रायगड़ विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर रायगड़ जिले के कोलनरा ब्लॉक अंतर्गत


 रायगड़ विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर रायगड़ जिले के कोलनरा ब्लॉक अंतर्गत जरेड़ी पंचायत के तल शिकाबाड़ी, रेगंलपाड़ु सहित विभिन्न गांवों में आदिवासी संघर्ष मोर्चा (ASM) की ओर से रविवार को आदिवासी मेला, विशाल शोभायात्रा एवं आमसभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय के लोगों ने भाग लिया।कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक वाद्य यंत्रों, नृत्य और गीतों के साथ विशाल आदिवासी शोभायात्रा निकाली गई। पारंपरिक वेशभूषा में शामिल महिला-पुरुषों और युवाओं ने अपनी संस्कृति एवं परंपरा का प्रदर्शन किया। इससे पूरा क्षेत्र आदिवासी संस्कृति और एकजुटता के नारों से गूंज उठा।शोभायात्रा के बाद आदिवासी समुदाय के लोगों ने महान आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इसके बाद एक आमसभा आयोजित की गई।आमसभा को संबोधित करते हुए आदिवासी संघर्ष मोर्चा के नेता त्रिपति गमांग ने केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न नीतियों को लेकर आदिवासी समुदाय की समस्याओं और अधिकारों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर आदिवासियों की भाषा, संस्कृति, परंपरा और प्रकृति आधारित जीवन पद्धति को खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने आदिवासी भाषाओं एवं लिपियों को संवैधानिक अधिकार एवं उचित मान्यता देने की मांग की। साथ ही कहा कि विकास परियोजनाओं के नाम पर प्राकृतिक संसाधनों का दोहन किया जा रहा है। ग्रामसभा के अधिकारों को कमजोर कर कंपनियों को जमीन देने के प्रयास किए जा रहे हैं, जो आदिवासी समुदाय के हितों के विपरीत है।
सभा में आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन के अधिकार का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। वक्ताओं ने कहा कि संविधान और पेसा कानून में आदिवासी समुदाय को दिए गए अधिकारों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाना चाहिए। आदिवासी क्षेत्रों में ग्रामसभा की भूमिका और अधिकारों को सुनिश्चित करने की मांग भी की गई।त्रिपति गमांग ने आरोप लगाया कि आदिवासियों के खिलाफ झूठे मामले दर्ज किए जा रहे हैं और उनके संवैधानिक अधिकारों का अब तक पूरी तरह से क्रियान्वयन नहीं हुआ है। उन्होंने वर्ष 2006 के वन अधिकार कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग की।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पीढ़ियों से आदिवासियों के कब्जे और उपयोग में रही जमीन को कुछ जमीन माफियाओं द्वारा धोखाधड़ी के माध्यम से हथियाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने सरकार से आदिवासियों की जमीन, आजीविका और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।सभा में वक्ताओं ने कहा कि सरकार को बड़े उद्योगों और कंपनियों के हितों के बजाय आदिवासी समुदाय के अधिकारों और समस्याओं पर प्राथमिकता से ध्यान देना चाहिए। आदिवासी समाज की जमीन, जल, जंगल और प्राकृतिक संसाधनों पर उनके पारंपरिक अधिकारों की रक्षा करने की मांग की गई।त्रिपति गमांग ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार द्वारा आदिवासियों के संवैधानिक एवं कानूनी अधिकारों का उल्लंघन किया जाता रहा, तो आने वाले दिनों में आदिवासी संघर्ष मोर्चा अपने आंदोलन को और तेज करने के लिए बाध्य होगा।कार्यक्रम में अनिरुद्ध निशिका, सिमाद्रि पातिका, शिव हारका, मूर्ति मिनियाका, आछाना मांडांगी, अष्टम उलका, आनंद अटका, जमुना पातिका, फूलवती पातिका सहित बड़ी संख्या में आदिवासी नेता, कार्यकर्ता एवं ग्रामीण मौजूद रहे।कार्यक्रम के माध्यम से आदिवासी समुदाय ने अपनी भाषा, संस्कृति, परंपरा, जल-जंगल-जमीन तथा संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुटता का संदेश दिया।


चितरंजन नायक
रायगड (ओडिशा)

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