जौनपुर।* जफराबाद थाना क्षेत्र के राजेपुर-कजगांव में सौहार्द और अनूठी परंपरा का प्रतीक ऐतिहासिक कजरहवा कजली मेला इस वर्ष भी पूरे उत्साह के साथ आयोजित


*दुल्हन के लिए दो गांवों में हुई जुबानी जंग, बिना दुल्हन लौटी बरात*

*जौनपुर।* जफराबाद थाना क्षेत्र के राजेपुर-कजगांव में सौहार्द और अनूठी परंपरा का प्रतीक ऐतिहासिक कजरहवा कजली मेला इस वर्ष भी पूरे उत्साह के साथ आयोजित हुआ। करीब 173 वर्ष पुरानी इस परंपरा में इस बार भी बरात आई, दूल्हे सजे-धजे पहुंचे, लेकिन दुल्हन नहीं मिली और बरात को बिना दुल्हन के ही वापस लौटना पड़ा। दुल्हन को लेकर दोनों गांवों के बीच जमकर जुबानी जंग भी हुई।

               बुजुर्गों के अनुसार राजेपुर और कजगांव की युवतियां जरई बहाने राजेपुर स्थित कजरहवा पोखरे पर पहुंचती हैं। यहां दोनों पक्षों के बीच कजली गायन का मुकाबला होता है। परंपरा के मुताबिक दोनों पक्ष एक-दूसरे पर कजली के माध्यम से बढ़त बनाने का प्रयास करते हैं। मुकाबले का कोई निर्णायक परिणाम नहीं निकलने पर परंपरा के तहत दुल्हन की विदाई नहीं हो पाती।

              बताया गया कि राजेपुर की ओर से दद्दू साव और कजगांव की ओर से कालिका साव लड़कियों को घर ले जाने के लिए पहुंचे। हालांकि लड़कियों ने कजली मुकाबले का फैसला होने तक वहां से जाने से इनकार कर दिया। इसके बाद राजेपुर पक्ष के दद्दू साव ने सभी को अपने घर चलकर वहीं कजली मुकाबला जारी रखने की बात कही। रातभर कजली का मुकाबला चला, लेकिन कोई निर्णय नहीं हो सका।

            परंपरा के अनुसार बाद में कजगांव की लड़कियों की विदाई कर दी गई। दोनों गांवों में यह अनूठी परंपरा वर्षों से चली आ रही है। हर वर्ष दोनों ओर से दूल्हे बरात लेकर पहुंचते हैं, लेकिन कजली मुकाबले का फैसला न होने के कारण दुल्हन लेकर नहीं लौट पाते।

             इस बार राजेपुर की ओर से दूल्हा नाटे सज-धजकर डीजे और घोड़े के साथ पोखरे पर पहुंचा। उसके साथ नाई जलील अहमद और पंडित झंझट भी मौजूद रहे। वहीं कजगांव की ओर से दूल्हे के रूप में रहीस, करिया, गोलू और सब्बीर सहित नाई राजेश शर्मा तथा पंडित रितेश कुमार पांडेय मौजूद रहे। दोनों पक्षों के बीच दुल्हन देने को लेकर पारंपरिक अंदाज में कहासुनी और जुबानी तकरार हुई।

कोरोना महामारी के चलते दो वर्ष तक इस आयोजन पर विराम लगा था। इसके बाद फिर से शुरू हुई इस ऐतिहासिक परंपरा को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटे। मेले ने एक बार फिर दोनों गांवों की साझा सांस्कृतिक विरासत और आपसी सौहार्द की तस्वीर पेश की।

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Bhanu Pratap Dixit

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भानु प्रताप दीक्षित अबतक टीवी के ऑफिस में कार्यरत हैं। उन्हें पत्रकारिता में 6 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे सीनियर को-एडिटर के पद पर अपनी जिम्मेदारियाँ निभा रहे हैं।

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