*ड्रैगन फ्रूट की खेती से बदली जौनपुर के युवा किसान की तकदीर, सालाना 5 लाख के मुनाफे का अनुमान*
*जौनपुर।* मुफ्तीगंज ब्लॉक के पसेरा गांव निवासी युवा किसान अर्पित मेस्सी पुत्र मार्टसन मेस्सी ने पारंपरिक खेती से हटकर ड्रैगन फ्रूट की व्यावसायिक खेती को अपनाकर सफलता की नई मिसाल पेश की है। कम लागत में बेहतर आमदनी और बाजार में बढ़ती मांग को देखते हुए शुरू की गई इस खेती से वह क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बने हुए हैं।
अर्पित मेस्सी ने बताया कि पारंपरिक फसलों में लागत अधिक और मुनाफा कम होने के कारण उन्होंने बागवानी की ओर कदम बढ़ाया। ड्रैगन फ्रूट यानी कमलम की बढ़ती मांग और स्वास्थ्य संबंधी फायदों को देखते हुए उन्होंने इसकी खेती शुरू करने का निर्णय लिया।
उद्यान विभाग ने दिया तकनीकी सहयोग
खेती शुरू करने में जिला उद्यान विभाग ने अर्पित का मार्गदर्शन किया। विभाग की ओर से खाद, सिंचाई और पौधों की देखभाल संबंधी तकनीकी जानकारी दी गई। ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ योजना के तहत उन्हें 90 प्रतिशत अनुदान पर ड्रिप इरीगेशन की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई, जिससे सिंचाई और उर्वरक प्रबंधन में मदद मिली।
3000 पौधे और 750 सीमेंट पिलर
अर्पित ने अपने खेत में उच्च गुणवत्ता वाले करीब 3000 ड्रैगन फ्रूट के पौधे लगाए हैं। कैक्टस प्रजाति के इस पौधे को सहारे की जरूरत होती है, जिसके लिए खेत में 750 सीमेंट के पिलर लगाए गए हैं। पौधों को इन पिलरों के सहारे विकसित किया जा रहा है।
50 क्विंटल उत्पादन, करीब 5 लाख रुपये शुद्ध लाभ का अनुमान
ड्रैगन फ्रूट के पौधे रोपण के करीब डेढ़ से दो वर्ष में फल देना शुरू कर देते हैं। अर्पित के बगीचे से प्रतिवर्ष लगभग 50 क्विंटल उत्पादन का अनुमान है। वर्तमान में स्थानीय बाजार में उन्हें करीब 160 रुपये प्रति किलोग्राम का थोक भाव मिल रहा है। किसान के अनुसार छोटे व्यापारी खेत से ही फल खरीद लेते हैं, जिससे विपणन की समस्या नहीं है। खर्च निकालने के बाद सालाना करीब 5 लाख रुपये शुद्ध लाभ होने का अनुमान है।
एकीकृत खेती से बढ़ा दायरा
अर्पित केवल ड्रैगन फ्रूट तक सीमित नहीं हैं। वह एकीकृत खेती के तहत पोल्ट्री फार्मिंग, सोलर पैनल से खेती, भिंडी व पपीता की इंटरक्रॉपिंग तथा ग्राफ्टेड बैंगन की खेती भी कर रहे हैं। इसके अलावा वह ड्रैगन फ्रूट के पौधों का उत्पादन कर उनकी बिक्री भी कर रहे हैं।
अर्पित मेस्सी की खेती देखने और आधुनिक तकनीक सीखने के लिए दूर-दूर से किसान पहुंच रहे हैं। उनका कहना है कि हौसला बुलंद हो और सरकारी योजनाओं का सही दिशा में लाभ मिले तो खेती घाटे का सौदा नहीं, बल्कि बेहतर आमदनी का मजबूत जरिया बन सकती है।
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