- दिल्ली में ‘तहलका’ के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल ने 14 सितंबर को मापुसा कोर्ट के सामने सरेंडर कर दिया. बॉम्बे हाई कोर्ट ने उन्हें 2013 में 10 साल की सजा सुनाई थी. कोर्ट ने उन्हें अपनी जूनियर सहयोगी के साथ रेप करने के मामले में 10 साल की जेल की सजा सुनाई थी. तरुण ने गोवा के एक होटल की लिफ्ट में उनके साथ रेप किया था.
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- तेजपाल ने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें दो हफ्ते के अंदर सरेंडर करने का निर्देश दिया था. हाई कोर्ट ने 6 अगस्त को गोवा की सेशंस कोर्ट के 2021 के उस फैसले को पलट दिया था जिसमें उन्हें बरी कर दिया गया था.
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- इसके बाद उन्हें इस अपराध का दोषी ठहराया था. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का मतलब है कि तेजपाल को अपनी सजा काटनी होगी. इसकी शुरुआत उनके सरेंड करने के बाद से हुई. हालांकि, उनकी अपील पर आगे कोई आदेश आने पर स्थिति बदल सकती है.
- गोवा सरकार ने भी कोर्ट के फैसले को किया था चैलेंज
- ये मामला नवंबर 2013 में ‘तहलका’ मैगजीन के एक इवेंट के दौरान होटल की लिफ्ट में एक जूनियर सहयोगी के साथ यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़ा है. गोवा की सेशंस कोर्ट ने मई 2021 में उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया था. कोर्ट ने कहा था कि अभियोजन पक्ष मामले को बिना किसी शक के साबित करने में नाकाम रहा.
- गोवा सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट में उस फैसले को चुनौती दी, जिसने बाद में बरी करने के फैसले को पलट दिया. फिर उन्हें 10 साल की कठोर सजा सुनाई. तेजपाल ने वकील आदित्य समाद्दार के ज़रिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. गोवा सरकार ने भी हाई कोर्ट की सजा को चुनौती दी है. इसके बाद उम्रकैद की मांग की है. उनका तर्क है कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए यह सजा नाकाफी थी.
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