1000 लोग इस बाढ़ में बह गए हैं. बाढ़ का असर बिहार तक देखने को मिल रहा है. बिहार के सीमावर्ती जिलों में अलर्ट जारी किया गया है.


नेपाल के रसुवा जिले में बुधवार सुबह भोटेकोशी नदी में अचानक बाढ़ आ गई. इसमें नदी किनारे बसे बाजार, बस्तियां, सड़कें और पुल तबाह हो गए. तिमुरे से लेकर स्याफ्रुबेशी तक बड़े इलाके में बाढ़ का पानी घुस गया. हजार से ज्यादा लोग लापता है. इसमें 100 से ज्यादा भारतीयों समेत करीब 300 विदेशी टूरिस्ट शामिल हैं. नुकसान का पूरा आंकड़ा अभी साफ नहीं है. रेस्क्यू टीमों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. नेपाल सरकार ने आज संसद में बताया कि रसुवा की भोटेकोशी नदी में बुधवार सुबह अचानक आई भीषण बाढ़ से बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है. सरकार के मुताबिक, सुबह 8:37 बजे इलाके में भूकंप के झटके महसूस किए गए और इसके बाद हिमस्खलन के कारण बाढ़ आने की शुरुआती जानकारी मिली है. हालांकि, इस वजह की अभी पूरी तरह पुष्टि नहीं हुई है.बाढ़ से रसुवा के साथ नुवाकोट और धादिंग के आसपास के इलाकों में भी नुकसान हुआ है. प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने डिजास्टर मैनेजमेंट से जुड़ी राष्ट्रीय परिषद की बैठक बुलाई. सरकार ने प्रभावित लोगों की तलाश, रेस्क्यू और राहत के लिए सभी संबंधित एजेंसियों को काम में लगाने के निर्देश दिए हैं. इसके अलावा कैबिनेट की इमरजेंसी मीटिंग में जरूरी फैसले लिए गए. लेकिन इस तबाही की सबसे बड़ी वजह अभी रहस्य बनी हुई है. सवाल उठ रहा है कि इतना ज्यादा पानी अचानक आया कहां से? क्या चीन की तरफ मौजूद किसी हिमनदी झील के टूटने से यह बाढ़ आई? नेपाल के भूविज्ञान विशेषज्ञों का शुरुआती अनुमान इसी ओर इशारा कर रहा है…वैज्ञानिकों ने क्या वजह बताई?

त्रिभुवन यूनिवर्सिटी के जियोलॉजी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर रंजन कुमार दहल के मुताबिक, बाढ़ के वीडियो में पानी की मात्रा सामान्य बाढ़ से बहुत ज्यादा दिखाई दे रही है. उनका कहना है कि इतनी बड़ी बाढ़ सिर्फ नदी के रास्ते में रुकावट आने से नहीं आ सकती. इसके लिए बड़ी मात्रा में पानी का एक जगह जमा होना और फिर अचानक निकलना जरूरी है.विशेषज्ञों को शक है कि लेंडे नदी के ऊपरी हिस्से में मौजूद तीन झीलों में से कोई एक टूट सकती है. संभव है कि झील के आसपास भूस्खलन या हिमस्खलन हुआ हो. इससे झील पर दबाव बढ़ा और पानी अचानक नीचे की तरफ बह निकला. हालांकि अभी यह तय नहीं है कि कौन-सी झील टूटी और वास्तव में घटना कैसे हुई. दहल का कहना है कि उन्होंने इससे पहले इतनी बड़ी और तेज बाढ़ नहीं देखी.चीन से जानकारी पर निर्भर नेपाल

इस घटना में एक और बड़ी चिंता समय पर जानकारी मिलने की है. नेपाली विशेषज्ञों के पास इलाके की नई सैटेलाइट तस्वीरें और पर्याप्त ताजा डेटा नहीं हैं. उन्होंने चीनी टीमों के साथ कई ऑनलाइन बैठकें की हैं और संभावित जगहों की जानकारी साझा की है. लेकिन नेपाली विशेषज्ञों को काफी हद तक चीन से मिलने वाले डेटा और ब्रीफिंग पर निर्भर रहना पड़ रहा है.

विशेषज्ञों के अनुमान के मुताबिक, संभावित घटना स्थल नेपाल-चीन सीमा से करीब 30-40 किमी ऊपर हो सकता है. अगर झील टूटने या हिमस्खलन की जानकारी उसी समय मिल जाती, तो नीचे रहने वाले लोगों को चेतावनी देने के लिए करीब 30 से 45 मिनट का समय मिल सकता था. इससे कई जानें बचाई जा सकती थीं. नेपाल की बाढ़ का असर भारत में भी हो सकता है. बिहार के 8 जिलों में भी अलर्ट जारी किया गया है.पिछले साल भी आई थी ऐसी बाढ़

भोटेकोशी इलाके में पिछले साल भी ऐसी ही बड़ी बाढ़ आई थी. उस घटना में 9 लोगों की मौत और 18 लोग लापता हुए थे. बाद में पता चला था कि तिब्बत में एक सुप्राग्लेशियल झील से अचानक पानी निकलने के कारण बाढ़ आई थी. इससे नेपाल-चीन के बीच बना फ्रेंडशिप ब्रिज भी बह गया था और सीमा व्यापार प्रभावित हुआ था.

इस बार विशेषज्ञों को लगता है कि स्थिति उससे भी ज्यादा गंभीर हो सकती है. 1980-82 में भी हिमनदी झील टूटने से नामचे इलाके में बड़ी बाढ़ आई थी, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा बाढ़ का पानी और उसकी ताकत उससे कहीं ज्यादा दिखाई दे रही है.

जलवायु परिवर्तन भी बढ़ा रहा खतरा

विशेषज्ञ इस तरह की घटनाओं को जलवायु परिवर्तन से भी जोड़ रहे हैं. हिमालय में तापमान बढ़ने से ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं. इसके साथ हिमस्खलन, ग्लेशियरों पर बारिश और भूस्खलन की घटनाएं भी बढ़ रही हैं. इससे हिमनदी झीलों में पानी बढ़ता है और उनके अचानक टूटने का खतरा पैदा होता है. फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या चीन की तरफ झील टूटने की जानकारी नेपाल को पहले से मिली थी? लेबर कल्चर पार्टी के अध्यक्ष हरकराज राय ने संसद में सरकार से यही सवाल पूछा है. उन्होंने कहा कि समय पर सूचना मिलती तो नुकसान कम किया जा सकता था.

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