• ​कारीकोट-सुजौली मार्ग निर्माण: विधायक सरोज सोनकर का वादा निकला हवा-हवाई, भड़के ग्रामीणों का नारा— रोड नहीं तो वोट नहीं?
  • ​व्यूरो रिपोर्ट क्रांति मिश्र /अंजनी चतुर्वेदी /अब तक न्याय बहराइच
  • ​बलहा/सुजौली: चुनाव आते ही राजनेताओं के बड़े-बड़े वादे और दावों की बरसात शुरू हो जाती है, लेकिन धरातल पर सच्चाई कुछ और ही बयां करती है। इसका ताजा उदाहरण बलहा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला कारीकोट-सुजौली त्रिमोहानी हरखापुर मार्ग है। सालों से बदहाली का दंश झेल रहे इस मुख्य मार्ग को लेकर स्थानीय विधायक सरोज सोनकर द्वारा किए गए वादे अब पूरी तरह हवा-हवाई साबित हो रहे हैं।
    ​ग्रामीणों का आरोप है कि जो काम बीते 7 सालों में नहीं हो सका, उसे मात्र 7 महीने में पूरा कराने का खोखला दावा किया गया था। लेकिन समय बीतने के साथ यह बात एक बार फिर साबित हो गई है कि राजनेताओं के वादे अक्सर टूटने के लिए और चुनाव के समय जनता को छलने के लिए ही किए जाते हैं।
    ​बदहाली की मार झेल रहे दर्जनों गांव
    ​कारीकोट से सुजौली और हरखापुर को जोड़ने वाला यह मार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रतिदिन हजारों की संख्या में राहगीर, स्कूली बच्चे और मरीज इस गड्ढा-युक्त सड़क से गुजरने को मजबूर हैं। बारिश के दिनों में यह सड़क जलभराव और कीचड़ के कारण पूरी तरह हादसों का सबब बन जाती है। स्थानीय किसानों और व्यापारियों का कहना है कि सड़क की बदहाली से उनकी आजीविका पर सीधा असर पड़ रहा है।  
    ​जन-आक्रोश चरम पर: रोड नहीं तो वोट नहीं
    ​अब क्षेत्र की जनता का सब्र पूरी तरह टूट चुका है। विधायक के झूठे आश्वासनों और शासन-प्रशासन की उपेक्षा से आक्रोशित ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से लामबंद होना शुरू कर दिया है।
    ​क्षेत्र के युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों का कहना है:
    ​"चुनाव नजदीक आते ही नेता जी वादों का पिटारा खोल देते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही जनता को उनके हाल पर छोड़ दिया जाता है। इस बार जनता छलावे में नहीं आएगी। जब तक सड़क का पक्का निर्माण शुरू नहीं होता, तब तक हम शांत नहीं बैठेंगे।"
    ​ग्रामीणों ने एक स्वर में स्पष्ट चेतावनी दी है कि आगामी चुनावों में वे वोट का बहिष्कार करेंगे और क्षेत्र में "रोड नहीं, तो वोट नहीं" का अभियान चलाएंगे।
    ​सवाल जो विधायक और प्रशासन से पूछे जा रहे हैं:
    ​7 साल बनाम 7 महीने: जब 7 वर्षों में इस महत्वपूर्ण मार्ग की सुध नहीं ली गई, तो 7 महीने में काम पूरा कराने का दावा किस आधार पर किया गया था?
    ​जनता की सुरक्षा का जिम्मेदार कौन: गड्ढों में तब्दील हो चुकी इस सड़क पर आए दिन होने वाले हादसों का जवाबदेही किसकी है?
    ​जन-प्रतिनिधि की मंशा: क्या जन-सुविधाएं केवल चुनावी मुद्दा बनकर रह गई हैं?
    ​निष्कर्ष:
    बलहा विधानसभा क्षेत्र की जनता अब केवल आश्वासनों से संतुष्ट होने वाली नहीं है। कारीकोट-सुजौली मार्ग का निर्माण न होना स्थानीय राजनीति के लिए बड़ा मुद्दा बन चुका है, और यदि समय रहते कार्य शुरू नहीं हुआ तो जनप्रतिनिधियों को आगामी चुनाव में जनता के कड़े विरोध का सामना करना पड़ सकता है।

नवीनतम न्यूज़ अपडेट्स के लिए Facebook, Instagram, Twitter पर हमें फॉलो करें और लेटेस्ट वीडियोज़ के लिए हमारे YouTube चैनल को भी सब्सक्राइब करें।


Leave a Comment:

महत्वपूर्ण सूचना -

भारत सरकार की नई आईटी पॉलिसी के तहत किसी भी विषय/ व्यक्ति विशेष, समुदाय, धर्म तथा देश के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी दंडनीय अपराध है। इस प्रकार की टिप्पणी पर कानूनी कार्रवाई (सजा या अर्थदंड अथवा दोनों) का प्रावधान है। अत: इस फोरम में भेजे गए किसी भी टिप्पणी की जिम्मेदारी पूर्णत: लेखक की होगी।