आमोद कुमार


बांदा। बुंदेलखंड की मिट्टी में प्रतिभा की कोई कमी नहीं, जरूरत सिर्फ उसे सही मंच और संसाधन देने की है। इसका शानदार उदाहरण बांदा के उन कराटे खिलाड़ियों ने पेश किया, जिन्होंने लखनऊ के के.डी. सिंह बाबू स्टेडियम में आयोजित वर्ल्ड मॉडर्न कराटे नेशनल प्रतियोगिता में दमदार प्रदर्शन करते हुए जिले की झोली में 10 पदक डाल दिए।
वीरांगना झलकारी बाई आत्म सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान बुंदेलखंड से जुड़े इन खिलाड़ियों की उपलब्धि पर जैन धर्मशाला में सम्मान समारोह एवं पत्रकार वार्ता आयोजित की गई। समारोह में मुख्य अतिथि सदर विधायक प्रकाश द्विवेदी ने पदक विजेता खिलाड़ियों को माला, मेडल और प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया।
सम्मान समारोह में खिलाड़ियों ने आत्मरक्षा के हैरतअंगेज करतब भी दिखाए। उनके प्रदर्शन ने यह साबित किया कि मार्शल आर्ट केवल मुकाबले का खेल नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, अनुशासन और विपरीत परिस्थितियों में खुद की रक्षा करने का मजबूत माध्यम भी है।किसी ने सोना जीता, किसी ने चांदी, किसी ने कांस्य प्रतियोगिता में हर्ष कुमार और रमन यादव ने स्वर्ण पदक जीतकर शानदार सफलता हासिल की।वहीं जीशान सिद्दीकी, अंजलि अनुरागी, अभय कुमार, प्रिंस प्रजापति और लोकेश कुशवाहा ने रजत पदक अपने नाम किए।रिन्कू राजपूत, आशु चोट अनुरागी और शम्भू यादव ने कांस्य पदक जीतकर जिले का गौरव बढ़ाया।प्रतिभा है, लेकिन संसाधनों की कमी बड़ी चुनौतीकार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि कराटे और मार्शल आर्ट बच्चों में शारीरिक क्षमता के साथ आत्मविश्वास और अनुशासन भी पैदा करते हैं। बांदा में प्रतिभाओं की भरमार है, लेकिन आधुनिक ट्रेनिंग किट, पर्याप्त प्रैक्टिस हॉल और आर्थिक संसाधनों की कमी कई खिलाड़ियों के सपनों के सामने दीवार बनकर खड़ी है।यही सवाल इस सफलता के बीच सबसे महत्वपूर्ण है—जब बच्चे पदक जीतकर लौट सकते हैं, तो क्या उन्हें वह मैदान और संसाधन नहीं मिल सकते, जहां वे देश के लिए अंतरराष्ट्रीय पदक जीतने की तैयारी कर सकें?कार्यक्रम के माध्यम से सरकार, प्रशासन और समाजसेवी संस्थाओं से खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की गई, ताकि बुंदेलखंड के ये उभरते सितारे भविष्य में राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय और ओलंपिक मंच पर भी देश का नाम रोशन कर सकें।इस अवसर पर राजेंद्र कबीर (उत्सव ज्वैलर्स), संस्थान संयोजक शिवप्रसाद भारती, संतोष कबीर, ब्लैक बेल्ट हर्ष कुमार, टीम मैनेजर आशुतोष कुमार और कोच अरविन्द कुमार सहित प्रशिक्षक, अभिभावक और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।बुंदेलखंड अक्सर संसाधनों की कमी के लिए जाना जाता है, लेकिन इन बच्चों ने बता दिया कि हौसले की कोई कमी नहीं। जरूरत सिर्फ इतनी है कि इनकी मुट्ठियों में ताकत के साथ सरकार और समाज का सहयोग भी हो।

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