- रक्षा मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट में जम्मू-कश्मीर की मौजूदा सुरक्षा स्थिति को लेकर अहम जानकारी सामने आई है. रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय सेना के लगातार प्रयासों के चलते जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा स्थिति कुल मिलाकर नियंत्रण में है. स्थानीय आबादी विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रही है. सरकार और भारतीय सेना की ओर से चलाए जा रहे कई कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में भागीदारी कर रही है.
-
- रिपोर्ट में कहा गया है कि इसका असर जम्मू-कश्मीर के सुरक्षा माहौल पर भी दिखाई दे रहा है. हिंसा के स्तर में कमी आई है, विरोध प्रदर्शनों में गिरावट हुई है और पत्थरबाजी की घटनाएं शून्य हो गई हैं.
- ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बदली स्थिति
- रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जम्मू-कश्मीर और LoC पर सुरक्षा स्थिति में महत्वपूर्ण बदलाव आया. हालांकि, 10 और 12 मई 2025 को डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस यानी DGsMO स्तर की बातचीत के बाद स्थिति काफी हद तक स्थिर हुई है. इसके बावजूद सुरक्षा स्थिति में अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है.
-
- जम्मू-कश्मीर में बढ़ा पर्यटन
- सुरक्षा स्थिति में सुधार का असर पर्यटन पर भी दिखाई दे रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में करीब 2.3 करोड़ पर्यटक जम्मू-कश्मीर पहुंचे. वहीं, श्री अमरनाथ यात्रा में 4.13 लाख श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया. रिपोर्ट में कहा गया है कि पहलगाम आतंकी हमले के बावजूद पर्यटक सुरक्षा बलों पर भरोसा जता रहे हैं और जम्मू-कश्मीर में पर्यटन के लिए लौट रहे हैं.
- 2025 में LoC पर 163 सीजफायर उल्लंघन
- हालांकि, LoC पर सीजफायर उल्लंघन के आंकड़े सुरक्षा चुनौतियों की ओर भी इशारा करते हैं. रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में LoC पर सिर्फ 2 सीजफायर उल्लंघन हुए थे, जबकि 2025 में यह संख्या बढ़कर 163 हो गई. इनमें से 124 सीजफायर उल्लंघन ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दर्ज किए गए.
- सीजफायर उल्लंघन के आंकड़े:
- 2019: 3,233
- 2020: 4,645
- 2021: 594
- 2022: 1
- 2023: 0
- 2024: 2
- 2025: 163
- LoC पर घुसपैठ में कमी, IB पर बढ़ा फोकस
- रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में आतंकवादियों ने घुसपैठ की 6 कोशिशें कीं, जबकि LoC पर घुसपैठ की कोशिश के दौरान 12 पाकिस्तानी आतंकवादियों को मार गिराया गया. भारतीय सेना के आकलन के मुताबिक, पिछले सालों की तुलना में LoC पर घुसपैठ की कोशिशों में कुछ कमी आई है. हालांकि, आतंकियों की गतिविधियां अब इंटरनेशनल बॉर्डर (IB) सेक्टर की ओर अधिक केंद्रित होने का आकलन है. इसमें नशीले पदार्थों और युद्ध जैसे सामान की तस्करी भी शामिल है.
- स्थानीय आतंकवादी भर्ती में भारी गिरावट
- जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सबसे बड़ा बदलाव स्थानीय युवाओं की आतंकवादी संगठनों में भर्ती के आंकड़ों में दिखाई देता है. रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 में जहां 146 स्थानीय युवा आतंकवादी संगठनों में शामिल हुए थे, वहीं 2022 में यह संख्या 121 रही. इसके बाद इसमें लगातार गिरावट आई और 2023 में 19, 2024 में 4 और 2025 में सिर्फ 1 स्थानीय युवा आतंकवाद की राह पर गया.
- स्थानीय भर्ती का आंकड़ा
- 2021 – 146
- 2022 – 121
- 2023 – 19
- 2024 – 4
- 2025 – 1
- रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, स्थानीय युवाओं ने हिंसा का रास्ता छोड़कर सरकारी योजनाओं और नीतियों का लाभ उठाना शुरू किया है. 2025 में सिर्फ एक स्थानीय युवा के आतंकी संगठनों में शामिल होने को पाकिस्तान के उस नैरेटिव के लिए बड़ा झटका माना गया है, जिसमें जम्मू-कश्मीर के आतंकवाद को होम-ग्रोन यानी स्थानीय आतंकवाद के तौर पर पेश किया जाता है.
- 2025 में 19 आतंकी ढेर, 8 पाकिस्तानी
- जम्मू-कश्मीर के अंदरूनी इलाकों में भारतीय सेना के काउंटर-टेरर ऑपरेशंस लगातार जारी हैं. रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में ऐसे अभियानों में 19 आतंकवादियों को मार गिराया गया. इनमें 8 पाकिस्तानी आतंकवादी थे, जो कुल मारे गए आतंकवादियों का करीब 40 प्रतिशत हैं. रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, यह आंकड़ा जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान की ओर से चलाए जा रहे प्रॉक्सी वॉर में उसकी भूमिका को भी सामने रखता है.
- घरेलू समर्थन घटा, पाकिस्तानी भूमिका बरकरार
- जम्मू-कश्मीर से जुड़े इन आंकड़ों से एक तरफ स्थानीय स्तर पर आतंकवाद के लिए समर्थन और भर्ती में भारी गिरावट की तस्वीर सामने आती है, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान से जुड़े आतंकवादियों की मौजूदगी और घुसपैठ की कोशिशें सुरक्षा बलों के लिए लगातार चुनौती बनी हुई हैं. यानी जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा माहौल में बड़ा सुधार हुआ है, लेकिन LoC और IB के जरिए सीमा पार से होने वाली आतंकी गतिविधियों को लेकर भारतीय सेना अभी भी पूरी तरह सतर्क है.
नवीनतम न्यूज़ अपडेट्स के लिए
Facebook,
Instagram,
Twitter
पर हमें फॉलो करें और लेटेस्ट वीडियोज़ के लिए हमारे
YouTube
चैनल को भी सब्सक्राइब करें।
Leave a Comment: