दिल्ली विधानसभा की PAC द्वारा शीश महल की गोपनीय जांच लीक होने पर विशेषाधिकार हनन की कार्रवाई हो सकती है. PAC अध्यक्ष ने इस गोपनीय जानकारी को सार्वजनिक करने को राजनीतिक रंग देने की कोशिश बताया.


  • दिल्ली विधानसभा की पब्लिक अकाउंट्स कमिटी (PAC) के चेयरमैन अजय महावर ने शीशमहल मामले की जांच को लेकर सख्त रुख अपनाया है. उन्होंने आरोप लगाया कि PAC की गोपनीय कार्यवाही को सार्वजनिक और लीक किया गया, जबकि कमिटी की कार्यवाही नियमों के तहत गोपनीय होती है. उन्होंने इसे ब्रीच ऑफ प्रिविलेज बताते हुए विधानसभा अध्यक्ष से कार्रवाई की मांग की है.
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  • अजय महावर ने कहा कि 2008-09 के बाद से 17 साल बाद 2025 में PAC ने विधानसभा में कोई रिपोर्ट पेश की. पिछली सरकार में जो लोग बड़ी-बड़ी बात करते थे लोकायुक्त का उन्होंने कुछ नहीं किया.हमारे पास 6 फ्लैग स्टाफ रोड (शीशमहल) का मामला आया. PAC संविधान के अनुसार बंधी हुई है, तो हम CAG की रिपोर्ट के अनुसार ही काम करते हैं और हमारी प्रोसीडिंग गोपनीय होती है.
  • गोपनीय जांच की जानकारी लीक करने का आरोप
  • अजय महावर ने बताया कि 6 फ्लैग स्टाफ रोड का मामला विधानसभा से PAC को रेफर हुआ था. CAG की रिपोर्ट के आधार पर मामले की जांच कर रही थी. इसी जांच के दौरान PAC के सदस्यों को बंगले का दौरा करना था. यह PAC की कॉन्फिडेंशियल प्रोसीडिंग थी, लेकिन दौरे से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक कर दी गई. उन्होंने बताया कि इसी वजह से आज प्रस्तावित दौरा रद्द किया गया.
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  • उनका कहना है कि PAC की अनुमति के बिना मीडिया को भी जांच के दौरान साथ नहीं ले जाया जा सकता. यह ब्रीच ऑफ़ प्रिविलेज था. इसे राजनीतिक रंग देने की कोशिश की गई. हम स्पीकर से इस मामले में ब्रीच ऑफ़ प्रिविलेज की मांग कर रहे हैं.
  • CAG रिपोर्ट के हवाले से गिनाए कई सवाल
  • PAC चेयरमैन अजय महावर ने बताया कि CAG ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि PWD ने एक साला पुराना रेट कोट किया था, लेकिन उसका 50 फीसदी रेट और 50% क्षेत्रफल बढ़ा दिया गया.CAG रिपोर्ट में करीब 95 लाख रुपये के पर्दों का भी उल्लेख है. उन्होंने यह भी दावा किया कि स्टाफ ब्लॉक के लिए करीब 9 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे, लेकिन उसका निर्माण नहीं हुआ.
  • उन्होंने कहा कि कैंप ऑफिस का क्षेत्रफल भी करीब 700 वर्ग मीटर से बढ़ाकर 2600 वर्ग मीटर किया गया. उन्होंने यह भी दावा किया कि ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स के निर्णय में भी बाद में बदलाव किया गया था. साथ ही कहा किअब क़ानूनी सलाह लेकर हम आगे कदम बढ़ाएंगे. PAC का एक दायरा है, पॉलिटिकल पार्टी सवाल जवाब कर सकती हैं, लेकिन इसमें PAC को घसीटना ठीक नहीं है.

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