सुप्रीम कोर्ट ने अटके हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के घर खरीदारों की याचिकाओं पर चिंता जताई. CJI सूर्यकांत ने कहा कि हर प्रोजेक्ट की सुनवाई से मुख्य मामले में फैसला आने में देरी हो सकती है


सुप्रीम कोर्ट ने अटके हुए रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स के घर खरीदारों की ओर से लगातार दायर की जा रही याचिकाओं पर चिंता जताई है. कोर्ट ने कहा कि अगर हर हाउसिंग प्रोजेक्ट से जुड़े मामले की अलग-अलग सुनवाई शुरू कर दी गई, तो मुख्य मामले में अंतिम फैसला देना मुश्किल हो जाएगा. जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि भारत में हर समस्याग्रस्त हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए सुप्रीम कोर्ट एक मंच नहीं बन सकता. कोर्ट ने यह भी कहा कि मुख्य मामले पर आने वाला उसका फैसला ऐसे ही विवादों से निपट रहे हाई कोर्ट के लिए दिशा-निर्देश का काम करेगा.

 

हर प्रोजेक्ट के खरीदार सुप्रीम कोर्ट पहुंचने लगे तो फैसला कैसे होगा?

सुनवाई के दौरान एक याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि जिन हाउसिंग प्रोजेक्ट्स की बात की जा रही है, वे फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के सामने विचाराधीन मुख्य मामले का हिस्सा नहीं हैं. उन्होंने कहा कि इन प्रोजेक्ट्स को पूरी तरह छोड़ दिया गया है और घर खरीदारों को राहत नहीं मिल रही है.

 

इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि अगर एक प्रोजेक्ट के खरीदार सुप्रीम कोर्ट पहुंचते हैं, तो उसी प्रोजेक्ट से जुड़े 200 और लोग भी याचिका लेकर आ सकते हैं. ऐसे में मामले की सुनवाई और फैसले की प्रक्रिया कभी खत्म नहीं होगी. उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ताओं को मुख्य मामले में फैसले का इंतजार करना चाहिए या फिर संबंधित हाई कोर्ट का रुख करना चाहिए.

 

हाई कोर्ट के फैसले का इंतजार करने की दलील

याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि हाई कोर्ट इन मामलों में कोई फैसला नहीं ले रहे हैं, क्योंकि वे सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहे हैं. इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करना चाहिए.

CJI ने कहा कि समस्या यह है कि जैसे ही सुप्रीम कोर्ट ऐसे मामलों में नोटिस जारी करता है, दूसरे हाउसिंग प्रोजेक्ट्स से जुड़े लोग भी यहां पहुंचने लगते हैं. इससे मुख्य मामले की सुनवाई प्रभावित हो सकती है. इसके बाद वकील ने अनुरोध किया कि मामले को 26 नवंबर के लिए दोबारा सूचीबद्ध कर दिया जाए.

मुख्य फैसले के बाद भी राहत के रास्ते खुले रहेंगे

CJI सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता के वकील से पूछा कि वे इस चरण पर अपनी याचिका वापस क्यों नहीं ले लेते. उन्होंने कहा कि मुख्य मामले पर फैसला आने के बाद याचिकाकर्ताओं के पास सुप्रीम कोर्ट या संबंधित हाई कोर्ट में जाने का विकल्प रहेगा.

वकील ने दलील दी कि अलग-अलग हाई कोर्ट पहले ही इन मामलों पर विरोधाभासी राय दे चुके हैं. इसी वजह से ऐसे मामले सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं. इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट किसी मामले पर अपनी राय दे देता है, तो हाई कोर्ट उससे अलग राय नहीं अपना सकते.

नवीनतम न्यूज़ अपडेट्स के लिए Facebook, Instagram, Twitter पर हमें फॉलो करें और लेटेस्ट वीडियोज़ के लिए हमारे YouTube चैनल को भी सब्सक्राइब करें।


Leave a Comment:

महत्वपूर्ण सूचना -

भारत सरकार की नई आईटी पॉलिसी के तहत किसी भी विषय/ व्यक्ति विशेष, समुदाय, धर्म तथा देश के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी दंडनीय अपराध है। इस प्रकार की टिप्पणी पर कानूनी कार्रवाई (सजा या अर्थदंड अथवा दोनों) का प्रावधान है। अत: इस फोरम में भेजे गए किसी भी टिप्पणी की जिम्मेदारी पूर्णत: लेखक की होगी।