया कि 24 घंटे में ही सब कुछ शामिल है.

पहले क्या होता था- आमतौर पर पुलिस 24 घंटे की जो समय सीमा दर्ज करती थी, उसे पुलिस औपचारिक गिरफ्तारी के वक्त से दिखाती थी. मान लीजिए, पुलिस ने किसी शख्स को दोपहर 12 बजे हिरासत में लिया, लेकिन जनरल डायरी (जीडी) में उसे 6 बजे शाम में दिखाया तो पुलिस गिरफ्तारी का वक्त 12 की जगह 6 बजे दिखाती थी.

कई मौकों पर पुलिस पूछताछ के लिए जो समय लेती थी, उसे इसमें नहीं जोड़ती थी. इस पर भी पुलिस पर सवाल उठते थे. अब पूछताछ के समय को भी इसी 24 घंटे में जोड़ना होगा.

नियम तोड़ने पर क्या होगा?

भारत में हिरासत और गिरफ्तारी को लेकर संविधान के अनुच्छेद 22(2) में विस्तार से बताया गया है. अगर पुलिस इसका उल्लंघन करती है, तो कोर्ट के पास कानूनी कार्रवाई करने का अधिकार है. इसके तहत पुलिस के खिलाफ विभागीय कार्रवाई हो सकती है. इसके अलावा, कई मामलों में कोर्ट पुलिस या सरकार पर जुर्माना भी लगा सकती है.

वहीं, हिरासत और गिरफ्तारी के मामले में पुलिस के खिलाफ BNS की धारा 127 के तहत केस दर्ज हो सकता है. अगर ऐसा होता है, तो इसकी अलग-अलग उपधाराओं के तहत पुलिसकर्मियों को निम्नलिखित सजाएं हो सकती हैं.

1. BNS की धारा 127(2) के मुताबिक, दोषी पुलिसकर्मी को 1 साल तक की सजा हो सकती है. साथ ही 5 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया जा सकता है.

2. BNS की धारा 127(3) के मुताबिक अगर किसी व्यक्ति को 3 दिन या उससे अधिक समय तक अवैध हिरासत में रखा जाता है, तो कोर्ट दोषी पुलिसकर्मी को 3 साल तक की सजा सुना सकती है. साथ ही 11 हजार रुपये का जुर्माना भी लगा सकती है.

3. यूपी हाई कोर्ट ने अपने हालिया फैसले में कहा कि अगर किसी व्यक्ति को एक दिन तक अवैध हिरासत में रखा जाता है, तो पुलिस पर 35 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा. इस साल यूपी पुलिस पर हिरासत से जुड़े मामलों में 27 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है.

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