बांदा समाधान दिवस में फरियादों का अंबार, समाधान की रफ्तार सुस्त! 131 में सिर्फ 15 शिकायतें निपटीं
116 फरियादें अब भी न्याय और राहत की प्रतीक्षा में
अमोद कुमार 
बांदा। सरकारी दफ्तरों में समाधान के दावे और जमीनी हकीकत के बीच की दूरी एक बार फिर सामने आई। शनिवार को तहसील सदर में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में 131 शिकायतें पहुंचीं, लेकिन मौके पर महज 15 का निस्तारण हो सका। शेष 116 शिकायतें कार्रवाई की प्रतीक्षा में रह गईं। सवाल उठता है कि जब फरियादियों की समस्याएं सुनने के लिए पूरा प्रशासन जुटता है, तो उनका समाधान इतनी सीमित संख्या में ही क्यों हो पाता है?
जिलाधिकारी अमित आसेरी की अध्यक्षता और पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल की मौजूदगी में आयोजित समाधान दिवस में भूमि विवाद, अवैध कब्जे, बिजली, पुलिस, शिक्षा, स्वास्थ्य, नगर पालिका, जल संस्थान और चकबंदी समेत विभिन्न विभागों से जुड़ी शिकायतें सामने आईं। डीएम ने अधिकारियों को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के निर्देश दिए, जबकि एसपी ने पुलिस संबंधी मामलों में नियमानुसार कार्रवाई पर जोर दिया।लेकिन सवाल केवल निर्देश देने का नहीं, जवाबदेही तय करने का भी है। फरियादी अपनी समस्या लेकर सरकारी चौखट पर इस उम्मीद से पहुंचता है कि उसे राहत मिलेगी, न कि एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय तक चक्कर काटने की नई तारीख। यदि शिकायतों का समाधान समय पर नहीं होता, तो समाधान दिवस भी कहीं कागजी खानापूर्ति बनकर न रह जाए।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि शिकायतों का वास्तविक समाधान प्रशासन की प्राथमिकता है। अब देखना यह है कि संबंधित विभाग इन निर्देशों को धरातल पर कितनी गंभीरता से उतारते हैं।
131 में 15 शिकायतों का निस्तारण एक आंकड़ा भर नहीं, बल्कि प्रशासनिक कार्यप्रणाली की कसौटी है। शेष 116 शिकायतों का समयबद्ध समाधान ही साबित करेगा कि यह आयोजन जनता को राहत देने का प्रभावी माध्यम है या महज फरियादें दर्ज करने की औपचारिक प्रक्रिया।

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