प्रशासन अलर्ट, नदी-नालों और तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की अपील; नाव में ओवरलोडिंग से बचने और डूबने पर खुद जोखिम न लेने की सलाह
आमोद कुमार
जनसुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता, संवेदनशील इलाकों पर पैनी नजर; व्यवस्थाएं दुरुस्त रखने के निर्देश। आमोद कुमार
जनसुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता, संवेदनशील इलाकों पर पैनी नजर; व्यवस्थाएं दुरुस्त रखने के निर्देश। आमोद कुमार
बांदा। आसमान से बरसता पानी जहां किसानों के लिए उम्मीद है, वहीं नदी-नालों के उफान और जलभराव की आशंका प्रशासन के लिए किसी परीक्षा से कम नहीं। संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए चित्रकूटधाम मंडल के आयुक्त अजीत कुमार ने मंडल के अधिकारियों को चेताया है कि आपदा आने के बाद हाथ-पांव मारने के बजाय तैयारियां पहले से जमीन पर दिखाई देनी चाहिए।आयुक्त ने स्पष्ट किया कि जनसुरक्षा और समय से राहत पहुंचाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने मंडल के जिलाधिकारियों समेत राजस्व, पुलिस, सिंचाई, स्वास्थ्य, पंचायतीराज, नगर निकाय, विद्युत, जल निगम, पशुपालन तथा खाद्य एवं रसद विभाग को आपसी समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए।नदी का पानी बढ़े तो सूचना देर से नहीं पहुंचनी चाहिए
नदियों, नालों और अन्य जलस्रोतों के जलस्तर की लगातार निगरानी करने तथा जलस्तर बढ़ने की स्थिति में प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को समय रहते सूचना देने के निर्देश दिए गए। बाढ़ चौकियों और राहत शिविरों को सक्रिय रखने के साथ नाव, रोशनी, पेयजल, खाद्यान्न और दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया।क्योंकि बाढ़ सिर्फ पानी का संकट नहीं होती—यह तैयारी और लापरवाही के बीच का अंतर भी उजागर करती है।
जलभराव पर सवाल सिर्फ बारिश से नहीं, व्यवस्था से भी
नगर निकाय और पंचायतीराज विभाग को जलभराव वाले इलाकों में प्रभावी जलनिकासी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। नालियों और जलनिकासी मार्गों की सफाई कराकर पानी के सुचारू प्रवाह की व्यवस्था रखने को कहा गया।
हर बारिश में अगर वही सड़कें तालाब और वही गलियां नाले बनती रहें तो सवाल केवल बादलों पर नहीं उठता, बल्कि उन व्यवस्थाओं पर भी उठता है जिनका काम पानी को रास्ता देना है।अस्पतालों में दवा खत्म हुई तो आफत बढ़ेगी स्वास्थ्य विभाग को सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर आवश्यक दवाओं, ओआरएस और क्लोरीन की पर्याप्त उपलब्धता रखने के निर्देश दिए गए। चिकित्सकीय टीमों को जरूरत पड़ने पर क्षेत्र में तत्काल पहुंचने के लिए तैयार रखने तथा जलजनित व संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के लिए जनजागरूकता अभियान चलाने को कहा गया।
बिजली का तार मौत का जाल न बने वर्षा के दौरान विद्युत सुरक्षा को लेकर भी सख्ती बरतने के निर्देश दिए गए। क्षतिग्रस्त पोल, टूटे तार या खराब विद्युत उपकरण की सूचना मिलते ही तत्काल कार्रवाई करने को कहा गया। आमजन से टूटे तारों से दूर रहने और तत्काल सूचना देने की अपील की गई।अफवाह नहीं, सूचना पर भरोसा करें
आयुक्त ने मंडलवासियों से नदी, नाले और तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूर रहने, बच्चों और बुजुर्गों की विशेष सुरक्षा करने तथा जरूरत पड़ने पर राहत शिविरों अथवा सुरक्षित स्थानों पर जाने में प्रशासन का सहयोग करने की अपील की।उन्होंने अफवाहों से बचने और केवल अधिकृत एवं विश्वसनीय माध्यमों से प्राप्त सूचनाओं पर भरोसा करने को कहा।अब कुर्सियों से नहीं, जमीन पर दिखनी चाहिए तैयारी
आयुक्त ने अधिकारियों को लगातार क्षेत्र भ्रमण और स्थलीय अनुश्रवण करने तथा हर सूचना पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। विभागों के बीच समन्वय की कमी को किसी भी संकट की वजह न बनने देने की हिदायत दी गई।
दरअसल, आपदा की असली भयावहता पानी में नहीं, उस समय सामने आती है जब व्यवस्था उससे पहले तैयार नहीं होती। बाढ़ कब आएगी, यह प्रकृति तय करती है; लेकिन उसके सामने प्रशासन कितना तैयार मिलेगा, यह अधिकारियों की इच्छाशक्ति और व्यवस्था की चुस्ती तय करती है।आयुक्त का संदेश साफ है—बारिश को रोका नहीं जा सकता, लेकिन लापरवाही को जरूर रोका जा सकता है। अब निगाह इस बात पर होगी कि निर्देश कागजों में दर्ज होते हैं या संवेदनशील इलाकों में उनकी मौजूदगी भी दिखाई देती है।
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आमोद कुमार
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सुरेश यादव ब्यूरो रिपोर्ट बहराइच:-
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