स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही पर आयुक्त सख्त, अस्पतालों की व्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश
आमोद कुमार
बांदा, 22 अक्टूबर। अस्पतालों में डॉक्टरों की गैरहाजिरी, दवाओं की कमी और मरीजों को इलाज मिलने में होने वाली देरी जैसी समस्याओं को लेकर चित्रकूटधाम मंडल के आयुक्त अजीत कुमार ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को जवाबदेही तय करने की हिदायत दी है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मंडलीय समीक्षा बैठक में उन्होंने स्वास्थ्य योजनाओं की प्रगति परखते हुए साफ किया कि खराब प्रदर्शन और लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।बैठक में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, आयुष्मान भारत, जननी सुरक्षा योजना, ई-संजीवनी, ब्लड बैंक, आईसीयू, दवाओं की उपलब्धता और अस्पतालों की साफ-सफाई समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। अपर निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डॉ. अभय कुमार सिंह सहित मंडलीय और जनपदीय स्वास्थ्य अधिकारी मौजूद रहे।
डॉक्टरों की उपस्थिति से लेकर दवाओं तक पर नजर
अस्पतालों में डॉक्टरों और कर्मचारियों की समय से उपस्थिति सुनिश्चित करने के साथ उपस्थिति पंजिका, भ्रमण पंजिका और अवकाश संबंधी अभिलेख दुरुस्त रखने को कहा गया। मानव सम्पदा पोर्टल पर अवकाश स्वीकृत होने के बावजूद संबंधित दस्तावेजों की हार्ड कॉपी सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए गए।अस्पतालों में जरूरी दवाओं की उपलब्धता, स्वच्छ पेयजल और साफ-सफाई की स्थिति सुधारने पर जोर दिया गया। जैव चिकित्सा अपशिष्ट का नियमानुसार निस्तारण नहीं होने और व्यवस्थाओं में लापरवाही मिलने पर जिम्मेदारी तय करने को कहा गया। गर्भवती महिलाओं और बच्चों की देखभाल पर जोर
जननी सुरक्षा योजना के तहत पात्र महिलाओं को समय से भुगतान सुनिश्चित करने और उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं के सुरक्षित प्रसव की व्यवस्था दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए। जिला महिला चिकित्सालय और प्रथम संदर्भन इकाइयों में जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।आयुक्त ने ई-संजीवनी के जरिए ओपीडी सेवाओं में वृद्धि, शत-प्रतिशत ABHA आईडी निर्माण और पात्र लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाने की प्रगति सुधारने को कहा। आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थियों को इलाज में अनावश्यक परेशानी न हो, इसके लिए भी अधिकारियों को ध्यान देने की जरूरत बताई गई।
डेंगू की रोकथाम और त्योहारों पर आपात सेवाओं की तैयारी
डेंगू और दूसरी मौसमी बीमारियों को देखते हुए प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी, जांच और उपचार की व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए गए। जलभराव रोकने, साफ-सफाई और जनजागरूकता अभियान चलाने पर भी जोर दिया गया।
आगामी दीपावली के मद्देनजर अस्पतालों में डॉक्टरों और कर्मचारियों की उपलब्धता, पर्याप्त दवाएं, एम्बुलेंस, शव वाहन तथा आपातकालीन उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया। ब्लड बैंक, आईसीयू और ऑपरेशन सेवाओं के साथ अग्निशमन प्रमाणपत्र तथा आग बुझाने वाले उपकरणों की स्थिति की भी समीक्षा की गई।अस्पतालों की गुणवत्ता और शिकायतों के निस्तारण पर निगरानी
अस्पतालों को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS) के अनुरूप प्रमाणन की प्रक्रिया समय पर पूरी करने के निर्देश दिए गए। वाहन पार्किंग, रसोई और मैकेनाइज्ड लॉन्ड्री जैसी सुविधाओं में सुधार के साथ लंबित शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण करने को कहा गया।आयुक्त ने पर्यवेक्षणीय अधिकारियों को नियमित क्षेत्रीय भ्रमण कर स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति जांचने और कमियों की रिपोर्ट मंडलीय कार्यालय को भेजने के निर्देश दिए। बैठक में साफ संकेत दिया गया कि स्वास्थ्य योजनाओं की समीक्षा केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उसका असर अस्पतालों में इलाज करा रहे मरीजों और सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों तक पहुंचना चाहिए।
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