गोरखपुर | गीडा - सहजनवां* हिंदू परंपरा में एक लोककथा प्रचलित है। एक बार यमराज के दूत मृत्युलोक में किसी का प्राण लेने जा रहे थे। रास्ते में उन्हें एक


*लोकतंत्र का बुद्धू-पुराण लोक-कथा  जब यमराज की कुर्सी पर बैठकर होने लगी चकबंदी*

*गोरखपुर | गीडा - सहजनवां*

हिंदू परंपरा में एक लोककथा प्रचलित है। एक बार यमराज के दूत मृत्युलोक में किसी का प्राण लेने जा रहे थे। रास्ते में उन्हें एक विशाल हाथी मिली, जिस पर एक छोटा सा आदमी बैठा था।

यमदूतों ने हाथी से पूछा - इतनी बड़ी देह है तेरी और तुझ पर इतना छोटा सा आदमी सवार है?

हाथी ने जवाब दिया - अरे, मरे हुए को तो कोई भी ढो ले जाता है, कभी जीते-जागते को ले जाकर देखो, तब तुम्हारी ताकत का पता चलेगा।बात यमदूतों को जंच गई। उन्होंने सोचा, आज किसी को जीते-जी स्वर्ग ले चला जाए। खोजते-खोजते उन्हें धरती पर बुद्धू नाम का एक लाल (लाला जाति) मिला। दूतों ने कहा - चलो, आज हम तुम्हें जीते-जी स्वर्गलोक ले चलते हैं।बुद्धू बोला - ऐसे नहीं जाऊंगा। मैं यहां चकबंदी करता हूं, वहां भी चकबंदी करने को मिलेगा तो चलूंगा।

दूतों ने कहा - कोई बात नहीं, कर लेना।

बुद्धू को लेकर दूत यमलोक पहुंचे ही थे कि रास्ते में एक पत्र आया - विष्णु भगवान ने दूसरे यमराज की नियुक्ति कर दी है, कृपया आप पद छोड़ दीजिए।

पत्र पाते ही पुराने यमराज ने तुरंत कुर्सी छोड़ दी और बुद्धू लाल जाकर उस कुर्सी पर बैठ गया। अब उसने अपनी चकबंदी शुरू कर दी। जो स्वर्ग में थे, उन्हें उठाकर नर्क में भेजने लगा और जो नर्क में थे, उन्हें स्वर्ग में भेजने लगा।

यह उलट-पलट देखकर विष्णु भगवान भी परेशान हो गए और भूतपूर्व यमराज भी। सब भागे-भागे विष्णु जी के पास पहुंचे और बोले - आपने कैसा दूत भेज दिया, इसने तो सारी धर्म-व्यवस्था ही उलट-पलट कर दी है।आखिर में सब लोग बुद्धू लाला के पास आए और हाथ जोड़कर बोले - जो करना था कर लिया, अब वापस मृत्युलोक लौट जाओ।

बुद्धू (लाला जाति) बोला - अगर मुझे वापस भेजोगे तो मैं वहां जाकर तुम्हारी भी जय-कीर्ति खत्म कर दूंगा, कह दूंगा कि ये सब बकवास है। उसने विष्णु भगवान तक को परेशान कर दिया, तब जाकर कहीं समझौता हुआ।

*आज का यथार्थ - वही कहानी दोहराई जा रही है*

ठीक यही काम आज ज्ञानेश जी के नेतृत्व में चुनाव आयोग करता हुआ दिख रहा है। अपनी मनमर्जी से चकबंदी, अपनी मनमर्जी से उलटफेर। सुप्रीम कोर्ट बेचारा बना बैठा है, सब देख रहा है, सुन रहा है।

सवाल यह है कि क्या लोकतंत्र को अभी और तमाशा देखना पड़ेगा? क्या सुप्रीम कोर्ट कोई हल निकालेगा या विधि-विधिबेत्ताओं द्वारा कही हुई बातों पर सिर्फ अमल होता रहेगा?

इन सब प्रश्नों के साथ आज जनता अपनी बात को प्रोटेक्ट करने के लिए जंतर-मंतर पर पड़ी हुई है और स्वार्थी व अहंकारी सरकार हमारे ही सैनिकों को उस प्रोटेस्ट को रोकने के लिए लगाए हुए है।

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Bhanu Pratap Dixit

अब तक टीवी न्यूज़ चैनल

भानु प्रताप दीक्षित अबतक टीवी के ऑफिस में कार्यरत हैं। उन्हें पत्रकारिता में 6 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे सीनियर को-एडिटर के पद पर अपनी जिम्मेदारियाँ निभा रहे हैं।

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