लखीमपुर खीरी। निघासन ब्लॉक के ग्राम पंचायत मूड़ा बुजुर्ग स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। अस्पताल परिसर में साफ-सफाई का अभाव दिखाई दे रहा है। अस्पताल के अंदर कई दरवाजों की हालत खराब है, वहीं खिड़कियों की जालियों और शीशों के टूटे होने की बात


सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मूड़ा बुजुर्ग की बदहाल व्यवस्था! मरीजों की सेहत भगवान भरोसे, परिसर में गंदगी और जगह-जगह बिखरे पड़े इंजेक्शन

लखीमपुर खीरी। निघासन ब्लॉक के ग्राम पंचायत मूड़ा बुजुर्ग स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। अस्पताल परिसर में साफ-सफाई का अभाव दिखाई दे रहा है। अस्पताल के अंदर कई दरवाजों की हालत खराब है, वहीं खिड़कियों की जालियों और शीशों के टूटे होने की बात सामने आई है।

सबसे चिंताजनक स्थिति अस्पताल परिसर में जगह-जगह पड़े इस्तेमाल किए गए इंजेक्शनों और मेडिकल कचरे को लेकर है। यदि कोई मरीज, बच्चा या ग्रामीण गलती से इनके संपर्क में आ जाए तो संक्रमण का खतरा पैदा हो सकता है। आखिर इस लापरवाही की जिम्मेदारी किसकी होगी?

अस्पताल के अंदर का नजारा भी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। लंबे समय से बंद पड़े कमरे दिखाई दिए, जिनके आसपास खरपतवार उगा हुआ है। अस्पताल परिसर की इस स्थिति को देखकर स्वास्थ्य सेवाओं और रखरखाव पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि अस्पताल में आने वाले मरीजों को समय पर बेहतर प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। उनका कहना है कि जब सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर करोड़ों रुपये का बजट उपलब्ध कराती है और अस्पताल भवन का निर्माण कराया जाता है, तो फिर मरीजों को बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान क्यों होना पड़ रहा है?

डीएम साहब से जांच की मांग

अब सवाल यह है कि क्या जिले के जिम्मेदार स्वास्थ्य अधिकारी इस स्थिति से अनजान हैं? यदि उन्हें जानकारी है तो अब तक व्यवस्था में सुधार और जांच की कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

ग्रामीणों ने जिलाधिकारी लखीमपुर खीरी से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मूड़ा बुजुर्ग का औचक निरीक्षण कराने, अस्पताल की साफ-सफाई, मेडिकल कचरे के निस्तारण, टूटे दरवाजों व खिड़कियों तथा लंबे समय से बंद कमरों की जांच कराने की मांग की है।

साथ ही संबंधित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय कर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग उठाई है।

अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस मामले को संज्ञान में लेकर जांच कराता है या फिर ग्रामीणों की शिकायतें यूं ही फाइलों में दबकर रह जाती हैं।

अब तक न्याय/

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