विकास के दावों की खुली पोल। ग्राम प्रधान के गांव का ही रास्ता बना तालाब,सड़क पर पानी ही पानी,आखिर कहां गुम हो गया पांच साल का विकास।?

रिपोर्टर अजय कुमार मौर्य

निघासन-खीरी वाह रे विकास। क्या खूब तस्वीर सामने आई है। सड़क है। या मछली पालने का तालाब।? यह नजारा देखकर अच्छे-अच्छों की आंखें फटी की फटी रह जाएं। निघासन-खीरी की ग्राम पंचायत लालपुर के गांव बुद्धा पुरवा में विकास की यह अनोखी तस्वीर सामने आई है।,जहां ग्राम प्रधान के गांव का ही रास्ता तालाब में तब्दील होता नजर आ रहा है। तस्वीर में दिखाई दे रहा जलभराव किसी तालाब या मछली पालन केंद्र का नही,बल्कि ग्रामीणों के आवागमन का रास्ता है। सड़क के नाम पर पानी का ऐसा समंदर पसरा है। कि राहगीर भी सोचने को मजबूर है। कि आखिर सड़क से गुजरें या नाव का इंतजाम करें। ग्राम पंचायत लालपुर के बुद्धा पुरवा की यह तस्वीर विकास के दावों पर कई सवालिया निशान खड़े कर रही है। एक तरफ गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की बातें होती है। वही दूसरी तरफ ग्रामीणों को अपने ही गांव में निकलने के लिए जलभराव और कीचड़ से जूझना पड़ रहा है। सड़क पर जमा गंदा पानी,उखड़ी जमीन और आसपास फैली अव्यवस्था देखकर ऐसा लगता है। मानो विकास की गाड़ी इस रास्ते पर पहुंचने से पहले ही कही पंचर हो गई हो। पांच साल बीते,लेकिन रास्ते की बदहाली नही बदली। ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है। कि आखिर पांच साल के कार्यकाल में गांव की बुनियादी सुविधाओं को लेकर क्या-क्या काम कराया गया।? अगर ग्राम पंचायत लालपुर के गांव बुद्धा पुरवा में ही रास्तों की ऐसी तस्वीर दिखाई दे रही है।,तो पंचायत के दूसरे गांवों और मजरों में विकास कार्यों की स्थिति क्या होगी।? यह सवाल अब ग्रामीणों की जुबान पर है। बरसात हो या सामान्य दिन,ऐसे रास्तों पर आवागमन करना किसी चुनौती से कम नही है। स्कूली बच्चों,बुजुर्गों, महिलाओं और जरूरी काम से निकलने वाले लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ सकती है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए भी यह रास्ता जोखिम भरा साबित हो सकता है। बाबा जी की सरकार पर भी उंगली उठाने से पहले जमीनी जिम्मेदारी का भी हो हिसाब सबसे दिलचस्प पहलू तो यह है। कि गांवों में विकास कार्यों की जिम्मेदारी निभाने वाले कुछ लोग और अधिकारी जमीनी समस्याओं का समाधान करने के बजाय सीधे बाबा जी की सरकार पर उंगली उठाने का काम करते दिखाई देते है। आखिर सवाल यह है कि जब गांव की सड़क,जलनिकासी और बुनियादी सुविधाओं की जिम्मेदारी स्थानीय स्तर पर भी तय है।,तो अपनी जिम्मेदारियों का हिसाब कौन देगा।? सरकार की योजनाओं का लाभ जनता तक पहुंचाना भी तो जिम्मेदारों की जवाबदेही है। ऐसे में केवल सरकार पर सवाल उठाने से पहले अपने गांव और पंचायत की जमीनी तस्वीर पर भी नजर डालना जरूरी है। चुनाव में फिर गूंजेगा सड़क और विकास का मुद्दा। अब ग्राम पंचायत लालपुर के गांव बुद्धा पुरवा की गलियों में विकास की चर्चाओं के साथ एक और सवाल तैर रहा है।-जब गांव का रास्ता ही पानी में डूबा है। तो विकास की तस्वीर आखिर किस कागज पर चमक रही है।? ग्रामीणों के लिए सड़क,जलनिकासी और साफ-सफाई कोई चुनावी भाषण का मुद्दा नही,बल्कि रोजमर्रा की जरूरत है। आने वाले चुनाव में ऐसे बदहाल रास्ते विकास कार्यों के दावों और वादों पर सवाल खड़े कर सकते है। पांच साल तक रास्ते की समस्या से परेशान ग्रामीण अब विकास का हिसाब मांगने की बात कर रहे है। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस तस्वीर का संज्ञान लेकर मौके पर पहुंचते है। या फिर ग्रामीणों को इसी तालाबनुमा रास्ते से अपनी जिंदगी की गाड़ी आगे बढ़ानी पड़ेगी। जनता का सीधा सवाल-हमें भाषण नही। चलने लायक रास्ता चाहिए। विकास कागजों में नही,गांव की गलियों में दिखाई देना चाहिए। ग्राम पंचायत लालपुर के गांव बुद्धा पुरवा का यही है। विकास। वाह रे वाह विकास।
 

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