रक्षाबंधन पर क्षेत्राधिकारी नागेंद्र चौबे व कोतवाली प्रभारी जे बी पांडे की पैनी नजर
चप्पे-चप्पे पर पुलिस का पहरा, चौराहा-तिराहों पर तैनाती; त्योहार को लेकर सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद
जेल की चहारदीवारी के भीतर भाई-बहन के रिश्ते की दिखी गर्माहट, महिला बंदियों की बनाई राखियों ने बढ़ाई आत्मीयता
आमोद कुमार
। जेल की ऊंची दीवारें भले ही बंदियों को समाज से अलग करती हों, लेकिन रिश्तों की डोर को कैद नहीं कर सकतीं। रक्षाबंधन पर बांदा मंडल कारागार में कुछ ऐसा ही भावुक दृश्य देखने को मिला। शासन के निर्देश पर जेल प्रशासन ने बंदी भाइयों को बहनों के स्नेह से जोड़ने के लिए विशेष इंतजाम किए। जेल परिसर में सजे पंडाल में सुबह नौ बजे से शाम पांच बजे तक बहनों ने अपने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधा और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
रंग-बिरंगे गुब्बारों और फूलों से सजे पंडाल में जेल की चहारदीवारी कुछ देर के लिए जैसे रिश्तों की चौखट बन गई। दूर-दराज से पहुंचीं बहनों के चेहरों पर अपने भाइयों से मिलने की खुशी साफ दिखाई दी।
किसी बंदी की कलाई नहीं रही सूनी इस रक्षाबंधन की सबसे मानवीय तस्वीर उन बंदियों के हिस्से आई, जिनकी बहनें किसी कारणवश जेल नहीं पहुंच सकीं या जिनकी कोई बहन नहीं है। ऐसे बंदियों की कलाई भी राखी से सूनी नहीं रहने दी गई। जेल में निरुद्ध महिला बंदियों द्वारा अपने हाथों से तैयार की गई राखियां इन बंदियों की कलाई पर बांधी गईं।यह पहल महज एक रस्म नहीं, बल्कि इस संदेश की तरह रही कि सजा अपराध के लिए हो सकती है, लेकिन मानवीय संवेदनाओं को कैद नहीं किया जा सकता।
सुरक्षा के बीच सम्मान और संवेदना वरिष्ठ जेल अधीक्षक शशिकांत सिंह ने बताया कि वर्तमान में मंडल कारागार में करीब 750 बंदी निरुद्ध हैं। जेल नियमों और सुरक्षा व्यवस्था का पूरी तरह पालन करते हुए रक्षाबंधन पर्व मनाया गया। सैकड़ों बहनों ने कारागार पहुंचकर अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी और उनके बेहतर भविष्य की कामना की।
व्यवस्था से खुश दिखीं बहनें
जेल प्रशासन की व्यवस्था और सुरक्षा के साथ मिले सम्मान से मुलाकात करने पहुंचीं बहनें भी संतुष्ट नजर आईं। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश सरकार की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्हें अपने भाइयों के साथ रक्षाबंधन मनाने का अवसर मिला।बांदा जेल का यह रक्षाबंधन यही संदेश छोड़ गया कि कानून की दीवारें अपराधी को रोक सकती हैं, लेकिन भाई-बहन के रिश्ते में बंधे स्नेह को नहीं।
नवीनतम न्यूज़ अपडेट्स के लिए Facebook, Instagram, Twitter पर हमें फॉलो करें और लेटेस्ट वीडियोज़ के लिए हमारे YouTube चैनल को भी सब्सक्राइब करें।

अब तक इंडिया लाइव न्यूज़ चैनल
राजेश कुमार सिद्धार्थ अबतक मीडिया ग्रुप के संपादक-इन-चीफ हैं, जिन्हें 25 वर्षों से अधिक का पत्रकारिता जगत में अनुभव प्राप्त है, और जो अपनी कुशल नेतृत्व क्षमता से अबतक मीडिया ग्रुप
चप्पे-चप्पे पर पुलिस का पहरा, चौराहा-तिराहों पर तैनाती; त्योहार को लेकर सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद
आमोद कुमार
Leave a Comment: